खेल रत्न के लिए खिलाड़ियों के नाम तय होते ही हरियाणा के साथ एक नया इतिहास जुड़ गया। यह इतिहास खिलाड़ियों के कारण ही जुड़ा है, क्योंकि आबादी में छोटा प्रदेश होने के बावजूद यहां सबसे ज्यादा 8 खेल रत्न होंगे। जहां 2019 तक महाराष्ट्र और हरियाणा में बराबर 6-6 खिलाड़ियों को खेल रत्न मिला हुआ था। वहीं अब खिलाड़ियों के नाम तय होने पर हरियाणा में सबसे ज्यादा 8 तो महाराष्ट्र में 7 खेल रत्न होंगे।
खिलाड़ियों के पिछले चार साल के प्रदर्शन के आधार पर राजीव गांधी खेल रत्न देने की शुरूआत 1991-92 में हुई थी और सबसे पहले शतरंज में तमिलनाडु के विश्वनाथन आनंद को खेल रत्न मिला था। 2001 तक केवल एक ही खिलाड़ी को राजीव गांधी खेल रत्न दिया जाता था लेकिन 2002 में पहली बार केएम बेनामल व अंजलि भगत को खेल रत्न दिया गया। हरियाणा के हिस्से में सबसे पहला खेल रत्न 2009 में आया, जब बॉक्सर विजेंद्र सिंह को ओलंपिक मेडल जीतने पर खेल रत्न दिया गया।
देश की 1.9 प्रतिशत आबादी, खेल रत्न में 18 प्रतिशत हिस्सा होगा
देश में अभी तक 38 खिलाड़ियों को खेल रत्न मिल चुका है और जिस तरह से अब 5 खेल रत्न देने का फैसला हुआ है, उससे देश में 43 खिलाड़ी खेल रत्न हो जाएंगे। जिनमें सबसे ज्यादा हरियाणा के 8 खेल रत्न होंगे तो महाराष्ट्र के सात खेल रत्न हो जाएंगे। इस तरह से जहां देश में हरियाणा की 1.9 प्रतिशत आबादी है, वहीं खेल रत्न में हरियाणा की 18 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। इनके अलावा दिल्ली में 4 खेल रत्न होंगे तो पंजाब, मणिपुर, आंध्र प्रदेश में तीन-तीन खिलाड़ी खेल रत्न है।
इनको मिल चुका खेल रत्न
- वर्ष खिलाड़ी
- 2009 विजेंद्र सिंह
- 2012 योगेश्वर दत्त
- 2016 साक्षी मलिक
- 2017 सरदारा सिंह
- 2019 दीपा मलिक
- 2019 बजरंग पूनिया
नोट: इस साल के लिए विनेश फौगाट व रानी रामपाल का नाम तय हुआ है।