छठ पूजा को दुनिया का सबसे कठिन व्रत कहा जाता है। ये सच है, इसके कई कारण है। इस खबर में हम आपको उन सभी कारणों के बारे में बताएंगे।
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Chhath Pooja 2017
छठ पूजा एक कठिन तपस्या की तरह है। यह व्रत किसी भी मायने में आसान नहीं होता। अगर करवाचौथ पर सुहागिनों को करीब 16 घंटे बिना पानी के रहना होता है तो छठ करने वाली महिलाएं लगातार 36 घंटे बिना पानी पिए रहती हैं उसमें भी सभी काम खुद ही करने पड़ते हैं।
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Chhath Pooja 2017
चार दिनों के इस व्रत में लगातार उपवास करना होता है। सिर्फ भोजन ही नहीं, सुख-आराम के सभी साधनों का भी त्याग करना होता है। पर्व के लिए बनाए गए कमरे में व्रती फर्श पर एक कंबल या चादर के सहारे रात बिताती है। जिस जगह पर व्रति चार दिन रहती हैं वहां प्याज-लहसुन आदी चीजें भी निषेध होती हैं।
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Chhath Pooja 2017
इस उत्सव में शामिल होने वाले लोग नए कपड़े पहनते हैं। पर व्रत करने वाले ऐसे कपड़े पहनते हैं, जिनमें किसी प्रकार की सिलाई नहीं की होती है। मान्यता है कि सिलाई के वक्त सूई में धागा डालते वक्त वो जूठे हो जाते हैं। चौंकिए मत, 36 घंटे के निर्जला व्रत में मिट्टी के चूल्हे में आम की लकड़ी को जला कर खाना पकाया जाता है। यहां बता दें कि वो आम की लकड़ी परिवार के ही किसी सदस्य द्वारा लाया गया होना चाहिए।
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छठ पूजा
- फोटो : amar ujala
डूबते सूरज को देखना भी अपशगुन माना जाता है लेकिन छठ पर्व में डूबते हुए सूरज की भी पूजा की जाती है। यह व्रत वैसे तो महिलाओं द्वारा किया जाता है लेकिन कुछ पुरुष भी यह व्रत रखते हैं। चौथा दिन महिलाओं के लिए कड़ी तपस्या का दिन होता है। 36 घंटों का निर्जला व्रत और फिर जमा देने वाले ठंडे पानी में सूर्य भगवान के निकलने का इंतजार। शायद इसीलिए छठ पूजा को दुनिया का सबसे कठिन व्रत कहा जाता है।
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छठ पूजा
- फोटो : amar ujala
महिलाएं साड़ी और पुरुष धोती पहनकर छठ व्रत करते हैं। शुरू करने के बाद छठ पर्व को सालोंसाल तब तक करना होता है, जब तक कि अगली पीढ़ी की किसी विवाहित महिला को इसके लिए तैयार न कर लिया जाए। घर में किसी की मृत्यु हो जाने पर यह पर्व नहीं मनाया जाता है।
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Chhath Pooja 2017
अब पढ़िए चार दिन क्या करती हैं महिलाएं...
पहला दिन, नहाय खाय
महापर्व छठ का पहला दिन नहाय खाय से शुरू होता है। इस दिन महिलाएं घाट पर जाकर स्नान करती हैं। विभिन्न वस्तुओं के नहाय खाय की विधि को पूर्ण किया जाता है। आसपास साफ-सफाई की जाती है। पवित्र नदी के जल से घर शुद्ध किया जाता है और व्रत से पूर्व लोग परिवार सहित शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण करते हैं।
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छठ पूजा
दूसरा दिन, खरना
छठ पूजा का दूसरा और महत्वपूर्ण दिन होता है खरना। पूरे दिन का उपवास कर व्रती इस दिन जल की एक बूंद भी ग्रहण नही करता। शाम के वक्त गुड़ की खीर बनाकर या गन्ने का जूस प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
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छठ पूजा
- फोटो : amar ujala
तीसरा दिन, सूर्य को शाम का अर्घ्य
इस दिन सूर्य को शाम को अर्घ्य दिया जाता है। यह सूर्य षष्ठी का दिन होता है और छठ पूजा का तीसरा। इसके पश्चात सभी एकत्रित होकर छठ माता के गीत गाते हैं और व्रत से संबंधित कथा सुनी जाती है। ये दिन लगभग रात्रि जागरण का होता है।
चौथा दिन, उगते सूर्य को अर्घ्य
चौथे दिन का इस व्रत में सर्वाधिक महत्व है। ये चार दिनों के तप पूजन के लिए वरदान मांगने का दिन होता है। इस दिन सूर्य के उगने से पहले ही नदी घाटों पर पहुंचना होता है। व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं और छठी माता से संतान व परिवार की रक्षा का वरदान मांगते हैं। इसके बाद पूजन में अर्पित किया गया प्रसाद बांटकर व्रती स्वयं भी अपना व्रत खोलते हैं।