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तस्वीरें: वायुसेना के 68 साल पुराने 'शिकारी' को मिलेगा वो हथियार, इधर झपकी पलक उधर दुश्मन ढेर

Wed, 11 Sep 2019 11:01 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़/अंबाला
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भारतीय वायु सेना प्रमुख बीएस धनोआ - फोटो : PTI
भारतीय वायुसेना का 68 साल पुरान शिकारी फिर से जी उठा है और इस बार उसके हाथ में वो हथियार होगा, जिससे वह अपने दुश्मनों को चुन-चुन का मारेगा, देखिए तस्वीरों में।
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वायुसेना की स्क्वाड्रन - फोटो : फाइल फोटो
ये शिकारी कोई और नहीं, बल्कि 68 साल पुरानी स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरो’ है, जिसे फोर्थ जेनरेशन के लड़ाकू राफेल के लिए जिंदा किया गया है। जी हां, वेस्टर्न एयर कमांड की ताकत और बढ़ने वाली है। इस कमांड को चिनूक और अपाचे के बाद जल्द ही राफेल मिल जाएगा, जो न केवल एयरफोर्स की, बल्कि इस महत्पूर्ण एयर कमांड की ताकत को भी और बढ़ा देगा। इंडियन एयरफोर्स राफेल के आगमन की तैयारियों में जुट गई है।
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वायुसेना की स्क्वाड्रन - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन को दुनिया का बेहतरहीन हेलीकॉप्टर चिनूक मिला। पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन को दुनिया के सबसे घातक अपाचे की स्क्वाड्रन मिली है। अब दुनिया के सबसे घातक लड़ाकू विमान राफेल की स्क्वाड्रन अंबाला एयरफोर्स स्टेशन को मिलेगी। विमान की जिम्मेवारी जिस स्क्वाड्रन को दी जा रही है, उस खत्म कर दिया गया था। मगर अब 68 साल पुरानी इस ‘गोल्डन एरो’17 स्कवॉड्रन को राफेल के लिए फिर से जिंदा किया गया है।

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एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ
अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में आयोजित एक कार्यक्रम ‘रेसुररेक्शन सेरेमनी’ के तहत वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने इस स्क्वाड्रन को औपचारिक रूप से पुनर्जीवित किया गया। बताया जा रहा है कि भारत को पहला राफेल विमान विजयदशमी के दिन 8 अक्तूबर को मिलेगा। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह इस लड़ाकू विमान की डिलीवरी लेने अगले महीने खुद फ्रांस जाएंगे। संयोग से 8 अक्तूबर को ही भारतीय वायुसेना का स्थापना दिवस भी है।
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भारतीय वायु सेना प्रमुख बीएस धनोआ - फोटो : PTI
अंबाला एयरफोर्स स्टेशन उतर भारत का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण एयरफोर्स स्टेशन है। मौजूदा हालातों और पड़ोसी देश पाकिस्तान से चल रहे तल्ख संबंधों के चलते इंडियन एयरफोर्स का फोकस इस वक्त वेस्टर्न एयर कमांड को ज्यादा से ज्यादा ताकतवर बनाने की ओर है। इस कमांड पर उत्तर भारत में देश की हवाई सीमाओं की सुरक्षित रखने की अहम जिम्मेदारी है। यहीं से एयरफोर्स न केवल पाकिस्तान पर, बल्कि चीन पर भी तीखी नजर रखती है।
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Air Chief Marshal BS Dhanoa - फोटो : ANI
बता दें कि 17 नंबर स्क्वाड्रन में पहले मिग 21 (टाइप-96) फाइटर जेट था, जो बठिंडा में तैनात था। अब इस स्क्वाड्रन के सभी मिग 21 रिटायर हो चुके हैं। इसलिए इस स्क्वाड्रन में अब राफेल को शामिल किया जा रहा है। 1 अक्तूबर 1951 को अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में 17 स्क्वाड्रन का गठन किया गया था। फ्लाइट लेफ्टिनेंट डीएल स्प्रिनगेट को इसकी कमांड सौंपी गई। स्क्वाड्रन को नार्थ अमेरिका के विमान ‘हावर्ड-टू बी’ से लैस किया गया।
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वायुसेना प्रमुख के साथ अभिनंदन - फोटो : PTI
नवंबर 1955 में इस स्क्वाड्रन को कनवर्ट कर दिया गया और इसे ब्रिटिश जैट फाइटर ‘डी हैविलैंड वैंपायर’ से लैस किया गया। सन 1957 में इस स्क्वाड्रन को ‘हॉकर हंटर’ विमान मिला और स्क्वाड्रन को गोल्डन एरो का नाम दिया गया। सन 1975 में इस स्क्वाड्रन को मिग-21 एम लड़ाकू जहाज मिल गया। इसके अलावा इस स्क्वाड्रन ने दिसंबर 1961 में गोवा लिब्रेशन अभियान, सन 1965 व 1971 में भारत-पाक युद्ध व रैकी मिशन में अहम भूमिका निभाई।
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Air Chief Marshal BS Dhanoa
इस दौरान कमांड की जिम्मेवारी विंग कमांडर एन चतरथ के पास थी। स्कॉवड्र्रन को कई बहादुरी पुरस्कार भी मिले। नंवबर 1988 में तत्कालीन राष्ट्रपति आर. वेकेंटरमन ने भी इस स्क्वाड्रन को कलर प्रेजेंटेशन दिया। तत्कालीन विंग कमांडर बीएस धनोआ की कमांड में इस स्क्वाड्रन ने करगिल युद्ध में ऑपरेशन ‘सफेद सागर’ में भी सफल हिस्सा लिया। अब इस स्क्वाड्रन को फोर्थ जेनरेशन के विमान राफेल की जिम्मेवारी देने की तैयारी की जा रही है।
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