ड्रग्स डीलर्स से कनेक्शन रखने के आरोप में पुलिस के 'स्टार' इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी के बाद उसके इंद्र 'जाल' से राज खुलना शुरु हो गए हैं, जिससे कई अधिकारियों की नींद उड़ गई है।
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हथियार, ड्रग मनी और हेरोइन के साथ गिरफ्तार इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह की बेनामी संपत्ति जानने के लिए एसटीएफ की टीम बुधवार को उसके घर सुबह दबिश दी। साढ़े चार घंटे तक चले सर्च अभियान में एसटीएफ ने इंस्पेक्टर के घर से सीसीटीवी फुटेज के साथ-साथ कंप्यूटर की हार्ड डिस्क के साथ-साथ कई दस्तावेजों को काले रंग के बैग में भरकर ले गई। इस दौरान इंस्पेक्टर इंद्रजीत गुमसुम ही रहा।
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चाटी विंड स्थित इंस्पेक्टर की आलीशान कोठी में एसटीएफ के अधिकारियों को ड्रग मनी मिलने की संभावना थी। सर्च अभियान में फिलहाल क्या-क्या मिला, इसकी जानकारी एसटीएफ ने नहीं दी। वहीं सूत्रों की माने तो इंस्पेक्टर की ड्रग मनी को लेकर कुछ और ठिकानों पर छापामारी की जानी है। एसटीएफ बतौर इंस्पेक्टर कार्यकाल में किन-किन अधिकारियों से उसकी नजदीकियां रहीं हैं, वह रिकार्ड भी खंगाल रही है।
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इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह के राज उसकी गिरफ्तारी के बाद खुलने लगे हैं। कई ऐसे चेहरे सामने आ रहे हैं जो इंस्पेक्टर पर डरा धमका कर पैसा लेने की बात करने लगे हैं। फतेह सिंह कालोनी निवासी अश्वनी कुमार कहते हैं कि 2003 में इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह सीआईए में सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत थे। इंस्पेक्टर ने झूठा चोरी के समान बेचने का मामला दर्ज करके उन्हें थर्ड डिग्री टार्चर किया। 25 हजार रुपये लेकर छोड़ा।
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Inderjeet singh arrested
इस मामले में उनकी शिकायत पर एफआईआर नंबर 95 इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह व कांस्टेबल गुरविंदर सिंह के खिलाफ दर्ज किया गया। इंस्पेक्टर की ऊंची पहुंच के आगे मामला अभी भी कागजों में दफन है।
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Inderjeet singh arrested
खुद को बताता था डीजीपी का खासमखास
इंस्पेक्टर खुद को डीजीपी का खासमखास बताया करता था। उसका सीआईए में इतना खास रोल था कि उसके मामले में वरिष्ठ अधिकारी भी कुछ बोलने से कतराते थे। बीएसएफ के कई जवानों को हेरोइन तस्करी में गिरफ्तार करने वाला इंस्पेक्टर खुद हेरोइन तस्कर कैसे बना इसी बात को लेकर एसटीएफ तार से तार जोड़ रही है। वहीं स्थानीय पुलिस के साथ-साथ खुफिया एजेंसियों ने इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह के खिलाफ जांच शुरू कर दी है।
इंद्रजीत की कोठी सील है। परिवार के लोग भूमिगत हो चुके हैं। वहीं आस पड़ोस वाले हैरान हैं कि इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह कानून का सिपाही बनकर काम करने की बातें किया करता था, वह हेरोइन तस्करों के साथ हाथ मिलाकर खुद कैसे स्मगलर बन गया। सबसे चौंकाने वाली बात है कि बीते दस वर्ष में इंस्पेक्टर अमृतसर, जालंधर, के आसपास ही पोस्टिंग रही। कई बार उसके खिलाफ शिकायतें पुलिस के बड़े अधिकारियों को दी जाती रही। किसी भी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।