महाराजा भूपिंदर सिंह पटियाला रियासत के ऐसे महाराजा रहे हैं, जिनकी 350 से ज्यादा महारानियां थीं, लेकिन उनका कम्यूनिकेशन सिस्टम ऐसा था, जिससे कि हर किसी से इंसाफ हो सके। देखिए, एक महाराजा इतनी महारानियों को एक साथ मैनेज कैसे करते थे?
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एक महाराजा, जिसकी 350 महारानियां, उतनी रंगीन कहानियां
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350 महारानियों के नाम और उसकी सेहत के बारे में रिपार्ट लिखना डॉक्टरों के लिए मुमकिन न था, इसलिए महारानियों के नाम ए, बी, सी, डी, ई, एफ़, जी, एच वग़ैरह और रानियों के नाम गिनतियों के क्रम से 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, वग़ैरह 150 तक की गिनती तक लिखे रहते थे। इनके अलावा रनिवास में दूसरे वर्ग की भी कुछ महिलाएं महाराजा की परिचारिकाएं थीं जिनके नाम चार्ट में ए1, ए2, बी1, बी2, सी1, सी2 के क्रम से दर्ज थे।
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इस तरह सभी महिलाओं की एक सिलसिलेवार फ़ेहरिस्त महाराजा के पास और एक डॉक्टरों के पास रहती थी। यह फ़ेहरिस्तें गोपनीय कागज़ात समझी जाती थीं और डॉक्टरों को हिदायत थी कि किसी पर जाहर न होने पाए। इस बारे में महाराजा ने सख्त ताकीद की रखी थी कि उनके और उनके निजी डॉक्टर के इलावा किसी बाहर वाले को इन फ़ेहरिस्तों की जानकारी न होने पाए। अतः महाराजा के अलावा किसी ओर को महारानियों के नाम तक नहीं पता थे।
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दीवान जरमनी दास ने अपनी किताब 'महाराजा' में उपरोक्त बातों का बहुत बारीकी से जिक्र किया है। वे कहते हैं कि महल में जब कभी कॉन्फ्रेंस होती तो मैं ज्यादातर शामिल होता था। फ़ैहरिस्तें देखकर महाराजा को पता चल जाता था कि कौन महारानी या रानी बीमार है, उसे क्या बीमारी है और उसका क्या इलाज चल रहा है। ये फ़ैहरिस्तें महाराजा के प्राइवेट कमरे में ताले में बंद रहती थीं जिनको कोई देख न सकता था।
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जैसे ही महाराजा को पता लगता कि फलां महारानी बीमार है, वे उसे देखने जाते। महाराजा का हुक्म था कि जो महिलाएं बीमार हों, अपने सिर के बाल धोएं, सुखाएं और आते-आते उनको खुला रखें। रनिवास में कितनी ही महिलाएं इसी ढंग से घूमती रहती थीं जो इस बात का इशारा होता था कि रात को महाराजा उनसे मुलाकात न करें। जो महिलाएं तन्दुरुस्त होती वे महाराजा के पलंग के इर्द-गिर्द उनकी ख़िदमत में हाजिर रहें।
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महाराजा का पलंग तीन फ़ीट ऊंचा और बहुत बड़ा गुदगुदे सोफे की तरह बना था जिस पर रेशमी गद्दे और सुन्दर कढ़ी हुई चादरें बिछी रहती थीं। फर्श पर बेशकीमती कालीन बिछे थे जो कश्मीर और ईरान से मंगाए गए थे। रनिवास की उन महिलाओं को, जो रात को प्राइवेट कमरे में महाराज के साथ हाज़िर होती थीं, महाराजा के साथ खाना खाने की इजाज़त थी। जो बीमार होतीं वे या तो अपने कमरे में या महल के डाइनिंग हॉल में खाना खाती थीं।
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उन सब को बहुत बढ़िया भोजन और पीने को ऊंचे दर्जे की शराब मिलती थी। अपने महाराजा के करीब रहकर उनको बड़ी खुशी हासिल होती थी। उन महिलाओं की फ़ेहरिस्त में, जो महाराजा की इच्छा होने पर उनके पलंग पर साथ सो सकती थीं, सिर्फ़ उन्हीं के नाम रहते थे जिनकी जांच हिन्दुस्तानी लेडी-डॉक्टर और फ्रेन्च डॉक्टर पहले ही कर लेते थे और उनको पूरे तौर पर तन्दुरुस्त क़रार दे देते थे।