रूस, चीन, नेपाल, श्रीलंका की सेनाओं के साथ मिलकर भारतीय सेना व वायुसेना ने युद्ध अभ्यास किया। पूरे नौ दिन चली यह प्रैक्टिस देखिए तस्वीरों में...
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सेना का युद्धाभ्यास
- फोटो : अमर उजाला
पिछले दो सप्ताह में सेना और वायुसेना ने विभिन्न देशों के साथ मिलकर न केवल अपने कौशल को निखारा, बल्कि श्मनों को एक बार फिर अपनी ताकत का अहसास भी करवाया। रूस, चीन, नेपाल, श्रीलंका देशों के साथ मिलकर भारतीय सेनाओं ने ज्वाइंट एक्सरसाइज की। उक्त देशों की सेनाओं के साथ भारतीय सेनाओं का यह संयुक्त अभ्यास हाल ही में संपन्न हुआ है। इन अभ्यास में सेना व वायुसेना की विभिन्न कमानों से जवानों व अफसरों ने भागेदारी की।
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सेना के एक आला अधिकारी ने बताया कि दोनों देशों की सेनाओं ने इसके जरिए अपनी विभिन्न ड्रिल्स को रिफाइन भी किया है। रूसी सेना के साथ भारतीय सेनाओं की ‘इंदरा-2019’ नामक ज्वाइंट एक्सरसाइज 10 दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चली। आर्मी ने इसके अंतर्गत बबीना स्थित सेना की फील्ड फायरिंग रेंज को ज्वाइंट एक्सरसाइज का बेस बनाया। वहीं इंडियन एयरफोर्स ने पुणे में रूसी वायुसेना के साथ और नेवी ने गोवा में संयुक्त अभ्यास किया। आर्मी ने इस दौरान विभिन्न माहौल का परिदृश्य तैयार करके काउंटर टेररिज्म ड्रिल, क्लोज कॉम्बेट प्रैक्टिस (नजदीकी युद्ध अभ्यास), हाउस इंटरवेंशन ड्रिल समेत कई घातक अभ्यास किए। जिसमें टैंकों व युद्ध हेलीकॉप्टरों का भी इस्तेमाल किया गया।
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- फोटो : अमर उजाला
इंडियन एयरफोर्स ने भी रूसी वायुसेना के साथ की प्रैक्टिस में मिग-29 के व जगुआर विमानों का इस्तेमाल किया। कमांडों टीमों से विभिन्न काल्पनिक ऑपरेशंस के तहत अभ्यास किया गया। खास बात यह कि इस दौरान दोनों देशों की सेनाओं ने वीबीएसएस (विजिट, बोर्ड, सर्च एंड सीजर) ऑपरेशन का भी अभ्यास किया। दरअसल, वीबीएसएस टीम दुश्मनों के जहाजों व जलयानों को कैप्चर करने, समुद्री डकैतों, कॉम्बेट टेररिज्म व स्मगलिंग इत्यादि से निपटने जैसे अभियानों पर काम करती है। इसी तरह नेवी ने भी रूस के साथ मिलकर क्रॉस डैक फ्लाइंग ऑपरेशन का अभ्यास किया।
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- फोटो : अमर उजाला
उधर, चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी के साथ 7 से 20 दिसंबर तक चली भारतीय सेना के ‘हैंड-इन-हैंड’ नामक ज्वाइंट एक्सरसाइज का फोकस भी काउंटर टेररिज्म पर ही रहा। यह ऑपरेशन मेघालय के उमराई सैन्य क्षेत्र में संपन्न हुआ। इसी तरह भारतीय सेना के जवानों ने श्रीलंकन आर्मी के साथ ‘कॉर्डन एंड सर्च’ ऑपरेशंस में अपनी कुशलता बढ़ाई, तो वहीं ‘सूर्य किरण’ एक्सरसाइज में इंडियन आर्मी ने नेपाली सेना के साथ काउंटर इंसर्जेंसी ऑपरेशंस और डिजास्टर रिस्पोंस अभियान पर मिलकर काम किया, अपनी ड्रिल्स को और निखारा।
‘एयर वर्जन ब्रह्मोस’ ने भी एयरफोर्स की ताकत बढ़ाई
ब्रह्मोस की एयर वर्जन मिसाइल ने अब इंडियन एयरफोर्स की ताकत और बढ़ा दी है। 17 दिसंबर को इस मिसाइल का तीसरा और अंतिम प्रक्षेपण भी सफलतापूर्ण संपन्न हो चुका है। एयरफोर्स के एक आला अफसर के अनुसार ये मिसाइल वायुसेना के लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेआई में इंस्टाल की गई है, जो हवा से जमीन पर मार करेगी। 2.5 टन की यह सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 300 किलोमीटर तक मार कर सकती है। उनके अनुसार, इससके साथ ही भारतीय वायुसेना दुनिया की पहली ऐसी वायुसेना बन गई है, जिसने इस श्रेणी की जमीन पर मार करने वाली हवा में प्रक्षेपित ट्राइसोनिक मिसाइल सफलतापूर्वक दागी है। दरअसल, इस मिसाइल ने 22 नवंबर 2017 को एक समुद्री लक्ष्य को भेदा था। इसके बाद 22 मई 2019 को जमीन पर स्थित एक लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेदने के लिए इसे प्रक्षेपित किया गया था। 17 दिसंबर को सुखोई-30 विमान पर इस मिसाइल का एकीकरण पूरा हो गया। दिन हो या रात हर मौसम में ये मिसाइल अपना टारगेट भेदने में पूरी तरह सक्षम है।