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संघर्ष की 10 तस्वीरें, बैरिकेड्स, सड़कों पर खाई, आंसू गैस झेला, तब दिल्ली पहुंचा किसानों का रेला

Fri, 27 Nov 2020 07:35 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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- फोटो : अमर उजाला
कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब से उठे किसानों के आंदोलन ने अब दिल्ली के दरवाजे पर दस्तक दे दी है। ये किसान पिछले 50 दिन से पंजाब में अलग-अलग जगह धरना दे रहे थे। ज्यादातर धरना टोल प्लाजा, रेल ट्रैक और पेट्रोल पंपों के बाहर लगाए गए थे। केंद्र सरकार ने तीन बार पंजाब के 30 किसान संगठनों से बात की। हालांकि ये सभी बैठकें बेनतीजा रहीं। अब एक बार फिर केंद्र ने तीन दिसंबर को बातचीत का न्योता दिया है। लेकिन किसान उससे पहले ही दिल्ली कूच कर गए। पंजाब से दिल्ली पहुंचने तक किसानों का संघर्ष चुनौतियों से भरा रहा है। 
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मार्ग से अवरोध हटाते किसान। - फोटो : अमर उजाला
इन बॉर्डर से हरियाणा में घुसे किसान
25 नवंबर की रात से ही पंजाब के हजारों किसानों ने हरियाणा बॉर्डर पर डेरा डाल दिया था। उधर, किसानों को रोकने के लिए हरियाणा पुलिस भी मुस्तैद रही। अंत: भारी हंगामे के बीच किसान हरियाणा में दाखिल होने में कामयाब रहे। अब भी हरियाणा-पंजाब सीमा पर किसानों के काफिले लगातार पहुंच रहे हैं। 
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सड़क पर प्रशासन ने डाली मिट्टी पत्थर। - फोटो : अमर उजाला
शंभू बॉर्डर- अंबाला के पास शंभू बॉर्डर से पंजाब के किसान हरियाणा में दाखिल हुए। इससे पहले यहां भारी हंगामा हुआ। नाराज किसानों ने बैरिकेड नदी में फेंक दिया तो पुलिस ने भी पानी की बौछार और आंसू गैस के गोले दागे। लिहाजा किसान अपनी रणनीति में कामयाब हुए और सड़क और खेत के रास्ते हरियाणा में दाखिल हुए।

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दिल्ली कूच से पहले रास्ते से मिट्टी हटाते किसान। - फोटो : अमर उजाला
खनौरी बॉर्डर- खनौरी सीमा पर भी पंजाब के हजारों किसानों का काफिला पहुंचा। यहां प्रशासन ने रोड पर बड़े-बड़े पत्थर और कंटीले तार बिछा रखे थे। कुछ जगह सड़कों पर मिट्टी भी डाली गई थी। ताकि आंदोलनकारी किसान आगे न बढ़ पाएं। यहां भी किसान बड़ी संख्या में हरियाणा में दाखिल होने में कामयाब हो गए। वहीं अभी हजारों की तादाद में किसान सीमा पर धरने पर बैठे हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
टोहाना बॉर्डर- टोहाना बॉर्डर पर भी किसानों को रोकने का प्रयास हुआ लेकिन रास्ते के सारे अवरोध हटा किसान आगे बढ़ गए। डबवाली और सद्दोपुर बॉर्डर से भी किसान हरियाणा में घुसने में कामयाब हुए। वहीं भिवानी में किसान मुंढाल बॉर्डर से दाखिल हुए। 
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लंगर तैयार करते किसान। - फोटो : अमर उजाला
जब किसानों की राह में मिले 'रोड़े'
हरियाणा में दाखिल होना ही किसानों के लिए बड़ा संघर्ष था। लेकिन यह चुनौती आगे और भी बढ़ गई थी। अंबाला से सोनीपत तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर किसानों का सामना 31 पुलिस नाकों से हुआ। 
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लंगर तैयार करते किसान। - फोटो : अमर उजाला
  • पानीपत में चार नाके किसानों ने किए पार
  • करनाल में एक नाका किसानों ने तोड़ा
  • कुरुक्षेत्र में किसानों ने भेदे 20 चक्रव्यूह
  • सोनीपत में छह नाके किए पार

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- फोटो : अमर उजाला
प्रशासन ने रोका तो किसानों ने खुद बनाया रास्ता
जगह-जगह प्रशासन ने सड़कों पर मिट्टी के ढेर लगा दिए थे। सड़कों पर जबरदस्त बैरिकेडिंग थी। कई जगह खाई भी खोद दी गई थी। सोनीपत, जींद और सिरसा में बड़े-बड़े पत्थर रोड पर डाले गए थे। करनाल और पानीपत में सड़कों पर ट्रक खड़े कर दिए गए थे। किसानों ने प्रशासन की दिन में खोदी खाईं को सोनीपत में रात में पाटा फिर दिल्ली की ओर कूच किया। वहीं पानीपत और करनाल में किसानों ने ट्रैक्टर के शहरे ट्रकों को अपने रास्ते से हटाया। भारी हंगामे के बीच किसानों का यह संघर्ष आसान नहीं था। सिरसा में किसानों ने अपने रास्ते से पत्थर, मिट्टी को हटाया और आगे दिल्ली कूच कर गए। 

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महिलाएं भी दिल्ली कूच को निकलीं। - फोटो : अमर उजाला
महिलाएं भी साथ खड़ीं
किसानों के इस संघर्ष में महिलाएं भी साथ हैं। पंजाब में पिछले दिनों से चल रहे धरने पर भी महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर खडी थीं। अब दिल्ली कूच पर भी संग निकल पड़ीं हैं। डबवाली बॉर्डर पर महिलाएं धरने पर बैठी हैं। वह केंद्र सरकार से इन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रही हैं
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सोनीपत में लंगर चखते किसान। - फोटो : अमर उजाला
सड़क पर लंगर और लंबे संघर्ष की व्यवस्था
पंजाब से निकले किसान दिल्ली में लंबे संघर्ष के मूड में है। किसान अपने संग छह माह का राशन लेकर चले हैं। साथ में ठंड से बचने को गर्म कपड़े और तिरपाल की भी व्यवस्था कर रखी है। लकड़ी, दवाएं और पानी के टैंकरों की व्यवस्था है। रास्ते में ही किसान लंगर तैयार करते हैं और सड़क पर ही लंगर चखने के बाद आगे बढ़ते हैं। दिल्ली कूच पर किसानों को कदम दर कदम चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 
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