जीएसटी लागू होने के बाद ऐसी सच्चाई सामने आई है, जानकर प्रधानमंत्री मोदी कहेंगे कि ये क्या हो रहा है और फिर कइयों पर गाज गिरेगी, जानिए माजरा।
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दरअसल, हरियाणा में जीएसटी की अधिक टैक्स दरों से नाराज चल रहे लगभग 49 हजार डीलर्स ने अपना पंजीकरण नहीं कराया है। ये डीलर वैट के तहत पंजीकृत हैं, इसलिए आबकारी एवं कराधान विभाग की चिंताएं बढ़ गई हैं। चूंकि, प्लाईवुड और कपड़ा व्यापारी अधिक टैक्स दरों का शुरू से विरोध करते आ रहे हैं। सरकार के लिए इन्हें जीएसटी के तहत पंजीकृत करना किसी चुनौती से कम नजर नहीं आ रहा।
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आबकारी एवं कराधान विभाग ने अब ईटीओ को ये ड्यूटी सौंपी है कि वे सभी डीलरों को वैट से माइग्रेट करजीएसटी के तहत पंजीकृत करवाएं। हरियाणा में वैट के तहत पंजीकृत सभी डीलरों के कुल 255408 पैन वैध हैं। अभी तक 206553 ने स्वयं जीएसटी के तहत अपना नाम दर्ज कर नामांकन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। बाकी ने जीएसटी आरईजी-26 फार्म हस्ताक्षर और प्रमाणित करआवेदन जमा नहीं किए हैं।
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आबकारी एवं कराधान विभाग के उच्च अधिकारियों के अनुसार कानून के तहत सफलतापूर्वक नामांकन करने के लिए तीन महीनों की अवधि होती है, लेकिन विभाग कम से कम समय में सभी का पंजीकरण जीएसटी के तहत कराना चाहता है। 206553 डीलरों में से 163039 ने इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणीकरण कोड के माध्यम से जीएसटी आरईजी-26 फार्म प्रमाणित कर जमा किया है।
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- फोटो : अमर उजाला
सक्षम अधिकारी के लिए 15 दिनों की अवधि के भीतर डीलरों की ओर से प्रस्तुत आवेदन को प्रमाणित करना जरूरी है। असफल रहने पर पंजीकरण को स्वीकृत मान लिया जाएगा। यदि कोई कर चोरी करता है या जीएसटी कानून की पालना नहीं करता है, तो जीएसटी कानून के प्रावधानों के अनुसार उनके विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि वैध पैन कार्ड रखने वाले वैट में पंजीकृत 48 हजार से अधिक डीलरों ने अब तक आवेदन नहीं किया है, इनमें से 11880 डीलर ऐसे हैं, जिन्होंने वर्ष 2016-17 के दौरान 20 लाख से अधिक का कारोबार किया है। इनकी सूची प्रत्येक जिले को भेजी जा रही है। ईटीओ अपने क्षेत्र अनुसार इनके पंजीकरण की प्रक्रिया तत्काल शुरू कराएंगे।