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अदालती केसों को लेकर बड़ा बदलाव, वर्कलोड कम होगा और मामले भी नहीं लटकेंगे, जानिए कैसे

Wed, 19 Jun 2019 10:14 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
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अदालतों में केसों की सुनवाई संबंधी एक नियम में बड़ा बदलाव किया गया है। इससे वर्कलोड कम होगा और केस भी नहीं लटकेंगे, बल्कि जल्दी सुनवाई होगी।
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अदालतों का वर्कलोड कम करने की दिशा में हरियाणा सरकार ने एक खास पहल की है। इसके तहत अब जेलों से जारी होने वाले कस्टडी सर्टिफिकेट ऑनलाइन ही जारी किए जाएंगे। इससे जहां अदालतों में संबंधित केस ज्यादा लंबे नहीं लटकेंगे, वहीं कोर्ट का वर्कलोड भी कम होगा। ऐसी व्यवस्था करने वाला हरियाणा दिल्ली के बाद दूसरा राज्य बन गया है। उधर, विभागीय अफसर इस व्यवस्था को डिजिटल इंडिया की दिशा में विभाग की एक बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं।
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इसलिए जरूरी होता है कस्टडी सर्टिफिकेट
दरअसल, किसी भी मामले में जब किसी शख्स की गिरफ्तारी होती है और उसे न्यायिक हिरासत में लेने के बाद जेल में बंदी के रूप में रखा जाता है, तो वह जेल की कस्टडी में माना जाता है। उधर, संबंधित बंदी के वकील भी अपने क्लाइंट की जमानत के लिए अदालत में पैरवी करते हैं। जमानत संबंधी ऐसे मामलों में कई बार अदालतें संबंधित बंदी का कस्टडी सर्टिफिकेट तलब करती हैं। जमानत संबंधी केसों के अलावा भी कई अन्य मामलों में अदालतों द्वारा कस्टडी सर्टिफिकेट की मांग की जाती है।

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कोर्ट में देरी से पहुंच पाता था मैनुअल सर्टिफिकेट
हरियाणा में अभी तक जेल अथॉरिटी द्वारा इस कस्टडी सर्टिफिकेट को जारी करने और अदालत तक पहुंचाने की व्यवस्था पूरी तरह से मैनुअल थी। कस्टडी सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करने पर जेल अथॉरिटी रिकार्ड से मिलान करने के बाद संबंधित बंदी को सर्टिफिकेट जारी करती है, जिसमें यह अंकित होता है कि वह बंदी कितने समय से कितने समय तक जेल की कस्टडी में रहा है। सर्टिफिकेट तैयार होने के बाद उसे मैनुअली ही अदालत तक पहुंचाया जाता था। इस काम में अमूमन देरी हो जाती थी।

 
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देरी होने के चलते अदालतों में जमानत संबंधी व अन्य केस जिसमें ये सर्टिफिकेट जरूरी होता था, कई बार लंबे खींच जाते थे। लेकिन अब यह व्यवस्था ऑनलाइन शुरू की गई है। अब ये सर्टिफिकेट अदालतों तक ऑनलाइन एक ही दिन में पहुंच जाएंगे। उधर, सीनियर एडवोकेट संदीप सचदेवा के अनुसार हरियाणा सरकार की यह अच्छी पहल है, इससे अदालतों में मामले भी जल्द निपटेंगे और केसों में अगली तरीख भी नहीं मिलेगी। इससे जल्दी न्याय मिलने में भी मदद होगी।

 
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