बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रूपम सिंह की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने वीरवार को मुख्य आरोपी हिमाचल के दून क्षेत्र के विधायक रामकुमार चौधरी सहित सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया। हत्या के आरोप में चौधरी करीब 18 महीने जेल में रहे।
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देखिए, ज्योति मर्डर केस में कैसे बरी हुए विधायक?
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हाईप्रोफाइल ज्योति मर्डर केस में सभी आरोपियों के बरी होने से पंचकूला पुलिस की खासी किरकिरी हुई है। पुलिस यह साबित नहीं कर पायी मोबाइल किसके पास था और मोबाइल किस टावर की रेंज में था।
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राजनीतिक दांवपेच और दबाव की बीच झूलते इस केस में पंचकूला पुलिस ने भारीभरकम चार्जशीट बनाई थी। सौ से अधिक गवाहियां हुई, ज्यादातर गवाह मुकरते गए। ज्योति के पिता भी पहली गवाही में मुकर गए।
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बचाव पक्ष ने अदालत को बताया था कि दून के विधायक रामकुमार चौधरी का मोबाइल उनका ड्राइवर उपयोग करता था। इस मोबाइल नंबर की लोकेशन ज्योति के हत्या वाले दिन घटनास्थल पर पाई गई थी।
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बचाव पक्ष के वकील के अनुसार पुलिस अदालत में साबित नहीं कर सकी कि जिस दिन ज्योति की हत्या की गई थी, उस दिन रामकुमार चौधरी ही ज्योति के साथ थे। पूरा केस मोबाइल लोकेशन पर आधारित था। पुलिस यह भी साबित नहीं कर पाई कि यह मोबाइल किसी भी आरोपी के हाथ में था और ज्योति से बात करने वाला इनमें से कोई आरोपी था।
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21 नवंबर 2012 को 24 वर्षीय ज्योति का शव पंचकूला के सेक्टर-21 में मिला था। शव को भारी वाहन से कुचला गया था। पुलिस ने मामले में दून के विधायक रामकुमार चौधरी को गिरफ्तार किया था।
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कोर्ट के फैसले से पीड़ित पक्ष ज्योति के पिता ने कहा कि इस फैसले के खिलाफ मैं हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाऊंगा और अगर जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी जाऊंगा।