गुरुग्राम शूटआउट के आरोपी महिपाल की इस करतूत से कोसली में रहने वाले उसके मामा भी स्तब्ध है। हालांकि महिपाल के मामा धनसिंह और ईश्वरसिंह का कहना है उनका भांजा निर्दोष है और उसको परेशान करने से उसने यह कदम उठाया है। महिपाल का लालन-पालन करने वाले ईश्वर सिंह ने बताया कि महिपाल मेहनती होने के साथ बेहद शांत स्वभाव का था। पढ़ाई के दौरान गांव में किसी से आज तक लड़ाई नहीं किया। मामा ने बताया कि चर्च जाने के बारे में उन्हें नहीं पता है लेकिन उसका भांजा कई बार जब घर आता था अकेले में रोता था।
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Gurugram murder
हमने पूछने का भी प्रयास किया लेकिन हमें ठोस वजह बताई नहीं। बताया जा रहा है कि आरोपी ने अपनी मां को कोसली और पत्नी को घटना से एक दिन पहले ही उसके पीहर में भेज दिया था। रविवार सुबह करीब तीन बजे कोसली पहुंची गुरुग्राम पुलिस उसकी मां को मामा के घर से लेकर चली गई। आपको बता दें कि आरोपी महिपाल का जन्म भी कोसली में ही हुआ था और उसने कोसली में राजकीय स्कूल से ही बाहरवीं तक की पढ़ाई करने के बाद 2007 में पुलिस में भर्ती भी अपने मामा के प्रयासों से हुआ था।
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Gurugram murder
बिल्कुल शांत-चित स्वभाव के महिपाल की इस करतूत पर उसके मामा हैरान है क्योंकि शुरूआत से मेहनती रहा महिपाल का यह स्वभाव कभी उन्होंने बचपन से अब तक नजर नहीं आया है। हालांकि आरोपी 23 सितंबर को अपने मामा से मिलने के लिए उनके घर आया था लेकिन उस समय केवल छुट्टी नहीं मिलने की शिकायत तो थी उसे लेकिन उसके अंदर ऐसा इंसान छिपा बैठा है कभी सोचा तक नहीं है।
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मूल रूप से महेंद्रगढ़ जिला के गांव भूंगारका निवासी होशियार सिंह के बेटे महिपाल का जन्म कोसली में ही हुआ था। उसके पिता के निधन के बाद उसकी मां सावित्री मायके आ गई थी जिसके बाद महिपाल को जन्म दिया। महिपाल के चार मामा हैं जिनमें ईश्वर सिंह और धन्नाराम अविवाहित हैं। जबकि अतर सिंह व दानसिंह विवाहित हैं। महिपाल की मां अतरसिंह व दानसिंह के साथ ही रहती थी और आज भी दोनों का संयुक्त परिवार है।
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Gurugram murder
पूरी तरह से खेती पर निर्भर मामा ने भी उसका पालन पोषण करके उसको शिक्षा दिलाई और उसके बाद जून 2007 में महिपाल पुलिस में भर्ती हो गया था। पुलिस में भर्ती होने के बाद कुछ समय तक यह अलग-अलग स्थानों पर रहा और 12 दिसंबर 2009 को महिपाल की शादी गुरुग्राम के रोजका निवासी मीनू के साथ हो गई थी। मीनू से शादी होने के बाद महिपाल सिंह अपने मां और पत्नी को लेकर पैतृक गांव भूंगारका में चला गया था।
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Gurugram murder
डेढ़ साल पहले बना अंगरक्षक, चर्च भी जाता था
पारिवारिक सदस्यों के अनुसार महिपाल की ड्यूटी गुरुग्राम में ही रही है और इससे पहले वह पुलिस लाइन में था। करीब डेढ़ साल पहले ही उसको जिला एवं सत्र न्यायाधीश कृष्णकांत शर्मा का अंगरक्षक लगाया था। इसके बाद से अपनी मां और बच्चों को भी गुरुग्राम लेकर चला गया था। गांव में उसके परिवार का कोई भी सदस्य नहीं रहता था। शादी के बाद उसको मीनू से दो बेटियां पैदा हुई।
लगभग एक साल की अवधि से वह कभी-कभार चर्च में भी जाता था। हालांकि उसके मामा दानसिंह का कहना था कि वह अंगरक्षक के तौर पर न्यायाधीश के परिवार की बढ़ाई करता था लेकिन अब पता नहीं अचानक उसे क्या होगा। इससे पहले वह अपने मामा से मिलने के लिए 23 सितंबर को ही आया था। उस समय खुश तो था लेकिन अवकाश नहीं मिलने की बात उसने अवश्य कही थी।