जलियांवाला बाग में देश भक्तों पर दागी गई गोलियों के निशान देख करीब हर भारतीय एक बार जरूर तमतमा उठता है। इसका नतीजा देखिए
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Jallianwala Bagh, Amritsar
अंग्रेजी शासन के दौरान 13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग कांड को 98 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन तब देश भक्तों पर दागी गई गोलियों के निशान बाग की दीवारों में आज भी मौजूद हैं। इन निशानों को देख करीब हर भारतीय एक बार जरूर तमतमा उठता है। यही वजह है कि जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल 1919 की घटना पर आधारित फोटो गैलरी में लगी जनरल डायर की तस्वीर यहां आने वाले पर्यटक अक्सर फाड़ देते हैं।
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Jallianwala Bagh, Amritsar
बार-बार ऐसा होने के बाद अब इस तस्वीर पर सफेद स्याही पोत दी गई है। जाहिर है पर्यटकों का यह रुख साबित करता है कि आज भी जनरल डायर के चेहरे तक से देशवासियों को सख्त नफरत है।
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Jallianwala Bagh, Amritsar
जलियांवाला बाग मेमोरियल ट्रस्ट के सचिव एसके मुखर्जी कहते हैं कि बाग की फोटो गैलरी में नरसंहार की बड़ी पेटिंग लगाई गई थी, जिसमें जनरल डायर गोलियां चलाने का इशारा करता नजर आता है, लेकिन कई बार पेटिंग से जनरल डायर का चेहरा फाड़े जाने के बाद अब पेंटिंग के इस हिस्से पर सफेद स्याही पोत दी गई है। ठीक 98 वर्ष पहले जिस रास्ते से जलियांवाला बाग में जनरल डायर घुसा था, उस रास्ते पर पंजाब पुलिस की ओर से लगाई गई मेटल डिटेक्टर मशीन इन दिनों खराब है। साफ है कि यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।
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...हम कायर डायर कहते हैं
बुधवार को यहां जलियांवाला बाग कांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए यहां टेंट लग रहे थे और शहीदी स्मारक को चमकाया जा रहा था। वहीं दूसरी तरफ देश के तमाम हिस्सों से यहां आए पर्यटकों में अधिकांश यही कह रहे थे कि हम जलियांवाला बाग घूमने आए हैं। पुणे से आए राकेश वधवानी ने कहा कि डायर को हम कायर डायर कहते हैं।
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लाइट एंड साउंड शो बंद, नहीं गूंजती अमिताभ की आवाज
फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन (बिग बी) की दमदार आवाज जलियांवाला बाग में पिछले दो वर्ष से सुनाई नहीं दे रही है। यह आवाज तब गूंजती थी जब बाग में शहीद हुए लोगों की याद में साल 2014 में लाइट एंड साउंड शो शुरू हुआ था। जिले के सांसद गुरजीत सिंह औंजला कहते हैं कि जलियांवाला बाग में लाइट एंड साउंड शो दोबारा शुरू करवाने के लिए वे संसद में आवाज उठाएंगे।
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जलियांवाला बाग मेमोरियल ट्रस्ट के सेक्रेटरी एसके मुखर्जी कहते हैं कि उन्होंने सरकार को अब तक कई बार पत्र लिख चुके हैं। लाइट एंड साउंड सिस्टम को ठीक करवाने की जिम्मेदारी केंद्रीय पर्यटन विभाग की है।
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हर साल खर्च होते हैं औसतन 40 लाख
जलियांवाला बाग के रखरखाव पर हरेक वर्ष औसतन 40 लाख रुपये खर्च होते हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट पीसी शर्मा ने आरटीआई के तहत बाग के लिए होने वाले खर्च का ब्यौरा मांगा था।
उन्हें प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार साल 2009-10 में 3893563, 2010-11 में 4777580, 2011-12 में 3926005, 2012-13 में 4790676, 2013-14 में 4565609, 2014-15 में 5673263 और साल 2015-16 में 4782857 रुपये खर्च किए गए। हैरानी की बात है कि कागजों में इतना खर्च के बाद भी बाग की व्यवस्था में सुधार को लेकर कसर बाकी ही नजर आती है।