लंबा चलना है तो जीभ की तरह नरम बनना सीखें
पॉजिटिव लाइफ
नववर्ष पर आपसे दो ही बातें कहनी हैं। पहली बात को समझने के लिए एक छोटी सी कहानी या लतीफे का जिक्र करना चाहूंगा। जंगल के राजा शेर से उनकी प्रजा बहुत त्रस्त हो गई, क्योंकि वह जब चाहता निरीह भेड़ बकरी को अपना शिकार बना लेता था। जंगल में चुनाव हुए तो प्रजा ने शेर के खिलाफ एकजुट होकर बंदर को राजा बना दिया। हार से बौखलाए शेर ने और भी अधिक जुल्म शुरू कर दिए। प्रजा इकट्ठी होकर नए राजा बंदर के पास पहुंची और उन्हें सारा किस्सा सुनाकर मदद की गुहार लगाई। बंदर कुछ देर तो विचार मुद्रा में बैठा रहा और फिर एक पेड़ से दूसरे पर, तीसरे पर छलांग लगानी शुरू कर दी। प्रजा कुछ देर तो देखती रही। फिर बोली कि महाराज हमारी जान पर बनी है और आप इधर से उधर छलांग लगा रहे हैं।
बंदर ने मासूमियत से जवाब दिया कि भाई जो मेरे बस में है कर रहा हूं। आप इसे लतीफे के रूप में ले सकते हैं, लेकिन इसमें एक बहुत बड़ा सार भी छिपा है। अकसर हम ऐसा सोच लेते हैं कि हमारे करने से कुछ होगा तो नहीं, फिर कोशिश करके भी क्या फायदा। यह नजरिया बढ़ता ही जा रहा है, लेकिन इसके बजाय यदि हम अपने परिवेश, परिवार, मित्रों, समाज, राष्ट्र और मानवता की भलाई के लिए जो कुछ भी हमारे बस में है, उतना करते चलें तो हमें सफलता न भी मिले तो कम से कम तसल्ली अवश्य रहेगी कि जो हमारे बस में था हमने किया।
दूसरी बात भी एक बोध कथा से जुड़ी है जो बरसों पहले पढ़ी थी। उसमें यह था कि हमारे शरीर के तमाम अंगों की ताकत उम्र बढ़ने के साथ कम होती जाती है। जैसे हमारी नजर कमजोर हो जाती है, दांत भी गिर जाते हैं आदि। लेकिन हमारी जिह्वा (जीभ) पर कोई असर नहीं आता। वह जैसी थी, वैसी बनी रहती है। इस कथा में संदेश छिपा था कि जो चीज जितनी नरम है वह उतनी ही देर तक चलती है। आज के समय में यह समझना भी बहुत जरूरी है कि विनम्रता के साथ भी आप अपनी बात पर दृढ़ रह सकते हैं। दूसरे को चोट पहुंचाए बिना भी अपनी बात कही जा सकती है, यह सीखना और इसमें विश्वास होना बहुत जरूरी है। कई बार लगता है कि यदि हम ऊपर कही गई दो बातें भी समझ लें और उन पर अमल करना शुरू कर दें तो शायद हम अपने और दूसरों के लिए बेहतर माहौल बना पाएंगे।
- डॉ. गुरमीत सिंह, अध्यक्ष, हिंदी विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़
सकारात्मकता के लिए सोच, संवेग, व्यवहार में समन्वय जरूरी
पॉजिटिव लाइफ
अमेरिका में हाल ही में हुए एक सर्वे के अनुसार, जो लोग सकारात्मक सोचते हैं वह दूसरों की तुलना में लंबे समय तक जीवित रहते हैं। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक कार्ल जुंग ने भी कहा है कि आप वही हो जो आप करते हो न कि आप करोगे। आज भारतीय अपने दैनिक जीवन में 80 फीसदी दूसरों के बारे में बात करते हैं, पर अपने आपको नहीं पहचानते। गौतम बुद्ध ने कहा है कि हमारा दिमाग ही सब कुछ है। जैसा हम सोचेंगे वैसे ही बनते हैं, इसलिए सकारात्मक सोचना बहुत जरूरी है।
संयुक्त राष्ट्र संघ ने साल 2019 में खुशहाल (हैप्पीनेस) देशों की रैंकिंग जारी की। खुशहाली में भारत वर्ष 2016 में 117 वें स्थान पर, वर्ष 2017 में 122 और वर्ष 2018 में 133 वें स्थान पर आया। उसमें भी हम पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि से कम खुशहाल हैं। आधुनिकता का दूसरा नाम मनोवैज्ञानिक तैनाव भी है, जो हमारी सोच को प्रभावित कर नकारात्मकता की ओर ले जा रही है। क्योंकि आज के युवाओं को सामाजिक जीवन के बजाय व्यक्तिगत जीवन में जीना अच्छा लगता है।
हमें याद रखना चाहिए कि हमारा जीवन ऑब्जर्वेशनल लर्निंग पर आधारित है, जो शेयरिंग के द्वारा सीखी जाती है। नए साल में सकारात्मकता को कई तरह से अपनाया जा सकता है। अपने आपको दूसरों से जोड़कर रखें। ऐसा करने से मानवीय दृष्टिकोण सही बना रहता है। प्रतिदिन एक सकारात्मक उद्देश्य जरूर पूरा करें। किसी भी समस्या के समाधान के साथ-साथ उसके परिणामों पर भी जरूर ध्यान दें। सोच, संवेग और व्यवहार तीनों में समन्वय होना बहुत जरूरी है। ऐसा होने से नकारात्मकता नहीं आती। जब नकारात्मकता नहीं आएगी तो सकारात्मक ऊर्जा का संचार और तेज होने लगता है। आप जब चिंता व तनावमुक्त होते हैं तो कुछ करने से पहले सोचें। सोचकर जो भी कार्य किए जाते हैं वह सही परिणाम तक पहुंचते हैं। गहरी सांस लें और रिलैक्स रहकर अपने आपको शांत रखें। जीवन में न कहना जरूर सीखना चाहिए। ऐसा करने से आप खुद को बेहतर साबित कर पाते हैं।
सकारात्मकता आशा और विश्वास से प्रारंभ होती है। कभी ये मत सोचो कि मैं सबसे ज्यादा होशियार हूं, क्योंकि ऐसी सोच जीवन में आगे बढ़ने से रोकती है। आप दूसरों की बातें जरूर सुनें और उसमें कुछ भी सीखने को मिलें तो सीखें। हर दिन हंसना जरूर चाहिए, क्योंकि हंसना खुशहाली का एक मूलमंत्र है। इसके जरिये दिमाग और तेजी से काम करता है। केवल सकारात्मक लोगों को ही अपना दोस्त बनाएं। समस्याओं का समाधान भी उन्हीं के जरिये बेहतर तरीके से निकाले जा सकते हैं। साथ ही जीवन का विजन और मिशन बिल्कुल साफ होना चाहिए। यदि आप ऐसा करने में सफल रहते हैं तो आपके लिए हर काम आसान होता चला जाएगा।
- डॉ. रोशन लाल, असिस्टेंट प्रोफेसर, मनोविज्ञान विभाग पीयू
सकारात्मक ऊर्जा के लिए अतिसूक्ष्मवाद का अभ्यास करें
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अपने आसपास देखिए। आपके मोबाइल फोन में कितने एप हैं, जिनकी आपको कभी भी आवश्यकता नहीं होगी। आपके अलमीरा में कितने कपड़े होंगे, जो आपने कभी नहीं पहने। आपके घर में आपके उपयोग की जाने वाली चीजों में से कितनी होंगी, जिनको आपने कब से इस्तेमाल नहीं किया। अब अपने भीतर देखिए। आपके मन में बहुत सारे विचार हैं, जिनकी आपको वास्तविकता में आवश्यकता नहीं होगी। जिस तरह आपके आसपास की अव्यवस्था आपके काम करने की गति को धीमा कर देती है, उसी तरह मानसिक अव्यवस्था आपके शांत रहने की क्षमता को धीमा कर देती है। तो इस नए साल में सकारात्मक ऊर्जा के लिए इस अव्यवस्था को सुधारने का संकल्प करने की जरूरत है।
जैसे हम अपने गैजेट्स को फॉर्मेट करते हैं, जब उनका स्टोरेज खत्म होने लगता है। उसी तरह, हमें जरूरत है अपने जीवन से बेवजह बटोरी हुई चीजों को कम करने की और अव्यवस्था को हटाने की। इस तरह हम अपने जीवन को फिर से जीवंत कर सकते हैं और अपनी जीवन शैली को प्रारूपित कर सकते हैं। इसलिए इस नए साल की शुरुआत हमें अतिरिक्त को हटाने, अव्यवस्था को सुधारने और अतिसूक्ष्मवाद (मिनामालिज्म) का अभ्यास करने के संकल्प के साथ करनी होगी। विचार सरल हैं। हमें उन चीजों से छुटकारा पाने की जरूरत है, जिनकी हमें वास्तव में जरूरत नहीं है।
सतह पर, यह भौतिक वस्तुओं से छुटकारा पाने जैसा लग सकता है, लेकिन एक गहरे स्तर पर, अतिसूक्ष्मवाद उन विचारों और दृष्टिकोणों से छुटकारा पाने के बारे में भी है जिनका आपके जीवन में कोई उद्देश्य नहीं है। इसका मतलब हो सकता है कि अतीत के विचारों से छुटकारा पाना जो भविष्य में किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं करते। जब हम अपने भौतिक वातावरण से अत्यधिक वस्तुओं से छुटकारा पाते हैं, तो हम अपने आसपास बेहतर जगह बना पाते हैं, जिससे हमें काम को जल्दी और अच्छे से करने में मदद मिलती है और इसी तरह जब हम अपने मन को उन विचारों से मुक्त करते हैं जिनका कोई उद्देश्य नहीं तो हम अपने दिमाग की क्षमता को बेहतर बनाने और तेजी से काम करने में सक्षम होते हैं। भौतिक न्यूनतावाद न केवल आपके जीवन में जगह बनाता है, बल्कि यह कई ऐसे लोगों के लिए मददगार होगा, जिनके पास न्यूनतम जीवन का समर्थन करने का साधन नहीं है।
इसलिए इस नए साल में, अपने फोन से एक अतिरिक्त एप से छुटकारा पाने की शुरुआत करें, एक पोशाक जिसे आपने वर्षों में कभी नहीं पहनी, आपके घर की एक वस्तु जिसका आपने कभी इस्तेमाल नहीं किया और धीरे-धीरे अपने मन से अतिरिक्त विचारों को मुक्त करें और जैसा ही आप इस अव्यवस्था को हटा पाएंगे, सकारात्मक ऊर्जा आपको फिर से जीवंत कर सकेगी।
- डॉ. भवनीत भट्टी, प्रो. जनसंचार विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़
कमजोर इच्छाशक्ति नहीं दे सकती बड़े नतीजे
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जिस प्रकार इंद्रधनुष के बनने के लिए बारिश और धूप दोनों की जरूरत होती है, उसी प्रकार एक पूर्ण व्यक्ति बनने के लिए हमें भी जीवन के खट्टे-मीठे अनुभवों से होकर गुजरना पड़ता है। हमारे जीवन में सुख भी है और दुख भी। अच्छाई भी है और बुराई भी है। जहां सफलता हमें खुशी देती है, वहीं असफलता हमें मजबूत बनाती है। पर इन सबसे ऊपर हमें अपने जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण बनाएं रखने की आवश्यकता है। सकारात्मक व नकारात्मक विचार बीज की तरह होते हैं, जिन्हें हम दिमाग रूपी जमीन में बोते हैं। जो आगे चलकर हमारे दृष्टिकोण एवं व्यवहार रूपी पेड़ का निर्धारण करता है। एक तरफ नकारात्मक विचार हमें घोर अंधकार में धकेल सकते हैं, वहीं दूसरी ओर सकारात्मक सोच हमें असफलता के अंधकार से निकाल सकती है। सकारात्मक सोच आपके अंदर ऊर्जा का संचार करती है और आपको एक बेहतर इंसान भी बनाती है। इसलिए हालात चाहे कितने ही बुरे हों लेकिन सोच हमेशा सकारात्मक रखनी चाहिए।
कोई पत्थर चोट खाके कंकर-कंकर हो गया,
और कोई पत्थर चोट सहके शंकर-शंकर हो गया।
छोटी-छोटी लपटें अधिक गर्मी नहीं दे सकतीं वैसे ही कमजोर इच्छाशक्ति बड़े नतीजे नहीं दे सकती। जो व्यक्ति प्रतिकूल परिस्थितियों में आगे बढ़ने की चाह रखते हैं, जिन्दगी उन्हीं के आगे सर झुकाती है। इस दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं। हम वो सब कर सकते हैं, जो हम सोच सकते हैं और हम वो सब सोच सकते हैं, जो आज तक हमने नहीं सोचा। सबसे पहले अपने अंदर के डर को देखना होगा। उसके प्रभाव को सकारात्मकता से बाहर निकालना होगा और उसके बाद विजन व मिशन तय करके आगे बढ़ना होगा। डर से जीतना बहुत जरूरी है, यह डर नकारात्मकता का है, इसे बाहर निकालना होगा। हमें अपना लक्ष्य निर्धारित कर इच्छाशक्ति अनुसार कार्य करना होगा। कहते हैं, लहरों के डर से नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। इस मूलमंत्र को हम अपने जीवन में उतार लें तो हर समस्या का समाधान संभव है। मजबूत इच्छा हर उपलब्धि का पहला पायदान है।
करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत जात तें, सिल पर परत निसान।।
जिस प्रकार कुएं से पानी खींचने के लिए बर्तन से बांधी हुई कोमल रस्सी कुएं के किनारे वाले पत्थर से बार-बार रगड़ खाने के बाद पत्थर पर निशान छोड़ देती है, ठीक उसी प्रकार निरंतर परिश्रम, अभ्यास और चेष्टा करते रहने से असाध्य माना जाने वाला कार्य भी सिद्ध हो जाया करता है। और शायद नूतन वर्ष 2020 का यही सन्देश सर्वोपरि है कि-
हर दिन अपनी जिन्दगी को एक नया ख्वाब दो,
चाहे पूरा ना हो पर आवाज तो दो।
एक दिन पूरे हो जाएंगे सारे ख्वाब तुम्हारे,
सिर्फ एक शुरुआत तो दो।
- डॉ. भारत, सहायक प्रोफेसर, विश्वविद्यालय विधि अध्ययन संस्थान, पीयू चंडीगढ़
युवाओं को सक्षम बनने के लिए खुद से जिम्मेदारी उठानी होगी
पॉजिटिव लाइफ
खुद को इनोवेटिव बनाने के लिए मौजूदा दौर पर विद्यार्थियों को कॉलेज व यूनिवर्सिटी पर निर्भर रहने के बजाए अपने को सक्षम बनाने के जिम्मेदारी खुद से उठानी होगी, क्योंकि भारत में उच्च शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। बड़ी बड़ी डिग्री लेने के बावजूद युवाओं को नौकरी के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। बेरोजगारों की लिस्ट बढ़ती जा रहीं। ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए युवाओं को खास तैयारी करने की जरूरत है। खुद को प्रोडक्ट बनाने की आवश्यकता है ताकि वे जब बाजार में उतरें तो इंडस्ट्री उन्हें हाथोंहाथ ले।
मौजूदा समय में अपने को सक्षम बनाने के लिए बहुत से विकल्प हैं। इसके लिए युवाओं को ऑनलाइन कोर्सेज का रास्ता चुनना होगा। इस कोर्स में आसानी से रजिस्टर करवाएं। बहुत सी वेबसाइट फ्री में कोर्सेज करवाती हैं। ये वेबसाइट समय समय पर कोर्स से संबंधित असाइनमेंट देती हैं। इससे स्वयं का मूल्याकंन कर सकते हैं। दूसरा युवाओं को थोड़ा ट्रेंड बदलने की जरूरत है। आजकल के युवा नौकरियों के लिए सॉफ्ट स्किल कोर्सेज जैसे- अंग्रेजी बोलना, प्रॉब्लम साल्विंग, टीम मैनेजमेंट कोर्सेज के पीछे भाग रहे हैं। इससे कुछ हासिल नहीं होता, बल्कि तनाव बढ़ता है। युवाओं को इन विषयों की ओर जाने के बजाए उस क्षेत्र में अपना बेस मजबूत करना होगा, जिसमें वे जाना चाहते हैं।
उदाहरण के लिए अगर आप प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीख रहे हैं तो उसे अच्छी तरह से सीखें, ताकि सीखने की कोई गुंजाइश न रहे। इससे आत्मविश्वास बढ़ेगा और प्रदर्शन में भी सुधार आएगा, क्योंकि सॉफ्ट स्किल को काम के साथ आसानी से सीखा जा सकता है। इसके लिए अलग से कोर्स का बोझ उठाने और तनाव लेने की जरूरत नहीं हैं। मैं युवाओं से एक बात और कहना चाहता हूं कि खुद को सक्षम बनाने के चक्कर में नकल करने से बचें, क्योंकि नकल करके सिर्फ ग्रेड सुधरेंगे। स्किल नहीं आएगा। नए वर्ष पर संकल्प लें कि जीवन में नई चीजों को सीखने और चुनौतियों के लिए खुद को हमेशा तैयार रखेंगे।
- प्रो. धीरज सांगी, डायरेक्टर, पंजाब इंजीनियरिंग कालेज (पेक), चंडीगढ़
इन बातों का भी विशेष ध्यान रखें
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धैर्य रखें: जब हम दुनिया में रह रहे हैं तो निश्चित तौर पर हर तरह की बातें सामने आएंगी। चाहे कैसी परिस्थिति हो, उससे घबराए नहीं। धैर्य रखें। शांत रहें। शांति और धैर्य एक ऐसी औषधि है कि इसके सामने पहाड़ जैसी समस्याएं भी नतमस्तक हो जाती हैं। इससे न तो आपको कोई अवरोध होगा और ना आप अशांत होंगे। इससे आपका दिन खराब नहीं होगा और उमंग उत्साह बना रहेगा।
सकारात्मक रवैया अपनाएं: हमारे सामने कई ऐसी बातें आएंगी जिसमें सिर्फ नकारात्मकता ही दिखाई देगी, लेकिन हर समस्या उड़ान का मार्ग लेकर आती है। कोई घटना कितनी भी नकारात्मक हो परन्तु उसमें हमेशा सकारात्मक पहलू को देखें। कुछ समय के बाद उस घटना के सकारात्मक पहलू सामने आएंगे और तजुर्बा बढ़ेगा जिससे खुशी भी होगी और आनंद भी बढ़ेगा।
हर कार्य उमंग-उत्साह से करें: पूरे वर्ष के प्रत्येक दिन जो भी कार्य करें, उसे उमंग उत्साह से करें। ये ना सोचें कि यह छोटा कार्य है तो इस पर ध्यान नहीं देना चाहिए। छोटे कार्य ही बड़े एवं महान कार्य की नींव होते हैं इसलिए उमंग उत्साहपूर्वक रहते हुए उसे मूर्त्त रूप दें। सदा नए-नए आयाम नजर आएंगे। जहां उमंग उत्साह है, वहां सफलता है।
आशावादी नजरिया रखें: जिंदगी में कभी भी नकारात्मक नजरिया नहीं रखना चाहिए। कहते हैं उम्मीदों वाला जीता है और निराशा वाला मरता है। इसलिए किसी भी छोटे से छोटे या बड़े से बड़े लक्ष्य को प्राप्त करना है तो आशावादी दृष्टिकोट अपनाते हुए आगे बढ़ें। निश्चित तौर पर मंजिल आपके पास होगी।
ईश्वरीय याद के साथ हर कार्य की करें शुरुआत: जिंदगी में जो भी कार्य हम करते हैं, उसमें पांचों तत्वों, प्रकृति एवं परमात्मा शक्तियों का मिश्रण होता है। जब हम किसी भी कार्य को स्वयंभू समझकर करते हैं तो वह कई बार असंभव सा लगने लगता है और असफलता भी हाथ लग जाती है। परन्तु जब भी हम कोई कार्य करें तो ईश्वर को कुछ समय जरूर याद करें। इससे ईश्वर का सहयोग मिलेगा और हर कार्य आसान हो जाएगा।
चिंता ना करें, चिंतन करें: किसी भी बात की चिंता मत करें। बल्कि उसके बारे में चिंतन करें कि इसका समाधान क्या हो सकता है। इससे एक तो आपकी मानसिक शक्ति बढ़ेगी और दूसरा आपकी समस्याओं का समाधान भी होगा। यह एक ऐसा अभ्यास है, इससे धीरे-धीरे आप इतने मजबूत हो जाएंगे कि आपको हर मुश्किल एक अवसर लगेगी।
हर दिन को नया समझें: जिस तरह हम नए वर्ष के पहले दिन को नया समझते हुए मनाते हैं उसी प्रकार प्रत्येक दिन को नया दिन समझें, क्योंकि उस दिन का सबकुछ नया होता है। इसके साथ ही नया करने और नए तरीके से जीने का प्रयास करें।
- राजयोगिनी दादी जानकी, मुख्य प्रशासिका, ब्रह्माकुमारीज, माउंट आबू