डॉक्टरों की टीम
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चार जनवरी को उन्हें दाखिल किया और आठ जनवरी को मात्र आधे घंटे में सर्जरी कर दी गई। सर्जरी की टीम में प्रोफेसर विजय गोनी, डॉ. तनवीर समारा, डॉ. दीपक, डॉ. करन, डॉ. प्रदीप और डॉ. सुमित शामिल रहे। डॉ. गोनी ने बताया कि फ्रैक्चर होने से पहले जिस तरह बुजुर्ग महिला चल रही थीं, सर्जरी के बाद ठीक वैसे चल रही हैं। फ्रैक्चर होने के बाद वह बेड पर आ गई थीं। बिल्कुल भी चल नहीं पा रही थी।
मरीज का दोनों तरह से रिस्क था
डॉ. गोनी ने बताया कि मरीज को दोनों तरफ से रिस्क था। यदि वह सर्जरी नहीं कराती तो उन्हें बेडशोर, रक्त संचार में रुकावट और हार्ट ब्लॉक हो सकता था। सर्जरी के दौरान भी रिस्क था। इतनी उम्र में मरीज को एनेस्थीसिया देना, सर्जरी करना, सर्जरी के दौरान रिस्क रहता है। कूल्हा प्रत्यारोपण के साथ सीमेंट का इस्तेमाल होता है, इसका एक रिस्क है। इसलिए मरीज को दोनों तरह से रिस्क था।