सेना में परिवार की 5वी पीढ़ी और उनमें से तीसरी शहादत। जम्मू के हंदवाड़ा में तीन आतंकियों को ढेर करके सतीश कुमार शहीद हो गए। तस्वीरों में पूरी कहानी। रिपोर्टः हनी सोनी, चरखी दादरी (भिवानी)
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सेना में 5वीं पीढ़ी से तीसरी शहादत, जम्मू में बेटा शहीद
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हरियाणा के भिवानी जिले में चरखी दादरी के माई खुर्द गांव के सतीश कुमार भारतीय सेना में नायक थे। शुक्रवार को आतंकियों से हुई मुठभेड़ में उन्होंने अपनी जान की कुर्बानी दी। इससे पहले सतीश के दो दादा आजाद हिंद फौज में लड़ते हुए शहादत दे चुके हैं। इस परिवार की यह तीसरी शहादत है। सतीश का शव उनके गांव पहुंच चुका है।
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सेना में 5वीं पीढ़ी से तीसरी शहादत, जम्मू में बेटा शहीद
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सतीश के पिता बीएसएफ से रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर हैं, जो अपने आंसुओं को रिसने से रोक रहे हैं ताकि सतीश की पत्नी प्रमिला और मां केला देवी का हौसला नहीं टूटे। बेटी भी बड़े ही अनमने मन से परीक्षाओं की तैयारी में जुटी है, ये सोचकर कि अगर रो पड़ी तो मां टूट जाएगी। गांव की गलियों में भी सन्नाटा पसरा हुआ है।
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सतीश के पिता आजाद सिंह बताते हैं कि 18 साल की उम्र में उनके बेटे ने फौज ज्वाइन की थी। वर्ष 2001 में महाराष्ट्र के कामती सेंटर में ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स बटालियन में बतौर सिपाही के पद पर सतीश भर्ती हुआ था। बचपन से ही उनका सपना था कि दोनों बेटों में से एक फौज ज्वाइन कर पिछली चार पीढ़ियों से चली आ रही अपनी परंपरा को जारी रखें।
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सतीश के बड़े भाई जयप्रकाश ने बताया कि शुक्रवार देर शाम सैन्य अफसरों ने फोन पर उन्हें सतीश की शहादत की सूचना दी। बताया गया कि आतंकी हमले में शहीद होने से पहले सतीश ने दो आतंकियों को ढेर कर दिया था। कुछ दिन पहले हुई मुठभेड़ में भी सतीश ने दो आतंकवादियों को मार गिराया था।
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जयप्रकाश कहते हैं कि उन्हें गर्व है कि उसके भाई ने अपनी शहादत से पहले 3 आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया। गत 16 नवंबर को ही सतीश दो माह की छुट्टियां काटकर ड्यूटी पर गया था।
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बेटे की शहादत के गम में डूबे सतीश के पिता आजाद सिंह को इस बात का गर्व है कि शहीद होने से पहले अपने साथियों के साथ उसने दो आतंकियों को मार गिराया। उन्होंने कहा कि मेरा बेटा असली ‘नायक’ निकला। गर्व है कि देश के लिए शहादत देने की परिवार की विरासत को उसने हौसले संभाला।