भारत और पाकिस्तान की सरहद पर खुफिया एजेंसियों के कड़े पहरे के बीच भारत की ये बेटी घर लौटी है, इसने जो कुछ सहन किया है उसका सच खौफनाक है।
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पाक में जबरन शादी का दर्द झेल वतन लौटी उज्मा
उज्मा की जुबां खामोश थी, लेकिन आंखें दर्द बयां कर रही थी। अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत की जमीं पर कदम रखते हुए उज्मा ने जमीन को छूकर देश को नमन किया।
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इसके बाद निगाह आसमान की ओर कर कुछ बुदबुदाया, शायद उसने ऊपर वाले का शुक्रिया किया होगा। उज्मा की पाकिस्तान से वतन वापसी के मौके पर पाक में उस पर हुए सितम की दास्तां सुनने के लिए देश का मीडिया मौजूद तो था, लेकिन उज्मा के आसपास सुरक्षा इतनी कड़ी थी कि मीडिया के उस तक पहुंचने से पहले ही उज्मा को अटारी बॉर्डर से स्पेशल सिक्योरिटी में अमृतसर स्थित श्री गुरु रामदास अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा ले जाया गया। वहां से वह दिल्ली के लिए रवाना हो गई।
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उज्मा की वतन वापसी पाक स्थित भारतीय दूतावास अधिकारियों के प्रयास से संभव हो सकी है। वापसी से पहले पाक में उज्मा के बयान से बवाल मचा था। वहीं उज्मा के भारतीय राजदूत के पास पनाह लेने के बाद से ही उसके फरेबी शौहर ताहिर अली के खिलाफ पाक में ही सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर जंग छिड़ गई थी कि आखिर कसूरवार कौन है।
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उज्मा के पाक से वापस आते ही सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां उसे अपने साथ दिल्ली ले गईं। भारत और पाक की जेलों में सजा काट चुके कैदियों की रिहाई के लिए आवाज उठाने वाले एडवोकेट अजय विरमानी ने बताया कि उज्मा विदेशी व पड़ोसी देश की नागरिक के नाते पाकिस्तान गई थी।
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देश का पानी पीते ही उज्मा के आंखों से आंसू छलक पड़े। आंसू पोंछते हुए उज्मा कुछ बोली तो नहीं, लेकिन वह पुलिसकर्मियों और वहां मौजूद वाहनों तथा आम पब्लिक को निहारती रही। अटारी बॉर्डर पर उज्मा के गाड़ी में बैठने के बाद उसे कुछ खाने को दिया गया।
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उज्मा मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली हैं। भारत लौटने के बाद गुरुवार को उज्मा ने बताया, “मैं अनाथ और एडॉप्टेड डॉटर हूं।” अप्रैल में इंटरनेट के जरिए उज्मा की मुलाकात ताहिर नाम के पाकिस्तानी शख्स से हुई।
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ताहिर ने उज्मा को मलेशिया में जॉब का ऑफर दिया। उज्मा मलेशिया पहुंचीं। ताहिर वहां टैक्सी ड्राइवर था। ताहिर से मुलाकात के बाद उज्मा भारत लौटीं। एक मई को वो रिश्तेदारों से मिलने पाकिस्तान गईं। (ये उज्मा का बयान है।) यहां फिर उनकी ताहिर से मुलाकात हुई।
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उज्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, पाकिस्तान में ताहिर ने मुझे धोखे से नींद की गोलियां दीं। किडनैप किया और बुनेर ले गया। तीन मई को ताहिर ने बंदूक की नोंक पर निकाहनामे पर साइन करा लिए। फिजिकली और मेंटली टॉर्चर किया।
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बता दें कि बुनेर पाकिस्तान के कबायली जिले खैबर-पख्तूनख्वा का हिस्सा है। यहां बेहद गरीबी है। यहां आज भी तालिबान और जमींदारों का राज चलता है। उज्मा समझ गईं कि वो यहां बुरी तरह फंस चुकी हैं। लेकिन, उन्होंने बेहद अक्लमंदी से काम लिया।
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उज्मा के इंडियन हाईकमीशन पहुंचने की कहानी दिलचस्प है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उज्मा ने ताहिर से कहा कि उन्हें कुछ डॉक्यूमेंट्स लेने के लिए इंडिया जाना होगा। ताहिर को शक नहीं हुआ क्योंकि उज्मा ने उससे कहा था कि वो उसे भी दिल्ली ले जाएंगी।
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ताहिर और उज्मा पांच मई को इंडियन एम्बेसी पहुंचे। उज्मा वीजा विंडो पर पहुंची। ताहिर, बाहर बैठा रहा। उज्मा ने विंडो पर मौजूद स्टाफ से कहा, “भारतीय हूं, मदद कीजिए।” एक पल चुप रहने के बाद स्टाफ ने उसे एम्बेसी के अंदर ले लिया। वहां जीपी. सिंह (डिप्लोमैट) मौजूद थे। उन्होंने उज्मा से पूरी बात पूछी।
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उज्मा एम्बेसी के अंदर पहुंचकर सेफ हो गईं। ताहिर कई घंटे तक बाहर बैठा रहा। बाद में पूछने पर स्टाफ ने उसे बताया कि उज्मा उसके साथ नहीं जाना चाहतीं। ताहिर ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। मामला इस्लामाबाद के लोअर और फिर हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकमीशन ने शाहनवाज को अपना (उज्मा का) वकील बनाया। एक सुनवाई के दौरान तो ताहिर कोर्ट ही नहीं पहुंचा।
पाकिस्तान में उज्मा की मदद इंडियन हाईकमीशन के अलावा वहां की ज्युडिशियरी ने की। सुषमा के मुताबिक एक सुनवाई के दौरान ताहिर ने हाईकोर्ट के जस्टिस कयानी से कहा, साहब ये पाकिस्तान की इज्जत का सवाल है। इस पर जस्टिस कयानी ने कहा इसमें हिंदुस्तान और पाकिस्तान कहां आते हैं। ये तो एक लड़की के इंसाफ का मामला है।