सेना में भर्ती के लिए रैली चल रही है, जिसमें तीन राज्यों के हजारों युवा भाग ले रहे हैं। लेकिन सबसे जरूरी बात ये कि नौकरी तब मिलेगी, जब ये शर्त पूरी हो जाएगी।
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सेना में भर्ती के लिए खुली रैली
भर्ती रैली चंडीगढ़ में चल रही है, लेकिन सैन्य अथॉरिटी को दस्तावेजी फर्जीवाड़े का डर सता रहा है। इसलिए संबंधित अथॉरिटी ने यह फैसला लिया है कि इस भर्ती प्रक्रिया के दौरान जो भी युवा फाइनल तौर पर चयनित होंगे, उनके शैक्षणिक व चरित्र प्रमाण पत्र संबंधी दस्तावेजों को खंगाला जाएगा। इसके लिए सेना ने इंतजाम कर लिया है।
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सेना में भर्ती के लिए खुली रैली
दरअसल सेना आवेदकों के शैक्षणिक दस्तावेजों को उनके शिक्षा बोर्डों और विश्वविद्यालयों में वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाएगा। वहां से ये संस्तुति रिपोर्ट मंगवाई जाएगी कि भर्ती के दौरान जो शैक्षणिक सर्टिफिकेट या डिग्री आवेदक युवा ने सेना के समक्ष प्रस्तुत की है, उसे संबंधित बोर्ड व यूनिवर्सिटी ने जारी किया है या नहीं?
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दूसरा, इन आवेदकों के चरित्र प्रमाण पत्रों को भी चेक करवाने के लिए संबंधित जिलों के जिला उपायुक्तों को भेजा जाएगा। जिला उपायुक्त तहसीलों व पुलिस स्टाफ की मदद से उनके गांवों में जाकर इन युवाओं द्वारा प्रस्तुत किए गए पंचायत, तहसील की ओर से तैयार चरित्र प्रमाण पत्रों की वेरिफिकेशन करवाएंगे।
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जब तक इन दस्तावेजों की जांच चलेगी, तब तक सेना भर्ती में चयनित युवा आवेदक परख अवधि (प्रोबेशन पीरियड) के दायरे में रहेंगे। वेरिफिकेशन पूरी होने पर ही उन्हें सेना रेगुलर करेगी। अफसर के अनुसार जैसे-जैसे आवेदकों की वेरिफिकेशन आती रहेगी, वे रेगुलर होते रहेंगे। लेकिन यदि कोई फर्जीवाड़ा पकड़ा गया, तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी और उन्हें प्रोबेशन पीरियड में ही सेना से बाहर कर दिया जाएगा।
उधर, एक ही आवेदक सेना की आंखों में धूल झोंककर बार-बार भर्ती प्रक्रिया में शामिल न हो, इसके लिए भी सेना ने बायोमीट्रिक मशीन का सहारा लिया है। सभी आवेदकों के थंब इंप्रेशन लिए गए थे। बता दें कि पिछले दिनों हरियाणा में भर्ती प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज से संबंधित फर्जीवाड़ा सामने आया था। इसी के मद्देनजर चंडीगढ़ में चल रही तीन राज्यों की भर्ती में सेना फर्जीवाड़े से बचने के लिए पूरी तरह चौकस है।