उन्होंने बताया कि फैक्ट्री बंद है। घर में जो राशन पड़ा था, वो खत्म हो गया है। अब क्या करें। मजबूरी में पैदल घर जाना पड़ रहा है। इसलिए अपनी पत्नी ललीता और दो बच्चे गुरदायल सिंह और बेटी गुरलीन व छोटे भाई हरविंदर सिंह के साथ अपने गांव पैदल जा रहा हूं। कोरोना वायरस के चलते 14 अप्रैल तक सब कुछ बंद है। ऐसे में अपने घर पर रहेंगे तो कम से कम दो वक्त की रोटी तो मिलेगी। यहां दो-चार दिन और रुक जाते तो खाने के लाले पड़ जाते। खुद तो भूखे एक दो दिन रह भी लेते पर दो छोटे बच्चे हैं, उन्हें कौन खिलाता।
कंपनी में राशन खत्म, 659 किलोमीटर पैदल चलकर यूपी के सीतापुर के लिए निकले
कंपनी में राशन और जेब के पैसे खत्म होने के बाद यूपी के सीतापुर निवासी संत राम, सर्वेश, प्रदीप व संदीप पैदल ही अपने घर के लिए निकले पड़े हैं। डेराबस्सी और अंबाला के बीच मिले संत राम और उसके दोस्तों ने बताया कि वे आइसक्रीम कंपनी में काम करते हैं। एक माह पहले यहां काम के लिए आए थे, महज 10 दिनों ही काम कर पाए कि काम बंद हो गया। जेब में पैसे तो हैं नहीं, जो राशन खरीदकर लाए थे वो भी खत्म हो गया है। अब यहां से जाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। कंपनी के मालिक भी यहां नहीं हैं कि उनसे पैसे मांग लें। इसलिए मजबूरी में घर जाना पड़ रहा है।