जोशीमठ भू-धंसाव
- फोटो : अमर उजाला
जोशीमठ शहर में इमारतों के लिए 7.5 से 10 सेमी विस्थापन के बीच की भविष्यवाणी की गई थी, जो इमारतों में बड़े पैमाने पर दरारें पैदा करने के लिए पर्याप्त है। संस्थान ने कहा कि पिछले दिनों कुछ ऐसी ही तस्वीर जोशीमठ में सामने आई है। अध्ययन 16 अप्रैल, 2021 को लखनऊ में आयोजित एक सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया था, जिसके लिए डॉ. त्रिपाठी को ''बेस्ट पेपर अवार्ड'' से सम्मानित किया गया था। हालांकि इस अध्ययन को क्षेत्र के कई विशेषज्ञों ने एक धोखा और संभावित रूप से लोगों में भय पैदा करने वाला करार दिया था।