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‘वो लाहौर’ ने 'हरे' किए भारत-पाक विभाजन के जख्म

Sun, 12 Apr 2015 04:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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टैगोर थियेटर में मंचित हुआ नाटक ‘वो लाहौर’ भारत-पाक विभाजन के जख्म हरे कर गया। हर दर्शक की आंख नम कर गया।
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‘वो लाहौर’ ने 'हरे' किए भारत-पाक विभाजन के जख्म

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चंडीगढ़ के सेक्टर 18 स्थित टैगोर थियेटर में नाटक का मंचन हुआ। इस नाटक ने भारत-पाक विभाजन के दर्द को बयां करते हुए शक्त्ति सिंह, सचिन जोशी, अखिलेश अरोड़ा, सूरज, बिरजू वीरा ने मुख्य किरदार निभाए।
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‘वो लाहौर’ ने 'हरे' किए भारत-पाक विभाजन के जख्म

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दो पुराने विस्तर और बीते दिनों को याद करता बुजुर्ग व्यक्ति कहता है जिस बाग में झूला और गिल्ली-डंडा खेला था वो आधा पंजाब में है और आधा लाहौर में चला गया। यहां से शुरूआत होती है नाटक ‘वो लाहौर’ की।

‘वो लाहौर’ ने 'हरे' किए भारत-पाक विभाजन के जख्म

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नाटक में मेन किरदार निभा रहीं जमुना अपने परिवार को संभालने में लगी रहती हैं। वह अपने तीनों बेटों को एक साथ रखना चाहती हैं लेकिन बड़ा बेटा परिवार का तोड़ने में लगा रहता है। नाटक में 20वीं सदी के आजादी से पहले लाहौर के एक परिवार की कहानी को दिखाया गया है। यह ऐसा दौर था जिससे हर हिन्दुस्तानी वाकिफ है।
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नाटक एक आम हिन्दुस्तानी मां पर आधारित थी, जो भारत के स्वाधीनता संग्राम के बीच में आई सामाजिक उथल-पुथल और आशाओं के बीच अपने परिवार को एक साथ रखने की कोशिश करती है, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाती और अंत में वह अकेली रह जाती है।
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नाटक में भारत पाकिस्तान बंटवारे का एक परिवार के अलग-अलग विचारधाराओं और उम्र के लोगों पर होते असर और उसके परिणाम को दिखाने की एक कोशिश की गई। नाटक भावनात्मक विचारों जैसे प्यार ,धोखा, उम्मीद ,देशभक्ति और शायरी को एक साथ बुनता है।
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