हरियाणा अगले तीन साल में स्वास्थ्य के क्षेत्र में कायापलट करने वाले तीन प्रमुख राज्यों में शामिल होने के लिए अपना दावा पेश करने जा रहा है। नौ जून को नई दिल्ली में नीति आयोग के वाइस चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता में 13 राज्यों की बैठक होने जा रही है। टॉप-थ्री में आने के लिए इन राज्यों ने अपनी-अपनी दावेदारी पेश की है, जिसे बैठक में आंकड़ों और प्रस्तुतिकरण के जरिए और पुख्ता किया जाएगा।
हरियाणा की टक्कर 13 राज्यों में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, गुजरात, पंजाब से है। ये स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर कर रहे हैं। हरियाणा का पक्ष इसलिए मजबूत माना जा रहा है, चूंकि बीते साल में स्वास्थ्य के क्षेत्र में अहम सुधार हुए हैं। प्रदेश में शिशु मृत्यु दर एक हजार बच्चों पर 36 है, जबकि देश में ये औसत 41 है। इसके साथ ही मातृ मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
बैठक में स्वास्थ्य मंत्री अनिल इन खूबियों को गिनाने के साथ ही भविष्य का खाका भी प्रस्तुत करेंगे। विज के साथ स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अमित झा, एनएचएम की प्रबंध निदेशक अमनीत पी कुमार, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सतीश अग्रवाल भी बैठक में मौजूद रहेंगे।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में नजीर पेश करने के लिए बेहतर आंकड़ों के आधार पर चुने जाने वाले तीन राज्यों की सूरत बदलने में नीति आयोग वित्तीय के साथ तकनीकी मदद करेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ मुहैया कराए जाएंगे ताकि प्रदेश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में तेजी से सुधार लाया जा सके।
हरियाणा के प्रमुख लक्ष्य
. शिशु, मातृ मृत्यु दर में कमी, टीकाकरण सौ फीसदी करना, अनीमिया का खात्मा, एचआईवी, टीबी और मलेरिया के मामले लगभग खत्म करना स्वास्थ्य विभाग की मुख्य प्राथमिकताएं रहेंगी।
चुनौतियां
. स्वास्थ्य पर लोगों की जेब से होने वाला खर्च रोकना
. कुछ लोगों को सुविधा, कुछ वंचित, ये भेदभाव खत्म करना
. स्वास्थ्य ढांचा और मानव संसाधन बढ़ाना
हरियाणा का पक्ष मजबूत : विज
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि टॉप-थ्री में आने की पूरी उम्मीद है। प्रतिद्वंद्वी राज्यों के मुकाबले बीते कुछ साल में हरियाणा ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सबसे बेहतरीन काम किया है।