पाकिस्तान की फायरिंग में शहीद हुए लांस नायक गुरमेल सिंह की पत्नी ने शहादत की खबर सुनते ही ऐसी बात कही, सुनकर आप कहेंगे- बेटी तुम धन्य हो।
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शहीद लांस नायक गुरमेल सिंह
शनिवार जम्मू-कश्मीर के राजौरी सेक्टर में हुई फायरिंग में मेजर समेत शहीद चार जवानों में एक जवान लांस नायक गुरमेल सिंह (34) शहीद हो गए। वहीं शहादत की खबर सुनकर उनकी पत्नी पत्नी कमलजीत कौर सामने लगी अपनी और पति की फोटो निहारने लगती है ‘कहती है कि वाहे गुरू जी, मुझे हर जन्म में शहीद गुरमेल सिंह ही पति देना, उनके चरणों में मेरा हर जन्म गुजरे’।
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शहीद लांस नायक गुरमेल सिंह
गुरमेल सिंह अमृतसर से करीब 22 किलोमीटर दूर कत्थूनंगल के गांव अल्केर का रहने वाला था। गांव के गुरूद्वारे में जहां श्री गुरू गोबिंद सिंह के 350वें प्रकाश पर्व पर शुकराना हो रहा था, वहीं शहीद का परिवार भी शुकराना कर रहा था कि उनके घर गुरमेल सिंह जैसा बेटापैदा हुआ, जिसने देश के लिए कुर्बानी दी। बेटे की पुरानी फोटो देख तरसेम सिंह फफक पड़े, कहने लगे कि मेरे बेटे जैसा सुंदर, सुशील, आज्ञाकारी शायद ही कोई हो।
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शहीद लांस नायक गुरमेल सिंह
रब का बंदा था और रब ने ही उसे बुला लिया। बेटा भले ही शहीद हो गया हो लेकिन बाप का दिल रो ही पड़ता है। खुद को कठोर बनने का प्रयास करते हुए खुद ही तरसेम सिंह कहने लगे ‘मेरा दिल कमजोर नहीं है, देश के लिए बेटे की शहादत पर रब का शुक्रगुजार हूं कि मुझे ऐसी औलाद वाहेगुरू ने दी। मेरा मन रो तो रहा है, लेकिन टूटा नही है। मैं मातम नहीं मना सकता लेकिन आंसू रोक भी नहीं पा रहा हूं। आखिर बाप जो ठहरा।
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शहीद लांस नायक गुरमेल सिंह
मैं तो धन्य हो गया और यही इच्छा है कि मुझे हर जन्म में बेटा मिलो तो गुरमेल ही हो। थोड़ी देर आंखे बंद करने के बात तरसेम सिंह दोबारा कहते हैं कि ‘जब पंजाब के गबरू विदेश जा रहे थे, नशे के दलदल में फंस रहे थे तब मेरे बेटे ने फौज में जाने का फैसला किया, मुझे खुशी है कि मेरा बेटा श्री गुरू गोबिंद सिह के बलिदान से प्रेरित था। मैं शुकराना वाहे गुरू जी का करता हूं कि उन्होंने मेरे कुल में उसे पैदा किया, मैं उसका बाप बना’।
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शहीद लांस नायक गुरमेल सिंह
अब तो सेहरा और तस्वीर ही सहारा
तेरह साल पहले ही कुलजीत कौर की शादी गुरमेल सिंह से हुई थी। आठ साल की बिटिया है, जिसे गुरमेल सिंह बिट्टी कहकर बुलाते थे। कुलजीत कौर के पास पीली पगड़ी, पीले कोट में वो आखिरी तस्वीर है। बीते 10 दिसंबर को मोबाइल से खींची थी। कुलजीत ने शादी का सेहरा भी संभाल कर रखा है, कहती है यह मेरे जीने का आसरा है। अब उसके पास गुरमेल की यादें ही हैं, जिसे वो सहेज कर आखिरी सांस तक रखेगी।
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शहीद लांस नायक गुरमेल सिंह
बेटी बोली! अब कौन कहेगा बिट्टी
आठ साल की बिट्टी पूछती थी पापा भारत-पाकिस्तान आखिर क्यों लड़ते हैं। बिट्टी आज खामोश थी। मौत और शहादत से अंजान। उसे केवल यह पता था कि अब उसके पापा कभी उसे मिलनें नहीं आएंगे और न ही उसके लिए चाकलेट लाएंगे। बिट्टी परिवार को रोते देख रोने लगती है, उसे शहादत की खबर के बाद से ही एक कमरे में लिटा दिया गया है, हालांकि रोने की आवाज सुनकर वो रात भर रोती रही।
कुल जीत गया मेरा गुरमेल - कुलजीत
पति की शहादत की खबर कुलजीत कौर को शनिवार करीब रात आठ बजे मिली। खबर मिलते ही फैल गई। गांव के लोग शहीद के घर पर जमा हो गए। कुलजीत कौर कहती है कि पति की शहादत देश के लिए है, मेरा पति देश की रक्षा के लिए शहीद हुआ है। पाकिस्तान को करारा जवाब मिलना चाहिए। उसमें हिम्मत है तो सामने आकर जंग लड़े। धोखे से वार कायर करते हैं। गुरमेल सिंह ने अपने कुल को जीत लिया है। अपने वशंजों को अमर कर दिया है।