आम आदमी पार्टी का साथ तो छोड़ दिया, ऐसे में अब कॉमेडियन गुरप्रीत घुग्गी आगे क्या करेंगे। आइए बात करते हैं, उनकी फ्यूचर प्लानिंग पर।
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गुरप्रीत घुग्गी की प्रेस कांफ्रेंस
चंडीगढ़ प्रेस क्लब में प्रेस कांफ्रेंस करके गुरप्रीत घुग्गी ने आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। जब पत्रकारों ने पूछा कि अब वे क्या करेंगे। आगे की प्लानिंग क्या है तो उन्होंने बड़े ही सहज लहजे में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अब मैं कुछ दिन आराम करूंगा। काफी समय से परिवार के साथ वक्त नहीं बिताया। बच्चों के साथ घूमने जाऊंगा, उन्हें पूरा वक्त दूंगा।
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गुरप्रीत घुग्गी की प्रेस कांफ्रेंस
गुरप्रीत घुग्गी ने कहा कि राजनीति में आने से पहले वे कई हिट मूवी दे चुके हैं। मैं कोई वेहला कलाकार नइ सी, न ही अब हूं। मैं फिर से अपनी दुनिया में लौटूंगा। बता दें कि घुग्गी ने भगवंत मान की नियुक्ति और नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वह ऐसे व्यक्ति के अधीन काम नहीं कर सकते, जिसे नियुक्त करते समय कहा जा रहा हो कि प्रधान बना देते है, शराब छोड़ दो। वह व्यक्ति भी शराब छोड़ने का आश्वासन दे रहा है।
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गुरप्रीत घुग्गी की प्रेस कांफ्रेंस
घुग्गी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल को सार्वजनिक तौर पर ऐसी बात ही नहीं करनी चाहिए थी, इससे पार्टी की छवि खराब होती है। अगर मान को बनाना ही था तो तीन महीने इंतजार कर लेते, शराब छोड़ देता, फिर बना देते। घुग्गी ने कहा कि निजी तौर पर उन्हें मान से कोई दिक्कत नहीं, वह अच्छे वक्ता और कलाकार हैं। लेकिन शराब और इस संबंध में उनके वायरल विडियो चिंताजनक हैं।
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गुरप्रीत घुग्गी
यह भी सवाल उठाया कि जब सुच्चा सिंह छोटेपुर के जाने के बाद उन्हें कन्वीनर बनाया गया था, तब भी मान उपलब्ध थे, तब उन्हें क्यों नहीं बनाया गया? वह मना करते रहे कि उन्हें कैंपेनर बनाया जाए, लेकिन उस समय पार्टी को ऐसा चेहरा चाहिए था, जिस पर पंजाब भरोसा कर सके, जो पार्टी को जोड़ सके। मान तब भी उपलब्ध थे, आज उनमें क्या खासियत पैदा हो गई। घुग्गी ने मान की नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
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कॉमेडियम गुरप्रीत घुग्गी
घुग्गी ने आरोप लगाया कि भगवंत मान ने कन्वीनर बनने के लिए पार्टी पर प्रेशर डाला। भगवंत मान सांसद और संसदीय दल के नेता हैं। कैंपेन कमेटी और पीएसी के मेंबर है। उनके पास पहले ही सूबा कन्वीनर से ज्यादा पॉवर है। मैंने सबसे पहले सुझाव दिया था कि डॉ. धरमवीर गांधी को वापस लाकर कनवीनर बनाया जाए। पार्टी में सुखपाल खैरा बहुत बेहतर विकल्प थे। अगर उन पर सहमति नहीं है तो अनुभवी एचएस फूलका भी उपलब्ध थे। पर किसी को नहीं बनाया।
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गुरप्रीत घुग्गी
- फोटो : फाइल फोटो
घग्गी ने कहा कि दिल्ली के ऑब्जर्वरों की लगातार शिकायतें आ रही थीं। मैंने कहा कि इन्हें वापस भेजो, जिसके बाद 54 लोगों को दिल्ली भेजा गया, लेकिन बाद में वे फिर आने शुरू हो गए। इन पर आरोप बढ़ते जा रहे थे। किसी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई। पंजाब में हार के बाद मुझे कहा गया कि दिल्ली में प्रचार करो। मैंने कहा कि अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह, दुर्गेश पाठक यहां पांच मिनट केलिए आएं और वॉलंटियर्स का हौसला बढ़ाएं।
कन्वीनर होने के नाते मैंने बार-बार सुच्चा सिंह छोटेपुर का स्टिंग वीडियो मांगा। लेकिन वह दिखाया नहीं गया। मैंने दूसरी पार्टियों केअच्छे लोगों को लाने की कोशिश की, कुछ मामलों में कामयाब हुआ। लेकिन ज्यादातर लोगों का रास्ता रोक दिया गया। जो रूठ कर जाता था, मैंने उसे मनाने की कोशिश की। लेकिन नेतृत्व ने हमेशा जो गया, उसे जाने दिया।