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दिल्ली बॉर्डर पर किसानों ने बसा दिया शहरः बाजार, अस्पताल, स्कूल, जिम सब कुछ, हर जरूरत का मिल रहा सामान

Fri, 15 Jan 2021 02:14 AM IST
ajay kumar अंकित चौहान, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
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किसान आंदोलन। - फोटो : अमर उजाला
कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर कुंडली बॉर्डर पर डेरा डालने से यहां किसानों का नया शहर बस गया है। अब यहां किसानों को जरूरत के सामान के लिए परेशान नहीं होना पड़ रहा। किसानों के इस शहर में हर सुविधा उपलब्ध है। पूरा बाजार खुल गया है। हॉस्पिटल, क्लीनिक, मेडिकल स्टोर, जिम, कपड़ों की सिलाई, जूते ठीक करने समेत अन्य सभी सुविधाएं मिल रही हैं। 
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धरनास्थल पर सिलाई करता युवा किसान। - फोटो : अमर उजाला
किसानों को जरूरत के सामान के लिए धरनास्थल से बाहर नहीं जाना पड़ रहा और खर्च भी नहीं करना पड़ रहा। किसान नेताओं का मानना है कि जिस तरह से आंदोलन लंबा हो रहा है और ऐसे में किसानों को जरूरत के सामान के लिए परेशान होना पड़ा तो वह मानसिक रूप से कमजोर हो सकते हैं। किसानों को हर सुविधा मिल रही है, इसलिए भी वह मजबूती के साथ डटे हुए हैं। 
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धरनास्थल पर डेंटल क्लीनिक में उपचार करते डॉक्टर। - फोटो : अमर उजाला
कृषि कानून रद्द करने की मांग को लेकर किसानों ने 27 नवंबर को नेशनल हाईवे 44 के कुंडली बॉर्डर पर डेरा डाला था। उस समय उम्मीद जताई जा रही थी कि सरकार से किसानों की बातचीत में जल्द ही कोई निर्णय होगा और आंदोलन खत्म हो सकता है। सरकार व किसानों के बीच बातचीत में किसी तरह का हल निकलने की जगह गतिरोध बढ़ता जा रहा है और किसान कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं। 

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धरनास्थल पर जिम में व्यायाम करते युवा। - फोटो : अमर उजाला
आंदोलन के कारण कुंडली का बाजार उसी समय से बंद है जिससे किसानों को जरूरी सामान के लिए काफी दूर जाना पड़ता था। आंदोलन भी लंबा हो रहा है और किसानों को सामान के लिए भी जूझना पड़ रहा था। इससे किसानों का मनोबल कमजोर हो सकता था। जिसको देखते हुए कुंडली धरनास्थल पर धीरे-धीरे सुविधाएं बढ़ानी शुरू की गईं और इस समय वहां एक शहर में मिलने वाली हर जरूरी सुविधा उपलब्ध है। 
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स्कूल में बच्चों को पढ़ाते किसान। - फोटो : अमर उजाला
धरनास्थल पर आठ बेड का अस्पताल भी चल रहा है। वहां डेंटल क्लीनिक भी खोल दिया गया है। किसानों के नए शहर में मेडिकल स्टोर भी खुल गया है तो वहां पास ही पेट्रोल पंप पर किसानों ने जिम भी खोल दिया है। जिम में प्रतिदिन सुबह किसान व्यायाम करते हैं। जूते ठीक करने और पॉलिश की व्यवस्था है। कपड़े सिलाई व प्रेस की सुविधा भी धरनास्थल पर है। इतना ही नहीं यहां एक मॉल भी खोला गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि किसी भी चीज के लिए पैसे खर्च नहीं करने पड़ते है। 
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धरनास्थल पर खोला गया मेडिकल स्टोर। - फोटो : अमर उजाला
जीटी रोड पर कुंडली बॉर्डर से सोनीपत की ओर किसानों का करीब सात किमी लंबा पड़ाव है। इस सात किमी में बच्चों की पढ़ाई के लिए करीब 10 स्कूल शुरू कर दिए गए हैं। वहां टेंट में कई जगह बच्चों को एकत्र कर पढ़ाया जाता है। वहां पढ़ाने भी कोई बाहर से नहीं आता है, बल्कि किसान खुद ही बच्चों की पढ़ाई कराते है। उनमें युवा किसान भी शामिल है तो बुजुर्ग किसान भी बच्चों की पढ़ाई कराने में पीछे नहीं है। 
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धरनास्थल पर बैठे किसान। - फोटो : अमर उजाला
किसानों के लिए हर सुविधा उपलब्ध है, जिससे उनको जरूरत के सामान के लिए परेशान न होना पड़े। यह कोई किसी के कहने से नहीं कर रहे है, बल्कि यह व्यवस्था किसान ही कर रहे है और यह एक सेवाभाव है। इसके अलावा कुछ संस्थाएं भी धरनास्थल पर सेवा कर रही है। किसानों के लिए लंगर भी सामाजिक लोग व खुद किसान ही लगा रहे हैं। किसानों को परेशानी से दूर रखा जाएगा तो उनका मनोबल मजबूत रहेगा और वह सरकार के खिलाफ लड़ सकेंगे। हरेंद्र सिंह लखोवाल, सदस्य, संयुक्त किसान मोर्चा।
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