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रोहिंग्या मुसलमानों के लिए 'मसीहा' बने सिख, जानिए कौन हैं खालसा ऐड?

Sat, 16 Sep 2017 09:06 AM IST
amarujala.com- Presented by: रिशु राज सिंह
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Khalsa aid starts langar sewa for Rohingya refugees
सिख हमेशा मानवता के कामों के लिए जाने जाते हैं। देखिए जिन रोहिंग्या मुसलमानों का कोई सहारा नहीं बना उनको कौन खाना-पानी दे रहा है?
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Khalsa aid starts langar sewa for Rohingya refugees
म्यांमार में हिंसा के बाद भागे रोहिंग्या मुसलमान बंगलादेश-म्यांमार सरहद पर रुके हुए है, जिनकी मदद के लिए अब खालसा ऐड के समर्थक सरहद पर पहुंचे हैं।
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Khalsa aid starts langar sewa for Rohingya refugees
बता दें कि अब तक 3 लाख से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान समुद्री रास्तों से बांग्लादेश में प्रवेश कर चुके हैं। इस बीच रोते-बिलखते रोहिंग्या मुसलमानों के लिए सिख समुदाय के लोग मसीहा बनकर उनकी सेवा में लग गए हैं। 

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Khalsa aid starts langar sewa for Rohingya refugees
रोहिंग्या मुसलमानों की दुर्दशा देख सिखों के 'खालसा ऐड' एनजीओ बांग्लादेश पहुंच कर उनकी सेवा कर रहा है। खालसा ऐड एक अंतरराष्ट्रीय एनजीओ है, जिसका मकसद है दुनिया भर के संकटग्रस्त देशों में जाकर पीड़ित लोगों की हर संभव मदद करना।
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खालसा ऐड के मैनेजिंग डायरैक्टर अमरप्रीत सिंह ने कहा कि बांग्लादेश सरकार ने शरणार्थियों को खाना बांटने के लिए सभी तरह की अनमुति दे दी है। 
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अमरप्रीत सिंह ने कहा कि हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है कि हम लोगों को खाना और पानी मुहैया कराए। सिंह के अनुसार, रिफ्यूजी इलाकों में लंगर लगाया जा रहा है, जहां हर रोज करीब 30 से 50 हजार लोगों को खाना खिलाया जा रहा है। 
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अमरप्रीत सिंह ने कहा कि हमारी दूसरी प्राथमिकता है कि एक बार स्थानीय सरकार (बांग्लादेश) रोहिंग्या मुसलमानों के लिए उचित जमीन उपलब्ध करवा दें तो वे पीड़ित लोगों के लिए सुरक्षित और स्थायी शरणार्थी घरों का निर्माण करेंगे। 

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अमरप्रीत सिंह ने कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों को एक ऐसे देश में पनाह लेनी पड़ रही है जो खुद हताश और निराश है। उन्होंने कहा, 'मैंने कभी नहीं देखा कि पानी पीने से ही इन लोगों को इतनी राहत मिल रही है। इन लोगों के पास बिल्कुल भी पैसा नहीं है, जिससे वे रिफ्यूजी कैंप तक पहुंच सके। 

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यहां के लोकल रिक्शा भी इन लोगों से डबल किराया ले रहे हैं इसलिए अब हम इन लोगों के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था में भी लगे हैं, ताकि ये लोग सुरक्षित जगहों पर पहुंच सके'। 
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अमरप्रीत सिंह ने कहा, 'हमारी टीम 9 सितंबर को ही बांग्लादेश पहुंच गई थी। हम इन लोगों के लिए स्वच्छ पानी और खाने की व्यवस्था में लगे हैं।
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