मूल रूप से हरियाणा के पानीपत जिले के निवासी नीरज चंडीगढ़ में डीएवी कॉलेज के छात्र रहे हैं। नीरज पानीपत के खंडरा गांव के किसान सतीश कुमार के बेटे हैं। कबड्डी खिलाड़ी बनने के लिए उन्होंने बकायदा गांव में प्रेक्टिस भी शुरू कर दी थी।
नीरज ने कबड्डी की प्रैक्टिस के साथ-साथ घर के पास ही एक जिम भी ज्वाइन कर दिया, लेकिन यह जल्द ही बंद हो गया। इसके बाद घरवालों ने नीरज को करीब 15 किलोमीटर दूर पानीपत के शिवाजी स्टेडियम भेजना शुरू किया। नीरज का दोस्त जैवलिन खिलाड़ी बिंझौल का जयवीर भी यहां प्रैक्टिस करने आता था।
जयवीर ने एक दिन नीरज से कहा कि तेरी हाइट अच्छी है, क्यों न तू भी मेरे साथ जैवलिन की प्रैक्टिस शुरू करे? नीरज के करिअर में यही टर्निंग प्वाइंट था। जयवीर ने ही उन्हें खेल की बारिकियां सिखाईं। 2011 में नीरज पहली बार प्रतिस्पर्धा में उतरे तब से मुड़कर नहीं देखा।
5 साल बाद पोलैंड में आयोजित अंडर-20 वर्ल्ड चैंपियनशिप में नीरज जूनियर वर्ग में वर्ल्ड चैंपियन बन गए हैं। उन्होंने 86.48 मी जैवलिन थ्रो कर रिकॉर्ड बनाया। नीरज किसी भी वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं। यह सीनियर वर्ग का नेशनल रिकॉर्ड भी है।
19 साल के नीरज ने लात्विया के जिगिसमंड सिरमायस (84.69 मी) का रिकॉर्ड तोड़ा। यही नहीं, नीरज ने लंदन ओलिपिंक में गोल्ड विजेता से भी बेहतर प्रदर्शन किया। वालकाट 84.58 मीटर ही भाला फेंक पाए थे। नीरज ने इस साल साउथ एशियन गेम्स में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (82.33 मी) किया था।
13 साल की उम्र में नीरज का वजन 80 किलो से ज्यादा था और 30 मीटर के रनवे पर तेज स्पीड से भागकर भाला फेंकने में सबसे बड़ी बाधा थी। वजन घटाने के लिए नीरज गांव से स्टेडियम तक दौड़ते आते, प्रैक्टिस करते और वापस घर तक दौड़ते जाते। उन्होंने दो माह में तकरीबन 20 किलो वजन घटा लिया।
चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज में के छात्र नीरज आजकल वहीं ट्रेनिंग ले रहे हैं। नीरज के पिता चार भाई हैं और 16 लोगों की ज्वाइंट फैमिली है। नीरज की फैमिली पूरी तरह से खेती पर ही डिपेंड है। चार भाइयों और 5 बहनों में सबसे बड़े नीरज ने ज्वाइंट फैमिली की जिम्मेदारियों के बीच यह मुकाम हासिल किया है।
चंडीगढ़ की एथलेटिक्स एसोसिएशन के सचिव रविंदर चौधरी ने उम्मीद जताई है कि नीरज इसी तरह मेहनत करता रहे ताकि 2020 टोकियो ओलंपिक के लिए तैयार हो। उन्हें इस बात का मलाल है कि स्पोर्ट्स मैन को कम नौकरियां मिल रही है, जिसकी वजह से कई खिलाड़ी अपने मूल राज्यों की ओर से खेल रहे है।
वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के बाद नीरज ने कहा कि मुझे 86 मीटर से ज्यादा थ्रो करने की उम्मीद नहीं थी। मैं पिछले कुछ महीनों से अपनी फिटनेस और तकनीक पर मेहनत कर रहा था। यह उसी का परिणाम है। नीरज पहले ऐसे भारतीय एथलीट बन गए है, जिसने स्वर्ण पदक जीत कर वर्ल्ड रिकार्ड कायम किया है।