देखिए देश में एक ऐसा गांव, जहां 10वीं के बाद बेटियां पढ़ाई छोड़ देती हैं और ऐसा करने के पीछे की वजह काफी शर्मनाक है।
विज्ञापन
2 of 9
लड़कियां छोड़ रही स्कूल
हरियाणा के हिसार से महज 22 किलोमीटर की दूरी पर बसा है बालसमंद का गांव सीसवाला। करीब 950 घरों वाले इस गांव की 150 से अधिक बेटियां दसवीं के बाद भी पढ़ना चाहती हैं। उनके मां बाप भी पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन 12वीं तक का स्कूल गांव से 6 और 10 किलोमीटर दूर है। वहां तक आने-जाने का साधन नहीं है इस कारण लोग बेटियों की पढ़ाई दसवीं के बाद छुड़ा देते हैं।
विज्ञापन
3 of 9
लड़कियां छोड़ रही स्कूल
बेटियां घर बैठ जाती और चौका-चूल्हा में जिंदगी खफा देती हैं। बताते हैं कि गांव के स्कूल को 13 साल से अपग्रेड करने की मांग की जा रही है, लेकिन आज तक सुनवाई नहीं हुई। इतने वर्षों में न जाने कितनी बेटियों की पढ़ने की ख्वाहिश दम तोड़ चुकी है। बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ का नारा देने वाले सरकार के सीएम मनोहर लाल खट्टर से स्कूल को अपग्रेड करने की मांग की तो उन्होंने साफ मना कर दिया।
4 of 9
लड़कियां छोड़ रही स्कूल
गांव वाले कहते हैं कि गांव की हर बेटी पढ़ना चाहती है, लेकिन गांव में 50 फीसदी बेटियां दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ देती हैं। क्षेत्र के सबसे पुराने स्कूल राजकीय उच्च विद्यालय की साल 1952 में भजनलाल ने नींव रखी थी। साल 1954 में पांचवीं का स्कूल बना और साल 1982 में 10वीं तक हो गया। इसके बाद इस स्कूल को 12वीं तक अपग्रेड करने की मांग ग्रामीण कर रहे हैं। पिछले दो वर्षों से ग्रामीण आंदोलन भी कर रहे हैं।
विज्ञापन
5 of 9
लड़कियां छोड़ रही स्कूल
इस बीच प्रदेश सरकार ने 122 स्कूलों को अपग्रेड करने का फैसला किया लेकिन सीसवाल उसमें शामिल नहीं हो सका। सीसवाला के स्कूल में 400 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, इसमें 350 छात्राएं हैं। सबसे नजदीकी गांव किरतान करीब छह किलोमीटर दूर है। यह स्कूल 12वीं तक है। इस गांव का लिंक रोड है और बस व्यवस्था गांव से नहीं है।
विज्ञापन
6 of 9
लड़कियां छोड़ रही स्कूल
वहीं, आर्य नगर गांव से 10 किलोमीटर की दूरी पर है। आर्य नगर के लिए भी कोई बस व्यवस्था नहीं है। निजी वाहनों से छात्राओं को आना-जाना पड़ता है। इसलिए गांव की मुश्किल से एक या दो छात्राएं ही इस स्कूल में दाखिला ले पाती हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि उनकी बेटियां पढ़ाई करें, लेकिन ग्रामीण गांव के स्कूल में पढ़ाई कराना चाहते हैं।
विज्ञापन
7 of 9
लड़कियां छोड़ रही स्कूल
तीन बेटियों के पिता भूप सिंह और उनकी पत्नी कृष्णा देवी का कहना है रोटी का जुगाड़ ही मुश्किल से हो पाता है। हम चाहते हैं कि बेटियां पढ़ाई करें, लेकिन उन्हें पैदल पास के गांव नहीं भेज सकते। आमदनी इतनी नहीं है कि अपने खर्चे पर बेटियों को निजी साधनों से पढ़ने के लिए भेज सकें। मजबूरन 10वीं पास कर चुकी बेटी की पढ़ाई छुड़वा दी।
8 of 9
लड़कियां छोड़ रही स्कूल
प्रधानमंत्री को लिख चुके हैं पत्र
सरपंच राजपाल मांडिया का कहना है कि जिला प्रशासन से लेकर प्रधानमंत्री तक से स्कूल अपग्रेड करने की मांग कर चुके हैं, लेकिन किसी ने भी बेटियों के समर्थन में संज्ञान नहीं लिया। अब ग्रामीण सरकार से लेकर प्रधानमंत्री और विधायक को पत्र लिखकर अपनी मांग उठाएंगे। गांव में लड़कों और लड़कियों के लिए दो सरकारी स्कूल हैं, जिसमें चार एकड़ जमीन है और कमरों की संख्या पूरी है।
ग्रामीण बोले, सीएम ने किया निराश
सीसवाला गांव के कन्या उच्च विद्यालय को अपग्रेड करने की मांग पिछले दिनों ग्राम पंचायत ने हिसार एयरपोर्ट पर सीएम से की थी। सीएम ने साफ शब्दों में कहा था कि स्कूल को किसी भी सूरत में अपग्रेड नहीं किया जा सकता। सीसवाला गांव की करीब छह हजार की आबादी हैं। इसमें 950 घर हैं। ग्रामीणों के अनुसार अगर स्कूल अपग्रेड होता है तो 125 से अधिक लड़कियां गांव की 60 से अधिक बहू पढ़ने को तैयार हैं।