3 महीने के बेटे ने पांव छूकर आशीर्वाद लिया, पत्नी ने हाथ जोड़कर नमन किया और शहीद पति को अंतिम विदाई दी, देखिए तस्वीरें।
विज्ञापन
2 of 8
संदीप सिंह पूनिया का अंतिम संस्कार
हरियाणा के हिसार जिले में गांव सातरोड़ खुर्द निवासी सैनिक संदीप सिंह पूनिया जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में शहीद हो गए। करीब 26 वर्षीय संदीप सुबह ड्यूटी पर जाने के लिए तैयार हो रहे थे कि हार्ट अटैक हो गया। साथी जवान उन्हें अस्पताल लेकर गए, लेकिन तब तक उन्होंने दम तोड़ दिया। शुक्रवार शाम को सैनिक संदीप का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव लाया गया, जहां नम आंखों से उन्हें विदाई दी गई।
विज्ञापन
3 of 8
संदीप सिंह पूनिया का अंतिम संस्कार
सैनिक संदीप सिंह पूनिया अपने तीन महीने के बेटे जितेश को गोद में भी नहीं उठा सके। संदीप आखिरी बार घर में पांच महीने पहले अक्तूबर में आए थे, जबकि उनके जाने के दो महीने बाद दिसंबर में बेटे ने जन्म लिया। परिजनों ने बच्चे के जन्म पर छोटा सा जलवा पूजन का कार्यक्रम किया। बड़ा जश्न मनाने के लिए संदीप के आने का इंतजार था, लेकिन लौटा तो सिर्फ ताबूत में बंद संदीप का पार्थिव शरीर।
4 of 8
संदीप सिंह पूनिया का अंतिम संस्कार
तीन महीने के बेटे जितेश को जब उसके पिता के अंतिम दर्शन करवाए गए तो वहां मौजूद हर ग्रामीण नारेबाजी करने लगा। संदीप के जुड़वां भाई मंदीप ने बताया कि उसकी आखिरी बार संदीप से बुधवार रात को बात हुई थी। संदीप ने उससे कहा था कि मैं ठीक हूं, जल्दी ही घर आऊंगा। संदीप ने मंदीप से अच्छा कॅरिअर बनाने के लिए मन लगाकर तैयारी करने को भी कहा था।
विज्ञापन
5 of 8
संदीप सिंह पूनिया का अंतिम संस्कार
बीवी के साथ हुई थी आखिरी बातचीत
मंदीप के मुताबिक संदीप के साथ आखिरी बातचीत उसकी भाभी रेखा से हुई थी। रेखा को उसने बताया था कि अब वह तैयार होकर ड्यूटी के लिए जा रहा है। दोनों वे व्हाट्स ऐप के जरिये वीडियो कालिंग भी की थी, लेकिन रेखा को इस बात का जरा सा भी अहसास नहीं था कि इसके बाद वह दोबारा कभी भी अपने पति से बात नहीं कर पाएंगी। संदीप की शादी 20 अप्रैल 2016 को चरखी दादरी के गांव कलाली निवासी रेखा के साथ हुई थी।
विज्ञापन
6 of 8
संदीप सिंह पूनिया का अंतिम संस्कार
दादा के नक्शेकदम पर चला था संदीप
परिवार के अन्य सदस्य बताते हैं कि संदीप के दादा टेकचंद सेना से सूबेदार के पद से रिटायर्ड हुए थे। संदीप का जन्म दादा के निधन के बाद हुआ था। संदीप के पिता बलबीर सिंह भी सेना में जाना चाहते थे, लेकिन किन्हीं कारणों से नहीं जा पाए, लेकिन संदीप हमेशा सेना में ही जाना चाहता था। इसलिए स्कूल में भी उसने एनसीसी ली। संदीप ने नागपुर में ही 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त करते हुए सेना की तैयारी शुरू कर दी।
विज्ञापन
7 of 8
funeral
दूसरी बार में पाई सफलता
भाई मंदीप ने बताया कि संदीप पहली बार में इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन चयन नहीं हो सका। इसके बाद फिर से मेहनत की और दूसरी बार में स्टोर कीपर के तौर पर मात्र 18 साल की उम्र में सेना में भर्ती हो गए। मंदीप ने बताया कि सेना की नौकरी इज्जत से भरी है। कौन ऐसा होगा, जो सेना में नहीं जाना चाहेगा। अपने भाई से प्रेरणा लेकर वो भी सेना में जाने के लिए प्रयास करेंगे।
2011 में हुई थी सेना में स्टोरकीपर के तौर पर तैनाती
29 जून 1992 को गांव सातरोड़ खुर्द निवासी बलबीर सिंह पूनिया के घर जन्मे संदीप और मंदीप जुड़वां बेटे पैदा हुए। बड़े बेटे संदीप 2011 में भारतीय सेना में स्टोरकीपर के तौर पर भर्ती हुए थे। उनका रैंक एसईपी था। करीब ढाई साल पहले ही उनकी जम्मू-कश्मीर में तैनाती हुई थी। इससे पहले उन्होंने पश्चिम बंगाल में ड्यूटी की थी। संदीप के पिता बलबीर सिंह महाराष्ट्र के नागपुर में ट्रांसपोर्ट का काम करते हैं। करीब 15 सालों से उनका परिवार नागपुर में ही रहता है।