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'मैं दुल्हन बनाने की तैयारी में थी...'कफन ओढ़े बेटी को देख मां बोली ऐसी बात, रो दिए पिता

Sat, 31 Mar 2018 09:59 AM IST
सोमदत्त शर्मा/अमर उजाला, करनाल(हरियाणा)
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पेनी चौधरी का अंतिम संस्कार
जवान बेटी कफन ओढ़े लेटी थी, देखकर मां और दादी ने ऐसी बात कह दी कि पिता का कलेजा फट गया, फूट-फूट कर रो दिए, दर्दनाक तस्वीरें।
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पेनी चौधरी का अंतिम संस्कार
इंडियन कोस्ट गार्ड की असिस्टेंट कमांडेंट कैप्टन पेनी चौधरी का पार्थिव शरीर वीरवार को तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। मां और बाप का रो-रोकर बुरा हाल था। ऐसी चीख पुकार मची थी कि देखकर हर किसी की आंखों में आंसू आ गए।
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पेनी चौधरी का अंतिम संस्कार
वहीं, पेनी की दादी कफन ओढ़कर लेटी पोती को निहारती रही और आंखों से आंसू बहते रहे। फिर अचानक मुंह से निकला, अपने पुत्रर नू मैं लाल जोड़े नाल टौरना सी, रब ने चीटा कफन पवाता, यह बात सुनकर कोई भी अपनी आंखों के आंसूओं को बहने से नहीं रोक पाया।

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पेनी चौधरी का अंतिम संस्कार
ड्यूटी के दौरान हादसे का शिकार हुई पेनी चौधरी के शव दोपहर बाद मॉडल टाउन के शिवपुरी में ले जाया गया। यहां पिता गुरमीत सिंह ने बेटी की चिता को मुखग्नि दी। इससे पहले उन्होंने बेटी को सैल्यूट किया और कहा आई प्राउड ऑफ माय डॉटर...।
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पेनी चौधरी का अंतिम संस्कार
पेनी चौधरी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। दोपहर बाद शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी पेनी चौधरी के घर पहुंचे। कृष्णा मंदिर के सभागार में पेनी चौधरी की याद में 2 मिनट का मौन रखा गया और भगवान से प्रार्थना की गई।

 
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पेनी चौधरी का अंतिम संस्कार
पेनी चौधरी के दोस्त कैप्टन विनय दहिया ने बताया कि पेनी निडर थी, मिलनसार थी। उसके चेहरे पर हमेशा स्माइल रहती थी। उन दोनों ने 2008 में बैंगलौर में तीन साल तक एक साथ ट्रेनिंग की। वह बताती थी कि उसे बचपन से ही फ्लाइंग का शौक था।
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पेनी चौधरी का अंतिम संस्कार
पेनी ने दिसंबर 2013 को कोस्ट गार्ड ज्वाइन किया था। उनकी उम्र करीब 26 वर्ष थी। पेनी करनाल स्थित नूरमहल व ज्वेल्स होटल्स के मालिक व सेवानिवृत कर्नल मनबीर चौधरी की भतीजी हैं। कर्नल मनबीर चौधरी के चाचा भी 1962 की भारत चीन लड़ाई में देश के लिए वीरगति को प्राप्त हो चुके हैं।

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पेनी चौधरी का अंतिम संस्कार
बता दें कि 10 मार्च को रायगढ़ जिले के पास इंडियन कोस्ट गार्ड का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हेलीकॉप्टर चार यात्रियों के साथ एक नियमित राउंड पर था, जिसमें डिप्टी कमांडेंट बलविंदर सिंह, सहायक कमांडेंट पैनी चौधरी और दो गोताखोर संदीप और बलजीत शामिल थे। दुर्घटना के बाद पैनी जैसे ही हेलीकॉप्टर से उतरने लगी, हेलीकॉप्टर का रोटर ब्लेड पैनी के हेलमेट पर जा टकराया।

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पेनी चौधरी का अंतिम संस्कार
टक्कर लगने से वो बुरी तरह घायल हो गई। रोटर लगने से पैनी चौधरी को सिर में अंदरुनी चोट लगी। पैनी को तुरंत दक्षिण मुंबई के कुलाबा क्षेत्र स्थित नौ सैनिक अस्पताल आईएनएचएस अश्विनी में भर्ती कराया गया। यहां उनके सिर की सर्जरी की गई, लेकिन वे कोमा में चली गईं। पिछले 17 दिन वे लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थीं, लेकिन होश नहीं आया और 27 मार्च को उन्होंने दम तोड़ दिया।

 
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पेनी चौधरी का अंतिम संस्कार
बताया जा रहा है कि राउंड के दौरान हेलीकाप्टर इंजन बंद हो गया था, तो पायलट और सह-पायलट ने समुद्र में गिरने से रोकने के लिए हेलिकॉप्टर को घुमाने की सोची। घुमाने के लिए रोटर के मूवमेंट का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने हेलीकॉप्टर को समुद्र तट के रेतीले हिस्से पर उतारने की कोशिश की, लेकिन यह नहीं हो सका और हेलीकॉप्टर एक चट्टानी पैच पर उतरा और दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
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