पैरालंपिक की तैयारी के लिए साइकिल खरीदनी थी लेकिन पैसे नहीं थे। 8 साल से सरकार से गुहार लगा रहे थे।
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Paralympic cyclist Jagvinder Singh
सरकार आठ साल में जो नहीं कर सकी, शहर के एक आम आदमी ने उस काम को करने में एक मिनट का समय नहीं लगाया। देश के लिए मेडल लाने को एक अदद प्रोफेशनल साइकिल के लिए अफसरों और मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्री तक से गुहार लगाने वाले पैरालंपिक साइकिलिस्ट जगविंदर सिंह की बेबसी देख उनका दिल भर आया और जीवन भर की जमा पूंजी पीएफ के चार लाख रुपये तुरंत पंजाब के इस युवा खिलाड़ी के नाम कर दिए।
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Paralympic cyclist Jagvinder Singh
यह मिसाल पेश की हरियाणा के रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी कुलबीर सिंह चौहान ने। अमर उजाला ने छह फरवरी के अंक में ‘देश के लिए मेडल लाना है... एक साइकिल तो दे दो’ शीर्षक से इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसे पढ़कर कुलबीर सिंह चौहान ने इस युवा खिलाड़ी की मदद करने की ठान ली।
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Paralympic cyclist Jagvinder Singh
बुधवार को सेक्टर-9 स्थित अमर उजाला कार्यालय में रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी कुलबीर सिंह चौहान ने अपने हाथों से नेशनल मेडल विजेता साइकिलिस्ट जगविंदर सिंह को चार लाख रुपये का चेक सौंपा। साइकिलिस्ट जगविंदर सिंह ने रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी कुलबीर सिंह चौहान के साथ अमर उजाला का भी धन्यवाद करते हुए कहा कि यह मदद वह जीवन भर नहीं भूलेंगे और इससे पैरा ओलंपिक गेम्स में देश के लिए मेडल जीतने का सपना साकार करेंगे।
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Paralympic cyclist Jagvinder Singh
बता दें कि दोनों हाथ से दिव्यांग मगर देश के टाप 30 शख्सियत में शुमार साइकिलिस्ट जगविंदर सिंह पिछले आठ सालों से पंजाब सरकार से एक प्रोफेशनल साइकिल की गुहार लगा रहे थे लेकिन राज्य सरकार ने आश्वासन के अलावा उनकी किसी तरह से आर्थिक मदद नहीं की। जगविंदर पैरा ओलंपिक में मेडल लाकर देश का नाम रोशन करना चाहते हैं। यह खिलाड़ी वर्तमान समय में एशियन गेम्स में हिस्सा लेने के लिए अपनी सेकेंड हेड साइकिल से प्रैक्टिस कर रहे हैं।
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Paralympic cyclist Jagvinder Singh
अमर उजाला कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में जगविंदर की मां अमरजीत कौर, बहन राजविंदर कौर के साथ रिटायर्ड अधिकारी के रिश्तेदार राजकरण सिंह भी मौजूद रहे। पूरे दिन चेक लेकर तलाशते रहे जगविंदर को
पूर्व आईएफएस अधिकारी कुलबीर सिंह चौहान चेक लेकर तुरंत घर से निकल पड़े और मोहाली से खिलाड़ी जगविंदर को तलाशते हुए चंडीगढ़ आ पहुंचे। मोहाली निवासी कुलबीर सिंह ट्रैफिक पार्क सेक्टर-23 पहुंचे और खिलाड़ी के बारे में पूछा, क्योंकि जगविंदर ट्रैफिक अवेयरनेस कार्यक्रम का हिस्सा बनने यहीं पहुंचे थे।
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दिव्यांग साइकिलिस्ट जगविंद्र सिंह
यहां से पता नहीं चला तो वह जगह-जगह घूमते और जगविंदर को पूछते रहे। आखिर में उन्होंने अमर उजाला टीम से संपर्क किया और बिना नाम या खबर छापने की बात कहकर खिलाड़ी तक चेक पहुंचाने की गुहार लगाई। उनके जज्बे को देखते हुए अमर उजाला की टीम ने उनको सामने आने को कहा ताकि और लोग भी उनकी इस दरियादिली से प्रेरणा ले सकें। काफी प्रयास के बाद वह सामने आने को तैयार हुए।
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दिव्यांग साइकिलिस्ट जगविंद्र सिंह
मेरे कल से अच्छा, इस युवा खिलाड़ी का आज सुधरे : कुलबीर सिंह
मेरे कल से अच्छा है, इस युवा खिलाड़ी का आज सुधरे। अमर उजाला में जगविंदर की खबर पढ़कर मेरा दिल भर आया और मेरे दिमाग में यही विचार गूंजने लगा कि इस खिलाड़ी का आज सुधरना चाहिए। दो सेकेंड बीते थे कि मेरे मोबाइल पर पीएफ का पैसा अकाउंट में आने का मैसेज आ गया। मैं तुरंत उठा और चेकबुक लाकर चार लाख रुपये का चेक जगविंदर के नाम बना दिया।
मैं यह नहीं चाहता था कि देर हो जाए। पंजाब के इस युवा साइकिलिस्ट का सपना पूरा होना ही चाहिए ओलंपिक में देश के लिए मेडल लाने का सपना अकेले जगविंदर का नहीं हम सबका भी तो है। अमर उजाला कार्यालय में यह बातें कहते हुए रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी कुलबीर सिंह चौहान भावुक हो गए। उन्होंने ने कहा कि मैंने किसी की मदद नहीं की, बस एक भारतीय, दूसरे भारतीय के लिए खड़ा हुआ है।