कुलभूषण जाधव को लेकर देश गुस्से में है। अगर पाकिस्तान में जाधव को फांसी हुई तो इसे हत्या माना जाएगा, लेकिन भारत के ये कदम पाकिस्तान को पस्त कर सकते हैं।
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पंजाब के पूर्व मंत्री डॉ. हरबंस लाल
- फोटो : File Photo
पंजाब के पूर्व मंत्री डॉ. हरबंस लाल ने कहा है कि भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में सुनाई मौत की सजा के बाद भारत और पाकिस्तान में तनाव बढ़ गया है, वहीं यह मसला अलग-अलग सूबे में भी गर्मा रहा है। डॉ. लाल ने कहा कि सरकार को जाधव को बचाने के लिए आगे आना चाहिए।
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पंजाब के पूर्व मंत्री डॉ. हरबंस लाल
डॉ. लाल ने कहा कि अगर पाकिस्तान जाधव को फांसी देता है, तो इसको सोचा समझा कत्ल कहा जाएगा, और यह सरकार की बड़ी कमजोरी होगी। सरकार को पाकिस्तान के इस बेनकाब हुए चेहरे को समझते हुए, पाक को कड़ा जवाब देने की जरूरत है।
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कुलभूषण जाधव
जाधव के मामले में भारत के उच्चायोग ने 13 बार काउंसिलर एक्सेस की कोशिश की लेकिन पाकिस्तान ने ऐसा करने नहीं दिया। ये वियना कंवेन्शन का उल्लंघन है। भारत इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय तक जा सकता है। कुलभूषण की फांसी की सजा पर मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी कड़ी प्रतिक्रिया जताई थी। एमनेस्टी ने कहा है कि जाधव को मौत की सजा देकर पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मानकों का माखौल उड़ाया है।
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एस जयशंकर भारत के विदेश सचिव
कुलभूषण जाधव मामले पर भारत सरकार हर कीमत पर पाकिस्तान पर दबाव बनाएगी। जाधव को सजा सुनाए जाने के 12 घंटे के अंदर भारत ने 12 पाकिस्तानी कैदियों की रिहाई रोक दी। देश में गुस्से के मूड को समझते हुए सरकार ने ये कदम उठाया, एक दर्जन पाकिस्तानी कैदियों की जेल की सजा पूरी होने के बाद रिहाई होने वाली थी।
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नवाज़ शरीफ, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री
- फोटो : File Photo
हाल में अमेरिका ने भारत-पाकिस्तान के बीच वार्ता को फिर से शुरू कराने की बात कही तो भारत ने किसी मध्यस्थता की संभावना को सीधे खारिज कर दिया लेकिन पाकिस्तान ने तुरंत इसे लपक लिया. इससे साफ दिखता है कि पाकिस्तान बातचीत को कितना आतुर है. लेकिन अब जाधव मामले को लेकर भारत भविष्य में बातचीत की किसी संभावना को सिरे से खारिज कर सकता है. इससे पाकिस्तान को करारा झटका लगेगा।
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नवाज शरीफ
- फोटो : Getty Images
जाधव मामले को लेकर भारत फिर पाकिस्तान के खिलाफ सख्त हो सकता है। इसके लिए सार्क जैसे मंचों पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की रणनीति अपनाई जा सकती है. उरी हमले के बाद भी भारत ने इस्लामाबाद में सार्क बैठक का बहिष्कार किया था और बाकी सदस्य भी हट गए थे।
भारत से बहने वाली सिंधु नदी पाकिस्तान को हमेशा से बेचैन करती रही है। पाकिस्तान को डर है कि कहीं भारत से सिंधु जल समझौता टूट न जाये, अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान प्यास से मर जायेगा।