देश का एक जांबाज एयर मार्शल दुनिया ये विदा हो गया, उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। ये वो शख्स है, जिनका 'चक्रव्यूह' पाकिस्तान भेद नहीं पाया था।
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एयर मार्शल रणधीर
सन् 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। जंग छिड़ चुकी थी। दोनों देशों की आर्मी और एयरफोर्स आमने-सामने थी। इस दौरान एयर मार्शल रणधीर सिंह पंजाब के आदमपुर एयरफोर्स स्टेशन पर बतौर एयर कोमोडोर तैनात थे। आदमपुर एयरबेस युद्ध में भारतीय एयरफोर्स के लड़ाकू विमान मिग-29ए के लिए ऑपरेटिंग बेस था। 1965 की भारत-पाक युद्ध में भी इसी लड़ाकू विमान के लिए ये एक्टिव बेस था।
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एयर मार्शल रणधीर
लिहाजा सन 1971 में भी एयरफोर्स ने युद्ध के दौरान आदमपुर को भी एक्टिव बेस के लिए फिर से चुना गया। पाकिस्तानी जानते थे कि यदि आदमपुर एयरबेस रहा तो इंडियन एयरफोर्स बेहद ताकत केसाथ हमला करेगी और ऐसे में 1971 का युद्ध जीतना उनके लिए आसान नहीं होगा। इसलिए पाकिस्तानी इस एयरबेस को नेस्तानाबूत करना चाहते थे। ऐसे में वहां बतौर कोमोडोर तैनात रणधीर सिंह के लिए इस एयरबेस की सुरक्षा की बड़ी जिम्मेवारी थी।
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एयर मार्शल रणधीर
उन्होंने इस एयरबेस का ऐसा फुल प्रूफ सुरक्षा प्लान तैयार किया, जिसे भेद पाना दुश्मन के लिए नामुमकिन बन गया। उन्होंने कई एजेंट भी पकड़े, जिससे उन्होंने दुश्मन की नापाक प्लानिंग पूरी तरह से फेल कर दी। इस दौरान उनकी मजबूत रणनीति के चलते ही दुश्मन का आक्रामण न केवल फेल रहा, बल्कि एयर मार्शल रणधीर सिंह का उत्साह और उत्कृष्ट नेतृत्व उनके साथियों के लिए मिसाल भी बना। इसके लिए भारत सरकार ने उन्हे परम विशिष्ट सेवा मेडल से नवाजा गया।
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एयर मार्शल रणधीर
...दुनिया से अलविदा हुआ जांबाज मार्शल
एयरफोर्स के इस जांबाज योद्धा एयर मार्शल रणधीर सिंह का विगत दिवस निधन हो गया। बुधवार को चंडीगढ़ के सेक्टर 25 स्थित श्मशान घाट में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका दाह संस्कार किया गया। वे 97 बरस के थे। इस दौरान उनके पुत्र विंग कमांड (रिटायर्ड) प्रदीप सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस अवसर पर एयर वाइस मार्शल एसके झा, एओसी 3 बीआरडी संजीव सिन्हा, 12 विंग एयरफोर्स के स्टेशन कमांडर ग्रुप कैप्टन जीएस माथारू समेत अन्य एयरफोर्स के अफसरों व जवानों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस दौरान जहां उनके कार्यकाल को याद किया गया, वहीं नम आंखों से विदाई दी गई। 21 दिसंबर 1943 को बतौर फ्लाइंग अफसर रणधीर सिंह ने अपनी सेवाएं शुरू की थीं और 30 अप्रैल 1978 को वे बतौर एयर मार्शल रिटायर्ड हुए। जम्मू एवं कश्मीर ऑपरेशन केदौरान उनकी सेवाओं के लिए उन्हें वीर चक्र से नवाजा गया। यूके में कैनबरा विमान पर लड़ाकू नियंत्रण पाठयक्रम और ग्राउंड अटैक कोर्स में भाग लेने व सन 1965 केभारत-पाक युद्ध में अपने बचाव क्षेत्र में शानदार एयर डिफेंस आपरेशन के लिए उन्हे अति विशिष्ट सेवा मेडल से भी नवाजा गया।