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सरकार की सख्ती से पलटा दांव, दिल्ली सीमा पर पहुंचे 10 हजार किसान, घर वापसी थमी, देखें- तस्वीरें

Fri, 29 Jan 2021 09:48 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
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दिल्ली सीमा पर फिर पहुंचने लगे किसान। - फोटो : अमर उजाला
गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में बवाल व लाल किला पर धार्मिक झंडा फहराने से निराश किसान जहां घर लौट रहे थे। वहीं अब सरकार की सख्ती व किसान नेताओं की भावनात्मक अपील से दांव दोबारा पलट गया है। जहां किसानों की घर वापसी पूरी तरह से थम गई है, वहीं दिल्ली की सीमाओं पर किसान दोबारा पहुंचने लगे हैं। हरियाणा के कई जिलों से शुक्रवार को किसान गाजीपुर, कुंडली व टीकरी बॉर्डर पर पहुंचे, जिनमें सबसे ज्यादा किसान गाजीपुर व कुंडली पहुंचे हैं। 
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दिल्ली सीमा पर किसानों की हो रही वापसी। - फोटो : अमर उजाला
वहीं पंजाब के किसान भी बॉर्डर पर दोबारा आने शुरू हो गए है और इस तरह केवल कुंडली बॉर्डर में एक ही दिन में करीब 10 हजार किसान बढ़ गए है। वहीं किसान नेता लगातार यह संदेश देने में लगे है कि गणतंत्र दिवस पर हुए बवाल की जिम्मेदार सरकार है और उसने पूरा षड्यंत्र रचा था। इसके साथ ही युवाओं से शांति बनाए रखने की अपील भी किसान नेता कर रहे हैं। 
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ट्रैक्टरों में पहुंचे रहे किसान। - फोटो : अमर उजाला
कृषि कानूनों के विरोध में गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकालने के दौरान बवाल व लालकिला पर धार्मिक झंडा फहराए जाने के बाद जिस तरह से किसानों की लगातार घर वापसी हो रही थी, उसको रोकने के लिए किसान नेता हाथ तक जोड़ रहे थे लेकिन बावजूद इसके किसान नहीं रुक रहे थे। आंदोलन का समर्थन करने वाली खाप के सुर भी विरोधी होने लगे थे। यह देख सरकार ने सख्ती बरतनी शुरू की।

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किसान आंदोलन। - फोटो : अमर उजाला
उधर, किसान नेताओं की भावनात्मक अपील और गाजीपुर बॉर्डर राकेश टिकैत के आंसुओं ने एक बार फिर से दांव पलट दिया है। इसका पूरा असर गुरुवार रात से दिखना शुरू हो गया और हरियाणा के सोनीपत, जींद, चरखी दादरी, रोहतक, पानीपत, करनाल, यमुनानगर, सिरसा समेत अन्य जगहों के किसान गाजीपुर व कुंडली बॉर्डर पर दोबारा पहुंचने शुरू हो गए। जहां पहले किसान गाजीपुर गए, वहीं शुक्रवार को कुंडली बॉर्डर पर किसान आने लगे हैं।
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कुंडली बॉर्डर पर बैठे किसान। - फोटो : अमर उजाला
जहां कुंडली बॉर्डर पर गुरुवार तक करीब 20 हजार किसान रह गए थे, वहीं शुक्रवार को वहां करीब दस हजार किसान बढ़ गए। जिससे धरनास्थल पर दोबारा से चहल-पहल शुरू हो गई है। इस तरह गणतंत्र दिवस के बाद किसानों के घर लौटने से किसान नेताओं के चेहरे पर दिख रही मायूसी भी ट्रैक्टर-ट्रालियां वापस आने से लौट आई है। किसान साफ कह रहे है कि वह कृषि रद्द होने के बाद ही वापस जाएंगे। 
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कुंडली बॉर्डर पर बैठीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
किसानों का केवल एक ही मकसद है कि कृषि कानूनों को रद्द कराया जाए। किसान ही सबसे बड़ा देशभक्त है और किसानों को देशद्रोही बताया जा रहा है। इस तरह की बात किसान सहन नहीं करेंगे और अब लगातार गांवों से किसान धरनास्थल पर पहुंचने शुरू हो गए हैं। सरकार पर दबाव बनाकर कानून रद्द कराए जाएंगे।  सुरेश, किसान, सोनीपत, हरियाणा।
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आंदोलन में पहुंचने लगे किसान। - फोटो : अमर उजाला
यहां से कुछ किसान वापस चले गए थे लेकिन अब दोबारा से वापस आने लगे है। किसानों को पता चल गया है कि दिल्ली के बवाल की सरकार ने साजिश रची थी। अब सबकुछ भुलाकर हजारों किसान पंजाब से वापस आने शुरू हो गए हैं। कृषि कानून रद्द कराने के बाद ही किसान यहां से वापस जाएंगे।  गुरजोत सिंह, किसान, खन्ना, पंजाब।
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पहले कुछ ऐसे खाली होने लगा था धरनास्थल। - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा से लगातार ट्रैक्टर-ट्राली में किसान आने शुरू हो गए हैं। पंजाब के किसान भी दोबारा आने लगे हैं लेकिन हरियाणा के किसान सबसे ज्यादा आ रहे हैं। जिस तरह का षड्यंत्र आंदोलन को खत्म करने का रचा गया था, वह अब नाकाम हो गया है। किसान ही सबसे बड़ा राष्ट्रवादी हैं और तिरंगे का सम्मान ही किसान व उसके बेटे करते हैं। यह हर किसी को पता चल गया है और किसान लगातार बॉर्डर पर वापस आने शुरू हो गए हैं। बलबीर सिंह राजेवाल, सदस्य, संयुक्त किसान मोर्चा।
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