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19वें कारगिल विजय दिवस पर युद्ध की 15 ऐसी अनदेखी तस्वीरें, सैनिकों पर गर्व होगा आपको

Thu, 26 Jul 2018 01:24 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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कारगिल युद्ध
19 साल पहले आज ही के दिन यानी 26 जुलाई 1999 को हुए कारगिल युद्ध की ऐसी अनदेखी तस्वीरें देखिए, जिन्हें देखकर आप भारतीय सेना के जांबाज सिपाहियों पर गर्व करेंगे।
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कारगिल युद्ध
करीब 18 हजार फीट की ऊंचाई पर कारगिल में भारत और पाकिस्तान के बीच मई से जुलाई 1999 यानी पूरे दो महीने एक युद्ध चला था, जिसे कारगिल युद्ध के नाम से जाना जाता है। हर साल इस दिन को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस जंग में भारत के लगभग 527 से ज्यादा वीर योद्धा शहीद हुए थे। वहीं 1300 से ज्यादा जवान घायल हुए थे।

 
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कारगिल युद्ध
युद्ध की शुरुआत हुई थी 8 मई 1999 से जब पाकिस्तानी फौजियों और कश्मीरी आतंकियों को कारगिल की चोटी पर देखा गया था। माना जाता है कि पाकिस्तान इस ऑपरेशन की 1998 से तैयारी कर रहा था और अगर पाकिस्तान को कारगिल से तब खदेड़ा न जाता तो वह भविष्य में कश्मीर की जमीन पर कब्जा कर सकता था।

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कारगिल युद्ध
युद्ध क्यों हुआ
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और सेना प्रमुख जहांगीर करामात के बीच मतभेद बढ़ गए थे। दरअसल, करामात के सेवानिवृत्ति होने के बाद किसे सेना प्रमुख बनाया जाए, इस मुद्दे पर बहस चल रही थी। इस बीच एक आम सभा में खुद पर हुई टिप्पणी से नाराज होकर करामात ने सेना प्रमुख पद से इस्तिफा दे दिया। फिर शरीफ ने जनरल परवेज़ मुशर्रफ को सेना प्रमुख के पद पर नियुक्त किया।
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कारगिल युद्ध
परिणाम
इस युद्ध के कारण पाकिस्तान में राजनैतिक और आर्थिक अस्थिरता बढ़ गई थी। परवेज मुशर्रफ राष्ट्रपति बन गए थे। भारत में इस युद्ध के दौरान देशप्रेम का उबाल देखने को मिला और भारत की अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती मिली। भारतीय सरकार ने रक्षा बजट और बढ़ाया। वहीं इस युद्ध से प्रेरणा लेकर कई फिल्में बनीं, जिनमें एल ओ सी कारगिल, लक्ष्य और धूप मुख्य हैं।
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कारगिल युद्ध
पाकिस्तानी सेना ने अपने 5000 जवानों को कारगिल पर चढ़ाई करने के लिए भेजा था। मकसद था, भारतीय सीमा में घुसपैठ करके भारतीय जमीन पर कब्जा करना। कारगिल की लड़ाई के दौरान पाकिस्तानी एयरफोर्स के चीफ को इस ऑपरेशन की खबर नहीं दी गई थी। जब इस बारे में उन्हें पता चला तो उन्होंने इस मिशन में आर्मी का साथ देने से मना कर दिया था।
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कारगिल युद्ध
8 मई को कारगिल युद्ध शुरू हुआ और 11 मई से भारतीय वायुसेना की टुकड़ी ने इंडियन आर्मी की मदद करना शुरू कर दिया था। कारगिल की लड़ाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस युद्ध में वायुसेना के करीब 300 विमान उड़ान भरते थे। युद्ध में तोपखाने (आर्टिलरी) से 2,50,000 गोले और रॉकेट दागे गए थे।

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कारगिल युद्ध
युद्ध में 300 से अधिक तोपों, मोर्टार और रॉकेट लॉन्चरों ने रोज करीब 5,000 बम फायर किए थे। लड़ाई के महत्वपूर्ण 17 दिनों में प्रतिदिन हर आर्टिलरी बैटरी से औसतन एक मिनट में एक राउंड फायर किया गया था। दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहली ऐसी लड़ाई थी, जिसमें किसी एक देश ने दुश्मन देश की सेना पर इतनी अधिक बमबारी की थी।

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कारगिल युद्ध
युद्ध के 10 साल बाद फरवरी 2009 में नवाज शरीफ ने खुलासा किया था कि कारगिल पर कब्जा करने की साजिश तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने रची थी। कारगिल में पाकिस्तानी सेना परवेज मुशर्रफ के आदेश पर ही घुसी थी। जबकि परवेज मुशर्रफ का कहना था कि कारगिल में पाकिस्तानी आतंकवादी मौजूद थे।

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कारगिल युद्ध
कारगिल युद्ध में शहीद हुए जवानों की याद में भारतीय सेना ने द्रास में एक पहाड़ी की तलहटी में वार मेमोरियल बनाया। यह शहर से 5 किलोमीटर दूर टाइगर हिल के पार बनाया गया है। मेमोरियल के मुख्य द्वार पर प्रसिद्ध हिन्दी कवि माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा लिखित कविता पुष्प की अभिलाषा अंकित है। मेमोरियल की दीवारों पर शहीद जवानों के नाम लिखे हुए हैं।

 

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कारगिल युद्ध पर 2016 में आई एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि भारतीय वायुसेना के युद्धक विमान का निशाना सही लगता, तो परवेज मुशर्रफ और नवाज शरीफ नहीं बचते। यह घटना 24 जून, 1999 की सुबह करीब 8.45 बजे घटती। दरअसल, ये वो दिन था जब कारगिल की लड़ाई में भारतीय सेना विजय का झंडा लहराने के लिए आगे बढ़ रही थी।

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थल सेना के साथ ही वायुसेना भी पाकिस्तान पर बम बरसाने का काम करने में लगी हुई थी। प्लानिंग के तहत की गई कार्रवाई के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के अग्रिम मोर्चे को धाराशाही करने का फैसला किया और जुगआर लड़ाकू विमान से निशाना साधने की कोशिश की।

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भारतीय सेना के एक जगुआर ने लेजर गाइडेड सिस्टम को तबाह करने के लिए निशाना साधा था। इसके पीछे ही एक और जगुआर भेजा गया, जो ठिकाने को तबाह करने के लिए तैयार था। जगुआर ने प्वाइंट 4388 पर निशाना साधा, पायलट ने एलओसी के पार गुलटेरी को लेजर बॉस्केट में चिह्नित किया, लेकिन बम लेजर बॉस्केट से बाहर गिरा दिया, जिससे पाकिस्तानी ठिकाना बच गया।

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रिपोर्ट के मुताबिक, अगर निशाना सही होता, तो उसमें पाकिस्तान के पूर्व जनरल परवेज मुशर्रफ और नवाज शरीफ भी मारे जा सकते थे। भारतीय वायुसेना इस बात से अनजान थी कि नवाज और मुशर्रफ वहां पर मौजूद थे। बाद में इस बात की पुष्टि हुई कि हमले के समय पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ गुलटेरी ठिकाने पर मौजूद थे।
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गौरतलब है कि कारगिल युद्ध के समय गुलटेरी पाक सेना का अग्रिम सैन्य ठिकाना था, जहां से सैन्य साजो-सामान पहुंचाया जा रहा था। गुलटेरी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में एलओसी से नौ किलोमीटर अंदर है, जो भारत के द्रास सेक्टर के दूसरी तरफ स्थित है। पाकिस्तान मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, 24 जून को नवाज शरीफ परवेज मुशर्रफ के साथ इस सैन्य ठिकाने पर गए थे।
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