आइए आपको मिलाते हैं, करनाल और चंडीगढ़ के उन जांबाज युवाओं से, जो अंतिम बाधा पार कर भारतीय सेनाओं का हिस्सा बन गए। जानिए, संघर्ष की कहानी।
विज्ञापन
मिलिए, उन जांबाज युवाओं से, जो भारतीय सेना में बने लेफ्टिनेंट
2 of 7
उत्तराखंड के देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) की पासिंग आउट परेड में करनाल के टैगोर बाल निकेतन स्कूल के पूर्व छात्र पंकज सिंह भी परेड पास आउट कर भारतीय सेना का हिस्सा बने। उनकी इस उपलब्धि पर परिजनों के साथ-साथ विद्यालय और जिले में खुशी मनाई गई।
विज्ञापन
मिलिए, उन जांबाज युवाओं से, जो भारतीय सेना में बने लेफ्टिनेंट
3 of 7
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. राजन लांबा ने कहा कि हमें अपने छात्र पर नाज है। उसे भारतीय सेना की जो जिम्मेवारी मिली है वह उसे बखूबी निभाएगा। उन्होंने बताया कि पंकज सिंह की इस उपलब्धि पर विद्यालय स्टाफ में खुशी की लहर है।
मिलिए, उन जांबाज युवाओं से, जो भारतीय सेना में बने लेफ्टिनेंट
4 of 7
डॉ. राजन लांबा ने कहा कि पंकज की उपलब्धि से सीख लेकर अन्य विद्यार्थी भी इसी तरह मेहनत करके विद्यालय का गौरव बढ़ाएंगे। विद्यालय के पूर्व छात्र लेफ्टिनेंट पंकज की इस उपलब्धि पर विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. लांबा ने लेफ्टिनेंट के पिता अजमेर सिंह और माता सरोज बाला को बधाई दी।
विज्ञापन
मिलिए, उन जांबाज युवाओं से, जो भारतीय सेना में बने लेफ्टिनेंट
5 of 7
चंडीगढ़ के सेक्टर-43 निवासी हर्षित कोहली ने कंप्यूटर साइंस में बीई किया है। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सेना की राह चुनी। सीडीएस के जरिए भारतीय सैन्य अकादमी में एंट्री पाई। हर्षित के पिता राजकुमार कोहली सरकारी बैंक में नौकरी करते हैं, जबकि मां ललिता कोहली शिक्षिका हैं।
विज्ञापन
मिलिए, उन जांबाज युवाओं से, जो भारतीय सेना में बने लेफ्टिनेंट
6 of 7
चंडीगढ़ के कीरत ननुआ इंडियन मिलेट्री अकादमी देहरादून से रेगुलर कोर्स के बाद भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गए। कीरत अपने परिवार से फौज में भरती होने वालों में चौथी पीढ़ी से हैं। उनके पिता कर्नल डीएस ननुआ और माता प्रीतइंदर कौर ने इस पर खुशी जताई।
मिलिए, उन जांबाज युवाओं से, जो भारतीय सेना में बने लेफ्टिनेंट
7 of 7
वहीं, सेना से बतौर कैप्टन रिटायर्ड दादा अतर सिंह और एयरफोर्स से रिटायर्ड पिता रामबीर सिंह पंघल के बेटे नवनीत ने लेफ्टिनेंट बन परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाया है। उनके दादा ने तीन दशक तक सेना में रहकर देश की सेवा की। वह 1962 और 1971 की लड़ाई में शामिल रहे हैं।