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खुलासाः 'लाशों के ऊपर खड़े किए जाते थे किले, खिलजी ने 8 हजार खोपड़ियों से भरवाई थी नींवें'

Sat, 14 Dec 2019 01:24 PM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सीरी किला - फोटो : अमर उजाला
क्या आप जानते हैं कि भारत में कई ऐतिहासिक किले ऐसे हैं, जिनकी नीवों में लाशें और खोपड़ियां भरी गई थीं। हाल ही में ये खुलासा एक शोधकर्ता रक्षा विशेषज्ञ ने किया। 
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लेफ्टिनेंट जनरल डीडीएस संधू - फोटो : अमर उजाला
दरअसल, आजादी से पहले राजा-महाराजाओं ने किलों का निर्माण ऐसे तरीकों से कराया था, जो अपने आप में खास वास्तुकला का नमूना हैं। किले मजबूत और दुश्मन के हमलों के बाद सुरक्षित भी रहें, इसके लिए एक अलग ही ढंग की वास्तुकला को अपनाया गया। राजाओं ने किलों की नीवों को भरवाने के लिए लोगों की लाशों व खोपड़ियों का इस्तेमाल कराया। इसका खुलासा रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल डीडीएस संधू ने ‘मेडिवल मिलिट्री आर्किटेक्चर-फोर्ट ऑफ इंडिया’ पैनल चर्चा के दौरान एक रिसर्च का हवाला देते हुए किया।
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कुंभलगढ़ किला - फोटो : अमर उजाला
चर्चा के दौरान बताया गया कि किसी भी किले के निर्माण के लिए तोपखानों और लोगों की रक्षा करना मुख्य आधार होता था। उस समय के शासकों ने इन बातों को ध्यान में रखते हुए अपने किलों को बहुत ही खूबसूरती के साथ विकसित किया था। चर्चा के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल डीडीएस संधू ने सैनिक दृष्टिकोण से किलों के डिजाइन के बारे में विस्तार से बताया कि ज्यादातर किले बारिश के प्रभाव से बचने के लिए उत्तर दिशा की तरफ बनाए हुए थे। शासक मजबूत नींव बनाने के लिए लाशों का प्रयोग भी करते थे, खिलजी ने भी सीरी किले के नीचे 8 हजार सिर दबवाए थे।

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दौलताबाद किला - फोटो : अमर उजाला
लेफ्टिनेंट जनरल संधू ने कहा कि किसी भी जगह पर किले के निर्माण के लिए कुदरती जल स्रोत की मौजूदगी और कृषि के लिए जमीन मुख्य जरूरतें होती थीं। उन्होंने कुंभलगढ़ किले और दोलताबाद किले की विशेषताओं से अवगत करवाया। प्रख्यात इतिहासकार अमिता बेग ने किले के निर्माण में कुदरत की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत में किले कुदरत को ध्यान में रखते हुए बनाए गए थे, जो आज की वास्तुकला में नजर नहीं आता। किलों के निर्माण के लिए मध्यकालीन युग की तकनीकों को सेना और सिविल इंजीनियरिंग दोनों के साथ जोड़ा गया था, क्योंकि सभी कुदरती कारक किले की रक्षा के लिए इस्तेमाल किए जाते थे।
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अमिता बेग - फोटो : अमर उजाला
प्रोफेसर पुष्पेश पंत ने कहा कि सबसे पहले भारतीय किले का निर्माण 2000 ईसा पूर्व में किया गया था। जहां यह किले बनाऐ गए हैं, उन क्षेत्रों की अपनी विशेष खासियत है, जिसमें मुश्किल समय में सुरक्षित जगह, दूर दृष्टि, युद्ध रक्षा विधि, पानी की उपलब्धता और जमीन का प्रयोग करना शामिल था। थियेटर कलाकार जीएस चन्नी ने कहा कि  कुंभलगढ़ किले की दीवारें इतनी बड़ी थी कि इनको चीन की महान दीवार के बाद दूसरे स्थान पर समझा जाता है। यह भी माना जाता है कि उस समय के अधिकारियों की इजाजत के बगैर मच्छर भी किले में नहीं घुस सकता था, क्योंकि किले की दीवारें बादलों को चूमती थीं।
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