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किसान बोले- शांतिपूर्वक उठा रहे मांग, बल प्रयोग कर रही सरकार, सीने पर गोली खाने को हैं तैयार

Sat, 28 Nov 2020 10:45 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
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किसान। - फोटो : अमर उजाला
तीन नए कानून बनाने के खिलाफ किसान सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। पंजाब से प्रदर्शन करते हुए दिल्ली की तरफ जा रहे किसानों की जुबान पर एक ही बात थी कि जब वे शांतिपूर्वक अपनी मांगों को उठा रहे तो ऐसे में सरकार जबरन बल प्रयोग कर उन्हें उकसाने का प्रयास किसलिए कर रही है। वे मांगों को पूरा करवाने के लिए अपने सीने पर गोली तक खाने को तैयार हैं। वह अपनी जायज मांगों के लिए लड़ रहे हैं। ऐसे में सरकार उनके रास्ते में अपरोध लगा कर गलत कर रही है। अन्नदाता अपने हक की लड़ाई लड़ेगा और जीतकर ही लौटेगा।  
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बलविंद्र सिंह समाणा - फोटो : अमर उजाला
केंद्र सरकार ने किसानों की जायज मांगों को तत्काल प्रभाव से पूरा करना चाहिए। किसान देश की रीढ़ होता है। ऐसे में किसानों की मदद करने की बजाय सरकार उन्हें ही दबाने में लगी है। लोकतंत्र में सभी को अपनी आवाज उठाने का अधिकार है। ऐसे में किसानों पर बल प्रयोग करना छोड़कर सरकार को उनसे बातचीत कर मांगों को पूरा चाहिए।  - बलविंद्र सिंह समाणा, जमूरी किसान सभा, पटियाला पंजाब 

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सरदार नंबरदार सिंह - फोटो : अमर उजाला
किसान अपने हक की लड़ाई लड़ने को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर हुआ है। हम शांतिपूर्वक अपनी बात रखने जा रहे हैं। ऐसे में जगह-जगह हमारे ऊपर बल प्रयोग किया जा रहा है। यह किसानों के साथ नाइंसाफी और इसे किसान किसी सूरत में सहन नहीं करेगा। हर दो-तीन किलोमीटर पर बैरिकेड लगाकर सरकार किसानों के साथ आतंकियों जैसा व्यवहार कर रही है। किसान किसी से रुकने वाले नहीं हैं। जायज मांगों को मनवाने के लिए दिल्ली जरूर जाएंगे। - सरदार नंबरदार सिंह, बाजावा कलां, जालंधर, पंजाब 

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सुखविंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला
किसान देश का पेट पालने के लिए दिनरात मेहनत करता है। हर आदमी को अनाज उपलब्ध कराता है। उसके बावजूद सरकार उनके हितैषी कार्य करने की बजाय उनके खिलाफ ही कानून लेकर आई है। सरकार को चाहिए कि किसान विरोधी कानून तुरंत वापस लिए जाएं। जब किसान ही इन कानूनों को नहीं चाहता तो यह किसके हित में बनाए गए हैं। यह समझ से परे है। इन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। - सुखविंद्र सिंह, मोहाली पंजाब 
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सरदार बलकार सिंह - फोटो : अमर उजाला
किसानों को जगह-जगह बैरिकेड लगाकर रोका जा रहा है। किसान पीछे हटने वाले नहीं हैं। किसान अपनी मांग मनवाने के लिए गोली खाने को तैयार है। सरकार को चाहिए कि वे किसानों के हित में फैसले लें। किसान ही है, जो देश को आगे ले जाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। ऐसे में किसानों के शांतिपूर्वक आंदोलन को बलपूर्वक कुचलने का प्रयास करने की बजाय सरकार को उनकी मांगों को पूरा करना चाहिए। - सरदार बलकार सिंह, अमृतसर, पंजाब 
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महाबीर सिंह - फोटो : अमर उजाला
किसान देश को सदा खुशहाल बनाता है। केंद्र सरकार की नीतियां उसे ही भूखा मरने को मजबूर कर देंगी। सरकार को चाहिए कि वह किसानों के हित में कानून बनाए। किसान अपनी मांग मनवाने को बाहर निकल गया है। अब किसान गोली खाने से भी पीछे नहीं हटेगा। आंसू गैस व पानी छोड़कर किसान को नहीं रोका जा सकता। किसान तो दिनरात पानी में रहता है। उसे पानी से डराना छोड़कर सरकार को उनकी मांगों को मानना चाहिए।  - महाबीर सिंह, अमृतसर, पंजाब
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मेजर सिंह - फोटो : अमर उजाला
देश में किसान और सीमा पर जवान ने सदैव ही देश हित के लिए काम किया है। ऐसे में सरकार को उनके भले की सोचनी चाहिए। यह सरकार किसानों के हित में काम करने के बजाय पूंजीपतियों को बढ़ावा देने में लगी है। सरकार को चाहिए कि देश की प्रगति के लिए किसानों को आगे बढ़ाए, जिससे देश अपने आप आगे बढ़ेगा। सरकार को किसान विरोधी कानून तुरंत वापस लेने चाहिए।  - मेजर सिंह, अमृतसर, पंजाब 

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जसपाल सिंह बाजवा - फोटो : अमर उजाला
सरकार किसानों को दबा रही है। किसानों की फसल का उचित मूल्य देने की बजाय उन्हें बर्बाद कर देश को बर्बादी की तरफ ले जाने का काम कर रही है। सरकार को चाहिए कि किसान हित में काम करें, जिससे देश उन्नति कर सके। किसान बिना किसी हिंसा के आगे चल रहे हैं और सरकार उन्हें रोकने के लिए हर हथकंडा अपना रही है, जिसे किसान सहन नहीं करेगा।  - जसपाल सिंह बाजवा, गुरुदासपुर, पंजाब 
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रणजीत सिंह - फोटो : अमर उजाला
केंद्र सरकार को चाहिए कि वह किसानों की भलाई वाले कानून लेकर आए। इसके विपरीत सरकार उन्हें ही दबाने का प्रयास कर रही है। तीन नए कानून किसानों के हक में होते तो वे सड़क पर उतरने को मजबूर नहीं होते। सरकार उन्हें जमीन से ही वंचित करने का प्रयास कर रही है। पंजाब के किसान इसके खिलाफ उठ खड़े हुए हैं। हरियाणा के किसानों का हरसंभव सहयोग मिल रहा है। वे मांग मनवाकर ही वापस जाएंगे।  - रणजीत सिंह, भाकियू क्रांतिकारी, पटियाला पंजाब
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