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'एड्स' की पुरानी दवाओं में किया गया फेरबदल, नई ज्यादा असरदार है और साइड इफेक्ट भी कम

Mon, 20 Jan 2020 02:12 PM IST
खुशबू गोयल वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
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भारत सरकार ने 'एड्स' की पुरानी दवाओं में फेरबदल किया है और नया कॉम्बिनेशन ज्यादा असरदार है। इसके साइड इफेक्ट भी कम है, डिटेल में पढ़ें जानकारी।
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सरकार ने एड्स की पुरानी दवाओं के नए कॉम्बिनेशन को देश भर के आरटी सेंटर पर जल्द मुहैया कराने को कहा है। नई दवा के कॉम्बिनेशन को सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद दवा कंपनी के साथ समझौता करके उसे दवाओं का इंडेंट दे दिया गया है। मार्च से देश के सभी एआरटी सेंटरों पर यह नई दवाएं उपलब्ध होंगी।
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इस बदलाव के संबंध में जानकारी नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. नरेश गोयल ने दी। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में एचआईवी पॉजिटिव मरीजों को टेनोफोविर, जीडोवुडीन और स्टीव डायन दवा दी जा रही है। इसमें बदलाव करते हुए टीएलडी (टेनोफोविर, लैमीवुडीन और डोलग्रेविर) के कॉम्बिनेशन को लागू करने का निर्णय लिया गया है।

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मरीजों पर इन दवाओं का असर तेजी से होगा। इसके अलावा पुरानी दवाओं की तुलना में इन दवाओं से साइड इफेक्ट का खतरा भी बेहद कम है। नए कॉम्बिनेशन की दवा बाजार में उपलब्ध है, लेकिन उसकी कीमत ज्यादा होने के कारण वे मरीजों की पहुंच से दूर हैं। सरकार ने नए कॉम्बिनेशन के बेहतर परिणाम देखते हुए उसे एआरटी सेंटर पर मुहैया कराने का निर्णय लिया।

 
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गर्भ में पल रहे बच्चे को एड्स से बचाने के मामले में चंडीगढ़ देश के पांच टॉप राज्यों में शामिल हो गया है। पहले चार नंबर पर तमिलनाडु, महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश, केरल हैं। चंडीगढ़ में एचआईवी पॉजिटिव मां के गर्भ में पल रहे बच्चे को संक्रमण होने का खतरा समाप्त हो चुका है। कारण, यहां शत-प्रतिशत गर्भवती महिलाओं का मानक के अनुसार तय समय पर एचआईवी की जांच का होना है।
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चंडीगढ़ स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी की प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. वनिता गुप्ता ने बताया कि 2020 दिसंबर तक मां से बच्चे में संक्रमण की दर को पूरे देश में शून्य पर पहुंचाने का लक्ष्य दिया गया है। इसके लिए देश में प्रत्येक गर्भवती महिला का एचआईवी और सिफलिस टेस्ट होनी जरूरी है। हर साल देश में लगभग तीन करोड़ महिलाएं गर्भधारण कर रही हैं, लेकिन उनमें से 2.4 करोड़ की ही जांच हो रही है। बची संख्या ही संक्रमण का कारण बन रही है।
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इस संक्रमण को व्यापक जागरूकता और शत-प्रतिशत एचआईवी टेस्टिंग से ही रोका जा सकता है। इसके लिए चंडीगढ़ में 26 टेस्टिंग सेंटर चलाए जा रहे हैं। कम्युनिटी सेंटर बेस्ड स्क्रीनिंग व घर-घर जाकर टेस्ट करने की सुविधा भी दी जा रही है। नाको के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. नरेश गोयल ने बताया कि चंडीगढ़ के परिणाम बेहद संतोषजनक हैं। अपनी उपलब्धि के आधार पर वह तमिलनाडु, महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश और केरल के समकक्ष आ गया है।
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