हौसला और कुछ कर गुजरने की दिल में चाहत हो तो रास्ते खुद बन जाते हैं और मंजिलें आपकी कदम चूमती हैं। कुछ छात्र ऐसे भी हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों का सामना किया और सीबीएसई बोर्ड से दसवीं की परीक्षा में अच्छे अंक हासिल किए। जानिए कुछ ऐसे ही छात्रों के बारे में। 10 सीजीपीए लाने वाले इन बच्चों की दास्तां सुनकर आप भी करेंगे सलाम!
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शिवम मोदी, छात्र
- फोटो : amar ujala
बोर्ड परीक्षा के तीन माह पहले शिवम मोदी के पिता का निधन हो गया था। हौसला डगमगाया, पर शिवम ने पिता से बोर्ड की परीक्षा में 10 सीजीपीए लाने का जो वादा किया था उसे पूरा किया। पिता हार्ट के मरीज थे और परीक्षा के पीक टाइम में अस्पताल में दाखिल थे। स्कूल के बाद शिवम ज्यादातर समय पिता के पास ही रहता था। अकसर अस्पताल में शिवम के पिता कहते थे कि क्या तुम बोर्ड की परीक्षा में अच्छा अंक हासिल कर पाओगे। शिवम बार बार उनके कहता देख लेना आप खुद रिजल्ट बताओगे कि शिवम तुम्हारा बोर्ड की परीक्षा में 10 सीजीपीए आया है। अब पिता तो नहीं रहे, मां संतोष मोदी मां और पिता दोनों फर्ज अब बेटे के लिए निभा रही हैं। शिवम के पिता के निधन के बाद मानव मंगल स्कूल के प्रिंसिपल संदीप सरदाना ने शिवम मोदी के स्कूल का फीस भी माफ करवा दिया था। ताकि उसके पढ़ाई कोई दिक्कत न आए।
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सागर वर्मा, छात्र, मानव मंगल स्कूल
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तपती धूप में पेड़ के नीचे पिता को काम करते देख बेटा अक्सर कहता है कि आपको हारने नहीं दूंगा। आपकी खून पसीने की कमाई व्यर्थ नहीं जाएगी। बेटे की ये बात सुनकर फर्क से सीना चौड़ा हो जाता था। बोर्ड की परीक्षा में अच्छा अंक हासिल कर बेटे ने मेरे परिश्रम को सार्थक कर दिया। ये कहना है पंचकूला सेक्टर-15 निवासी स्कूटर मैकेनिक सतीश वर्मा का। उनके बेटे सागर वर्मा ने मानव मंगल स्कूल में सीबीएसई बोर्ड से दसवीं की परीक्षा में 10 सीजीपीए हासिल किया है। सेल्फ स्टडी के बदौलत सागर ने ये अंक हासिल किए हैं। मां और पिता दोनों ज्यादा पढे़ लिखे नहीं हैं, लेकिन बेटे को इंजीनियर बनाना चाहते हैं। सागर की मां आशा वर्मा हाउस वाइफ हैं। सतीश जीविका चलाने के लिए स्कूटर मैकेनिक का काम करते हैं। उसकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए स्कूल के प्रिंसिपल संदीप सरदाना ने फीस माफ कर दिया है। सागर ने परीक्षा में अच्छा अंक हासिल करने के लिए स्कूल के बाद छह से सात घंटे रोजाना सेल्फ स्टडी करता था। सागर कहता है कि अगर स्कूल का होमवर्क रोजाना ध्यान से किया जाए तो नंबर रिजल्ट बेहतर आएगा।
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वीर सिंह, छात्र
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कल्पना भी नही थी, लेकिन इसके बावजूद उम्मीद से बढ़कर नंबर लाया है। आज मेरा सीना चौड़ा हो गया है। यह कहना है सीबीएसई के 10 वीं कक्षा में 10 सीजीपीए लाने वाले बीर सिंह के पिता शेर बहादुर सिंह का। पिता शेर बहादुर खालास कॉलेज 26 में पिछले 26 सालों से बतौर माली का काम कर रहे हैं। बेटा बीर सिंह जीएमएसएसएस 37 के छात्र हैं। शनिवार को जैसे ही दसवीं का रिजल्ट निकला बीर सिंह के परिवार में खुशी का मौहाल बना गया। बीर सिंह ने बताया कि वह आगे चलकर होटल मैनेजमेंट का कोर्स करना चाहते हैं। बीर सिंह ने दसवीं की पढ़ाई बिना टयूशन के की। स्कूल में टीचर की ओर से पाठ का ध्यान से सुनता और वापिस घर आने पर उसे जरूर दोहराता। इसी का नतीजा है कि वह आज 10 सीजीपीए लाने में कामयाब रहा।
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रिजल्ट
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घातक बीमारियां भी नहीं तोड़ पाईं हौसला जानलेवा बीमारियों से त्रस्त विद्यार्थियों ने बड़ा काम कर दिखाया। सीबीएसई दसवीं कक्षा के परीक्षा परिणाम 10 सीजीपीए हासिल कर अपने शिक्षकों, दोस्तों, परिजनों का दिल जीत लिया। इन बच्चों ने दिखा दिया कि अगर इंसान कुछ ठान ले तो विपरीत परिस्थितियों में भी कामयाबी पाई जा सकती है।
नौमिका खन्ना- नौमिका खन्ना डीपीएस 40 की छात्रा हैं और उसने दसवीं कक्षा में 10 सीजीपीए हासिल किया। नौमिका जब आठ साल की थी तो उसे शुगर की बीमारी हो गई थी। बीमारी गंभीर थी इसलिए वह दिन में चार बार इन्सुलिन लगाती है। इसके बावजूद भी इसने हिम्मत नहीं हारी और सेल्फ स्टडी करते हुए इस मुकाम को हासिल किया। नौमिका आगे चलकर आईएएस ऑफिसर बनना चाहती हैं।
अदिति गोयल- कैंसर सरवाइवर हैं। इसने दसवीं कक्षा में 10 सीजीपीए अंक हासिल किया है। डीपीएस स्कूल 40 की छात्रा है और स्टेट लेवल की चेस मेडलिस्ट है। आदिति ने बताया कि 2013 में उसे बीमारी के बारे में पता चला। अमेरिका में किमो थेरेपी करवाई। वापस आने पर छह महीने की पढ़ाई एक महीने में पूरी की। सेल्फ स्टीज की और अव्वल रही। आदिति के पिता वकील हैं और उनके नक्शे कदम पर चलते हुए वह भी वकील बनना चाहती है।
डॉक्टर बनना चाहती है अर्शिया सेक्रेड हार्ट की दसवी कक्षा की छात्रा अर्शिया गर्ग दाईं आंख में ब्लर विजन होन के के कारण बिना चश्मा के कुछ भी नहीं देख पाती। तीसरी कक्षा में थी तभी एक आंख की रोशनी में कमी आ गई। इसके बावजूद उसने कड़ी मेहनत कर 9.6 सीजीपीए हासिल किया है। आशिया ने बताया कि वह डाक्टर बन लोगों की सेवा करना चाहती है। उसके पापा बिजनेस मैन हैं और मां गृहिणी।