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सर मुझे भेजो... आतंकियों को मिट्टी में मिलाकर ही आऊंगा, कहा और शहीद हो गया

Tue, 21 Feb 2017 09:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नारनौल(हरियाणा)
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मेजर सतीश दहिया की बहादुरी का किस्सा
सर मुझे भेजो... आतंकियों को मिट्टी में मिलाकर ही आऊंगा, अपने कमांडिग अफसर से ऐसा कहा और चला गया मुकाबला करने, पर मिसाल बन जाएगा ये उसने सोचा न था।
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मेजर सतीश दहिया
सर मुझे भेजो... आतंकियों को मिट्टी में मिलाकर ही आऊंगा, अपने कमांडिग अफसर से ऐसा कहा ​और चला गया मुकाबला करने, पर मिसाल बन जाएगा ये उसने सोचा न था।तीन आंतकियों को ढेर किया और फिर मौत से हार गया। कुपवाड़ा के हंदवाड़ा में शहीद होने वाले नारनौल के मेजर सतीश दहिया ऑपरेशन का हिस्सा नहीं थे, लेकिन जो इलाका उनके अधीन नहीं था, वहां पर जाने के लिए खुद अफसर से आग्रह किया था।
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हंदवाड़ा में आतंकियों से लड़ते शहीद हुए मेजर सतीश दहिया
मेजर का जज्बा देखकर अफसर मना नहीं कर सके और उसे भेज दिया। मेजर के साथी शबीर खान बताते हैं कि कुछ दिन पहले उन्हें मेजर दहिया ने रबीन्द्र नाथ टैगोर की कविता भेजी थी। इस कविता को भेजने के बाद मंगलवार शाम करीब 4.55 बजे दहिया से फोन पर बात की। शबीर खान ने बताया कि दहिया ने उन्हें चैलेन्ज किया था कि आज महामुकाबला होगा और आज वह बड़ा मैडल जीतने वाले हैं। सोचा न था कि यह सच हो जाएगा।

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मेजर सतीश दहिया की पत्नी - फोटो : अमर उजाला
मेजर की बहादुरी का यह किस्सा सुनकर पत्नी सुजाता का सिर गर्व से ऊंचा हो गया। उन्होंने कहा कि उन्हें पति की शहादत पर गर्व है। उनके पति काफी बहादुर थे, इसलिए उन्होंने खुद उस एरिया में लड़ने के लिए जाने का आग्रह किया जो उनके अधीन आता ही नहीं था। सुजाता ने कहा कि पति की बहादुरी ने उसका सिर फक्र से ऊंचा कर दिया। अब वे अपनी इकलौती बेटी को भी आर्मी में अफसर बनाएंगी, ताकि वह अपने पिता के सपनों को पूरा कर सके।
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शहीद मेजर सतीश दहिया का अंतिम संस्कार
शहीद मेजर सतीश दहिया मंगलवार को शहीद हुए थे। उनका पार्थिव शरीर बुधवार शाम नारनौल में स्थित उनके पैतृक गांव बनिहाड़ी पहुंचा और यहां राजकीय सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार कर दिया गया। शहीद को उनकी तीन साल की बेटी प्रिया ने दी मुखाग्नि दी। शहादत से पहले इस वीर सपूत ने अपने मंगलवार दोपहर बाद अपनी पत्नी व माता-पिता से फोन से आखिरी बार बात की और उनसे जो कुछ कहा, वह उनके आखिरी संवाद बन गए।
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मेजर सतीश दहिया की बेटी - फोटो : अमर उजाला
सतीश दहिया के पिता अचल सिंह बताते हैं कि मंगलवार सवेरे करीब पौने 5 बजे फोन पर बात वह बेटे से फोन पर बात कर रहे थे। इस बीच पता चला कि आतंकी हमला हो गया। सतीश ने फिर कहा कि करते हुए बेटे ने कहा था आतंकी घुस आए हैं, इन्हें ढेर करके दोबारा कॉल करूंगा। सतीश ने कहा था कि पहले वह उनसे निपट आता है, उनका सफाया करके वापस आने के बाद बात करता हूं। इसके बाद कॉल आई तो जरूर, लेकिन बेटे की शहादत की।
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मेजर सतीश दहिया का अंतिम संस्कार - फोटो : अमर उजाला
शहीद मेजर सतीश दहिया की शहादत के बाद ससुराल नलवाटी में भी गमगीन माहौल है। मेजर की शादी नलवाटी क्षेत्र के पवेरा गांव में हिम्मत सिंह की बेटी निक्की उर्फ सुजाता के साथ 17 फरवरी 2012 को हुई थी। जैसे ही रात को मेजर सतीश दहिया के शहीद होने का समाचार मिला परिवार गांव में शोक छा गया। 5 दिसंबर को निक्की के ताऊ का लड़का संदीप सरपंच और दिसंबर के अंतिम सप्ताह में दादा सहीराम का भी निधन हो गया था।

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मेजर सतीश दहिया का अंतिम संस्कार - फोटो : अमर उजाला
महेंद्रगढ़ जिले में नांगल चौधरी के पास बनिहाड़ी गांव के रहने वाले 32 वर्षीय मेजर सतीश दहिया अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। उनकी एक ढाई साल की बच्ची है। 62 वर्षीय पिता अचल सिंह और मां अनीता देवी उनकी पत्नी व बेटी के साथ गांव में ही रह रहे हैं। पहले वह मोदी नगर में पहले व्यापार करते थे। शहीद मेजर की पत्नी व बेटी भी गांव में ही रहती हैं।

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major satish dahiya - फोटो : twitter
7 साल पहले 2008 में सेना में भर्ती हुए मेजर सतीश दहिया 13 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे। मंगलवार को हंदवाड़ा ऑपरेशन को लीड कर रहे थे। आतंकियों की घेराबंदी करने के बाद मुठभेड़ में पेट में गोली लगने से वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए। बाकी घायल साथियों के उन्हें श्रीनगर के बेस हॉस्पीटल में लाया गया तो यहां वह जिंदगी हार भारत मां का प्यार जीत गए।
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मेजर सतीश दहिया का अंतिम संस्कार
शहीद सतीश दहिया ने प्रारंभिक शिक्षा बनिहाड़ी के राजकीय स्कूल से की। वहीं दस जमा दो की शिक्षा उन्होंने उत्तर प्रदेश के मोदी नगर से प्राप्त की। इसके बाद शहीद ने राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर से एमए अंग्रेजी विषय में की। 2008 में बतौर कमीशन वे सेना में लेफ्टिनेंट पद पर भर्ती हुए। सेना द्वारा उन्हें 2009 में बहादुरी पुरस्कार भी दिया गया। फरवरी 2011 में उनकी शादी सुजाता चौधरी के साथ हुई, जो एक घरेलू महिला हैं। 2012 में प्रमोशन पाकर वे मेजर बने।
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