जनरल डायर को मारने वाले शहीद उधम सिंह के लिए यहां आज भी हर रात बिस्तर लगता है। हर रात खिड़की खोलकर दरवाजा बंद कर दिया जाता है, यकीं न हो तो देखिए...
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यहां हर रात ऊधम सिंह के लिए लगता है बिस्तर
31 जुलाई 1940 को ऊधम सिंह देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए, लेकिन अमृतसर के सेंट्रल खालसा यतीम खाना में ऊधम सिंह के लिए आज भी रोजाना रात को बिस्तर बिछाया जाता है।
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यहां हर रात ऊधम सिंह के लिए लगता है बिस्तर
यहां नियमित कमरे की सफाई की जाती है। रात को खिड़की खोलकर दरवाजा बंद कर दिया जाता है। यतीम खाना में आज भी ऊधम सिंह की मौजूदगी मानी जाती है। शहीद ऊधम सिंह के नाम से खोले गए स्कूल में कुल 310 बच्चे पढ़ते हैं।
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उधम सिंह
- फोटो : self
बच्चे ब्रेललिपि से पढ़ाई कर रहे हैं। ऊधम सिंह के बर्तन आज भी उनके कमरे में सुरक्षित हैं। इनमें दो कटोरी, एक थाली, दो डोल (हैंडल वाला डिब्बा), एक छन्ना और एक लोटा है। पहले छत कच्ची थी, लेकिन अब इसे पक्का कर दिया गया है।
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shaheed udham singh
ऊधम सिंह को जब सेंट्रल यतीम खाना में दाखिला दिया गया था, तब के प्रमाण पत्र में उनका नाम शेर सिंह लिखा हुआ था। शेर सिंह के साथ उसके भाई का नाम साधु सिंह लिखा था। दोनों के प्रमाण पत्र के साथ-साथ ऊधम सिंह से जुड़े कई दस्तावेज लकड़ी के फ्रेम में शीशे में चमक रहे हैं।
सेंट्रल खालसा यतीम खाना के सरदार गुरचरण सिंह और जगजीत सिंह बताते हैं कि यतीम खाना में ऊधम सिंह की गाथाएं पढ़ाई जाती हैं। जन्मदिन धूमधाम से मनाया जाता है। श्रद्धांजलि समारोह स्टाफ बच्चों के साथ मिलकर मनाते हैं।