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देश को मिल गया एक और 'सिक्सर किंग', कई बातों में बिल्कुल युवराज सिंह जैसा है

Tue, 21 Feb 2017 09:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा)
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मोहित अहलावत
युवराज सिंह को दुनिया जानती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश को एक और 'सिक्सर किंग' मिल गया है, जो कई बातों से बिल्कुल युवी जैसा है। जानिए कौन है ये?
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मोहित अहलावत
हम बात कर रहे हैं, हाल ही में टी20 मैंच में 300 रन बनाकर सुर्खियों में आए मोहित अहलावत की। मोहित ने इस मैच में 17 गेंदों में फिफ्टी बनाई। युवराज इंग्लैंड के खिलाफ महज 12 गेंद में अर्धशतक लगा चुके हैं। एक ओवर में सबसे ज्यादा 36 रन युवी के नाम, मोहित ने 34 रन बनाये। मोहित ने एक ही ओवर में लगातार 5 छक्के लगाए, जबकि युवी 6 छक्के लगा चुके हैं। पूरी तरह न सही, लेकिन है न बिल्कुल युवराज सिंह जैसा।
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मोहित अहलावत - फोटो : Facebook
पर क्या आप जानते हैं कि मोहित ने जिस मैदान पर यह कारनामा कर दिखाया वह इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंट से काफी छोटा है। यही कारण है कि वे इतने रन बनाने में कामयाब रहे। इस मैदान की बाउंड्री सिर्फ 40 गज की थी जो कि अंतरराष्ट्रीय मैदान से छोटी है। औसतन अंतरराष्ट्रीय मैदान की बाउंड्री की लंबाई लगभग 65 से 70 गज की होती है। मैदान में इनर सर्किल 30 गज का होता है, जिसमें पावरप्ले के हिसाब से 4 या 5 खिलाड़ी होते हैं।

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मोहित अहलावत
मोहित का परिवार मूलत: पानीपत के गांव बबैल गांव का रहने वाला है। पिता पवन अहलावत टेम्पो चलाते हैं। मां एक छोटे स्कूल में टीचर हैं। मोहित ने क्रिकेट को तीन साल पहले ही गंभीरता से लेना शुरू किया था। प्रदर्शन इतना शानदार रहा कि उन्हें बड़ी लीग के लिए चुना जाने लगा। मोहित अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने पिता पवन अहलावत को देते हैं।
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मोहित अहलावत - फोटो : Facebook
मोहित के पिता पवन अहलावत ने बताया कि उन्हें क्रिकेट खेलने का जुनून था। स्कूल स्टेट क्रिकेट प्रतियोगिता में विकेट कीपर व बल्लेबाजी में बेहतरीन प्रदर्शन किया। बाद में घर की आर्थिक स्थित कमजोर होने के कारण दसवीं के बाद पढ़ाई व क्रिकेट छोड़ना पड़ा। परिवार चलाने के लिए टेंपो चलाने लगे। शौकिया तौर पर क्रिकेट जारी रखा। बेटे मोहित को भी मैदान में साथ ले जाते थे। मोहित ने इच्छा जताई कि वह भी विकेटकीपर और बल्लेबाज बनना चाहता है।
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मोहित अहलावत - फोटो : Facebook
पवन बताते हैं कि सैंट मैरी स्कूल में मोहित का दाखिला कराया तो उसका पढ़ाई में कम, क्रिकेट में ज्यादा मन लगता था। शिक्षक ने कह दिया था कि यह पढ़ाई में अच्छा नहीं है, इसे तो क्रिकेटर बना दीजिए। उन्होंने मोहित में अपना अक्स देखा और दसवीं के बाद मोहित को 2012 में बहादुरगढ़ बालाजी क्रिकेट एकेडमी में छोड़ दिया। वहां मोहित को खेलते देख क्रिकेटर गौतम गंभीर के कोच संजय भारद्वाज प्रभावित हुए और वे उसे दिल्ली के लाल बहादुर क्रिकेट अकादमी ले गए।
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टी-20 में 300 रन ठोकने वाला मोहित
पवन ने बताया कि उनके दोस्त बबैल के रविंद्र ने फोन कर बताया कि मोहित ने बड़ी पारी खेली है। उन्होंने मोहित को फोन किया तो वह बोला कि मैं ठीक खेला हूं। पापा मैंने कर दिखाया है। अब रणजी में अच्छा खेलकर टीम इंडिया में जगह बनानी है। मोहित अहलावत दिल्ली की ओर से तीन रणजी खेल चुके हैं। मोहित का रणजी के लिए ऋषभ पंत से चयन हो गया था। तीन मैच भी खेले, लेकिन चल नहीं पाया। सफलता के लिए भाग्य के साथ मेहनत बहुत जरूरी है।

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टी-20 में 300 रन ठोकने वाला मोहित
पवन अहलावत ने बताया कि क्रिकेट के लिए उनके बेटे मोहित ने नेवी की नौकरी छोड़ दी थी। भविष्य को देखते हुए एक बार उसने नौकरी जॉइन करवाने का मन बना लिया था, लेकिन फिर क्रिकेट में ही सपना पूरा करने की ठानी और नेवी की नौकरी का ऑफर ठुकरा दिया। पवन ने बताया कि तीन महीने पहले काउंटी क्रिकेट खेलने के लिए इंग्लैंड से ऑफर आया था। अभी मोहित इस पर विचार कर रहा है।
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पवन बताते हैं कि मोहित ने सैंट मैरी स्कूल से 10वीं की पढ़ाई की है। इसके बाद 2011 में बहादुरगढ़ की बालाजी क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन कर ली। वहां मोहित को खेलते देख क्रिकेटर गौतम गंभीर के कोच संजय भारद्वाज प्रभावित हुए और वे उसे दिल्ली के लाल बहादुर क्रिकेट एकेडमी ले गए। वहीं प्रैक्टिस करते-करते मोहित का सिलेक्शन दिल्ली की रणजी टीम में हुआ।
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