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ऐलानः कुलभूषण जाधव के पक्ष में पाकिस्तान की ये एसोसिएशन उठाएगी बड़ा कदम

Fri, 07 Jul 2017 09:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कुलभूषण जाधव - फोटो : Amar Ujala
भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव के पक्ष में पाकिस्तान की ही एक एसोसिएशन बड़ा कदम उठाने जा रही है। भारत में ही इसका ऐलान किया गया है।
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कुलभूषण जाधव - फोटो : SELF
जाधव का मामला पाकिस्तान की आर्मी अदालत में है। वहां पर वकीलों को केस पैरवी करने की इजाजत नहीं दी जाती, इसलिए लाहौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अपनी सरकार से बात कर कुलभूषण जाधव का पक्ष सुने जाने की मांग करेगी। यह बात पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचे पाकिस्तान के लाहौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्यों ने बुधवार को एक पत्रकारवार्ता में कही।
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कुलभूषण जाधव
लाहौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के एडवोकेट खालिद जमील, पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट राणा महमूद अहमद जोया (इमरान खान की तहरीक ए इंसाफ पार्टी से जुड़े हैं), एडवोकेट वसीम इकबाल बट, लाहौर हाईकोर्ट के एडवोकेट महमूद लशारी, एडवोकेट मुहम्मद तय्यब और एडवोकेट मोहम्मद लतीफ बुधवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचे थे।

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कुलभूषण जाधव को सजा-ए-मौत - फोटो : self
पाकिस्तानी वकीलों ने अमेरिका का नाम लेते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान कुछ साल पहले कश्मीर विवाद के हल के बिल्कुल करीब पहुंच गए थे, लेकिन अमेरिका और कई बड़ी ताकतें नहीं चाहती थीं कि इस विवाद का हल निकले। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनमोल रतन सिंह ने कहा कि दोनों देशों के बुद्धिजीवी दोनों ही मुल्कों में शांति को बनाए रखने के प्रयास लगातार करते रहे हैं।
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पूर्व नौसेना कमांडर कुलभूषण जाधव - फोटो : File Photo
अनमोल रतन ने कहा कि लाहौर बार एसोसिएशन के सदस्यों का भारत आना भी इसी कोशिश का हिस्सा है। इस वर्ष के अंत में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का एक प्रतिनिधिमंडल भी लाहौर जाएगा। लाहौर बार एसोसिएशन के सदस्यों का कहना था कि उन्हें भारत आकर ऐसा नहीं लग रहा है कि हम कोई अलग मुल्क में आए हैं। हमें यहां पर उतना ही प्यार और सम्मान मिला है।
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kulbhushan jadhav
सदस्यों ने कहा कि हमारी और बुद्धिजीवियों की कोशिश है कि दोनों देशों के रिश्तों में चली आ रही यह खटास कम की जाए। इससे ही दोनों देशों की तरक्की हो सकती है। लाहौर बार एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि अगर दोनों देशों के बीच चल रहा गतिरोध खत्म हो जाए तो जो पैसे दोनों देश सेना और हथियारों पर खर्च करते हैं, वह विकास पर खर्च किया जा सकता है।

 
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