आतंकियों के साथ मुठभेड़ में पति शहीद हो गए और ऐसा होने के कुछ घंटों बाद ही पत्नी को उनका भेजा हुआ सालगिरह का तोहफा मिल गया, पल काफी रुलाने वाला था।
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शहीद मेजर सतीश दहिया का अंतिम संस्कार
तोहफा शादी की सालगिरह का था। हंदवाड़ा में आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हुए 31 वर्षीय मेजर सतीश दहिया की पत्नी ने बताया कि शुक्रवार को उनकी शादी की सालगिरह है। इस मौके के लिए उनके पति ने कुछ गिफ्ट और एक संदेश भेजा था, जो उन्हें मंगलवार की दोपहर को मिल गया था। संदेश सुनाते हुए सुजाता ने बताया कि इसमें उन्होंने लिखा था- मैं तुमसे प्यार करता हूं, तुम ही मेरी प्रेरणा हो… सतीश।
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मेजर सतीश दहिया का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
आंखू में आंसू लिए सुजाता ने कहा कि मुझे अपने पति पर गर्व है कि आतंकियों से लड़ते हुए वह शहीद हुए। सतीश काफी बहादुर थे, इसलिए उन्होंने खुद उस एरिया में लड़ने के लिए जाने का आग्रह किया जो उनके अधीन आता ही नहीं था। सुजाता ने कहा कि पति की बहादुरी ने उसका सिर फक्र से ऊंचा कर दिया। अब वे अपनी इकलौती बेटी को भी आर्मी में अफसर बनाएंगी, ताकि वह अपने पिता के सपनों को पूरा कर सके।
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मेजर सतीश दहिया का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
शहीद मेजर सतीश दहिया मंगलवार को शहीद हो गए थे। उनका पार्थिव शरीर बुधवार शाम नारनौल में स्थित उनके पैतृक गांव बनिहाड़ी पहुंचा और यहां राजकीय सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार कर दिया गया। शहीद को उनकी तीन साल की बेटी प्रिया ने दी मुखाग्नि दी। इस मौके पर सेना की टुकड़ियों ने सलामी दी। वहीं मेजर शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए करीब 800 लोग वहां पहुंचे थे।
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मेजर सतीश दहिया का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
मेजर के पिता को भीड़ के चलते अपने एकलौते बेटे को आखिरी बार देखने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा और जैसे ही वह अपने बेटे के पार्थिव शरीर तक पहुंचे वह फूट-फूटकर रो पड़े। मेजर सतीश दहिया के बारे में बात करते हुए उनके चचेरे भाई राजेश दहिया ने बताया कि सतीश बहुत ही होशियार और साहसी आदमी था। सतीश हमेशा कहा करता था कि मैं वहां पर बहुत गीदड़ों को मारता हूं और जब मैं वापस आउंगा तो लोग मुझ पर गर्व करेंगे।
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मेजर सतीश दहिया की पत्नी
- फोटो : अमर उजाला
शहीद मेजर सतीश दहिया की शहादत के बाद ससुराल नलवाटी में भी गमगीन माहौल है। मेजर की शादी नलवाटी क्षेत्र के पवेरा गांव में हिम्मत सिंह की बेटी निक्की उर्फ सुजाता के साथ 17 फरवरी 2012 को हुई थी। जैसे ही रात को मेजर सतीश दहिया के शहीद होने का समाचार मिला परिवार गांव में शोक छा गया। 5 दिसंबर को निक्की के ताऊ का लड़का संदीप सरपंच और दिसंबर के अंतिम सप्ताह में दादा सहीराम का भी निधन हो गया था।
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मेजर सतीश दहिया का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
महेंद्रगढ़ जिले में नांगल चौधरी के पास बनिहाड़ी गांव के रहने वाले 32 वर्षीय मेजर सतीश दहिया अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। उनकी एक ढाई साल की बच्ची है। 62 वर्षीय पिता अचल सिंह और मां अनीता देवी उनकी पत्नी व बेटी के साथ गांव में ही रह रहे हैं। पहले वह मोदी नगर में पहले व्यापार करते थे। शहीद मेजर की पत्नी व बेटी भी गांव में ही रहती हैं।
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मेजर सतीश दहिया
7 साल पहले 2008 में सेना में भर्ती हुए मेजर सतीश दहिया 13 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे। मंगलवार को हंदवाड़ा ऑपरेशन को लीड कर रहे थे। आतंकियों की घेराबंदी करने के बाद मुठभेड़ में पेट में गोली लगने से वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए। बाकी घायल साथियों के उन्हें श्रीनगर के बेस हॉस्पीटल में लाया गया तो यहां वह जिंदगी हार भारत मां का प्यार जीत गए।
शहीद सतीश दहिया ने प्रारंभिक शिक्षा बनिहाड़ी के राजकीय स्कूल से की। वहीं दस जमा दो की शिक्षा उन्होंने उत्तर प्रदेश के मोदी नगर से प्राप्त की। इसके बाद शहीद ने राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर से एमए अंग्रेजी विषय में की। 2008 में बतौर कमीशन वे सेना में लेफ्टिनेंट पद पर भर्ती हुए। सेना द्वारा उन्हें 2009 में बहादुरी पुरस्कार भी दिया गया। फरवरी 2011 में उनकी शादी सुजाता चौधरी के साथ हुई, जो एक घरेलू महिला हैं। 2012 में प्रमोशन पाकर वे मेजर बने।