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अमरप्रीत की जिंदादिली देखिए, पैरों से ही हाथ जैसा साथ

Thu, 16 Jul 2015 08:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहगढ़ साहिब
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जिंदादिली और बहादुरी की बेहतरीन मिसाल देखनी है तो अमरप्रीत सिंह से मिलिए। इनके पैर नहीं है, फिर भी ये मोहताज नहीं हैं। सपने बड़े हैं और उन्हें पूरा करने की हसरतें भी जवां है। देखिए, इन्हें। रिपोर्ट: लखवीर सिंह लक्की
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मंडी गोबिंदगढ़ के गरीब परिवार में जन्मा अमरप्रीत सिंह सैरेब्रल पल्सी बीमारी से पीड़ित है। अमरप्रीत की टांगें और बाजु काम नहीं करती। जन्म के दो दिन बाद उसे पीलिया की बीमारी ने घेर लिया जिस कारण उसका शरीर और कमजोर हो गया और उसे बोलने में भी दिक्कत आने लगी। अब अमरप्रीत पैरों से लिख लेता है और पेंटिंग भी कर लेता है। 20 साल की उम्र में अमरप्रीत ने सरकारी हाई स्कूल डडहेड़ी मंडी गोबिंदगढ़ में आठवीं में दाखिला लिया है।
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अमरप्रीत की मां परमिंदर कौर ने बताया कि जन्म के समय अमरप्रीत बिल्कुल नहीं रोया था। अमरप्रीत के हाथ बिल्कुल काम न करने पर उसने पैरों से लिखना सीख लिया। वह अध्यापक बनना चाहता है। वह सिर्फ अमरप्रीत को खाना खिलातीं हैं जबकि नहाने सहित अन्य सभी काम वह खुद करता है। वह अपनी क्लास में मॉनीटर भी रह चुका है। अमरप्रीत खुद स्कूल जाता है और अपने बांये पैर से लिखता है। वह पैरों से मोबाईल में मैसेज भी टाइप कर लेता है।

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परमिंदर कौर ने बताया कि अमरप्रीत ने अपने पैरों से ड्राइंग तैयार करके दिसंबर 2010 को फतेहगढ़ साहिब में स्पेशल बच्चों के प्रदेश स्तरीय मुकाबलों में पहला स्थान हासिल किया था। अमरप्रीत ने 2013 का एक कैलेंडर भी तैयार किया, जिसमें उसने छुट्टियां भी अलग रंग से दिखाई। जिला स्पेशल एजुकेटर परमजीत कौर ने बताया कि अमरप्रीत को सर्व शिक्षा अभियान के तहत मुफ्त शिक्षा देने के साथ-साथ किताबें, वर्दी, ट्राई साइकिल मुहैया करवाने के अलावा फिजियोथैरपी भी करवाई जाती है।
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इसके अलावा उसे अंगहीनता पेंशन और बस और रेलवे में मुफ्त सफर पास भी बनवा कर दिया गया है। शिक्षा विभाग की स्पेशल टीचर चरनजीत कौर ने बताया कि सर्वशिक्षा अभियान के अधीन आईईडी कम्पोनेंट के अंतर्गत खोले गए रिसोर्स सेंटर में विभाग की फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. मनिंदर कौर ने जब अमरप्रीत का इलाज किया तो उसके शरीर का अकड़पन धीरे-धीरे दूर होता गया।
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