दुनिया भर में अपने गीतों से पहचान बना चुकीं महज 17 साल की दलित युवा गायिका गिन्नी माही अपनी गायकी से दलितों की आवाज को उठा रही हैं। तस्वीरों में देखिए पूरी कहानी।
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‘हक्का दे लिए लड़ना बाबा साहिब सिखा गए आ’
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Ginni Mahi
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माही ने संविधान निर्माता डॉ. भीम राव अंबेडकर को समर्पित ‘फैन बाबा साहिब दी’ गीत भी गाया है। ‘मैं तीह हां बाबा साहिब दी, जिन्हें लिखाया सी सविधान’ गाने ने भी खूब धमाल मचाया। गिन्नी ने स्पष्ट किया है कि इस गीत का मकसद किसी जाती और समाज को नीचा दिखना नहीं, बल्कि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करना है। गिन्नी का गाया हुआ गीत ‘हक्का दे लिए लड़ना बाबा साहिब सिखा गए आ’ भी काफी छाया रहा। इसके अलावा गिन्नी की दो एलबम गुरां दी दीवानी और गुरपुरब है कांशी वाले दा ने काफी नाम कमाया है।
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‘पढ़ो जुड़ो ते संघर्ष करो’ का संदेश
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Ginni Mahi
- फोटो : amar ujala
युवा गायिका गिन्नी माही को दो बार विदेशों में शो करने के आफर आ चुके हैं, मगर पढ़ाई की खातिर उन्होंने शो ठुकरा दिए थे। गिन्नी को पहली बार 2013 में यूके में शो करने का आफर आया था, उस समय वह दसवीं में पढ़ती थी। इसके बाद इस साल के फरवरी माह में इटली में शो करने के लिए बुलाया गया था, लेकिन दोनों बार गिन्नी ने जाने से इंकार कर दिया। गिन्नी ने कहा कि वह बाबा साहिब का संदेश ‘पढ़ो जुड़ो ते संघर्ष करो’ का संदेश अपने गीतों में समाज को देती हैं, ऐसे में वह अपनी पढ़ाई छोड़कर विदेशों में शो करने कैसे जा सकती थीं। उन्होंने कहा कि पहले वह पोस्ट ग्रेजुएशन तक पढ़ाई पूरी कर लें फिर विदेशों में शो करने के बारे में सोचेगी। गिन्नी ने कहा कि इस साल उनका गुरु नानक देव महाराज पर सिंगल ट्रैक गाना मार्केट में आएगा। इसको लेकर तैयारियां चल रही हैं।
दर्शकों की मांग पर एक ही गाना कई बार गाना पड़ता है
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गिन्नी का परिवार रविदास समाज से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि कई बार स्टेज शो के दौरान दर्शकों की मांग पर एक ही गाना कई बार गाना पड़ता है। उनका गाया ‘फैन बाबा साहिब दी’ गीत दर्शकों की ओर से खासा पसंद किया जाता है। वह जहां भी जाती है लोगों की तरफ से इस गीत को गाने की डिमांड की जाती हैं। गिन्नी ने कहा कि वह स्टेज प्रस्तुति आंखें बंद कर सतगुरु रविदास महाराज जी को याद कर ‘ऐसी लाल तुझ बिन कौन करें’ शब्द के गुणगान से शुरुआत करती है। गिन्नी को दो बार वॉइस ऑफ दोआबा का खिताब मिल चुका है। गिन्नी के अनुसार उनके गीतों की प्रसिद्ध गायक साबर कोटी, फिरोज खान और कंठ कलेर ने भी खासी तारीफ की है। गिन्नी ने कहा कि वह गायकी के साथ पढ़ाई पर पूरा ध्यान देती है।
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महज सात साल में ही गाना शुरू कर दिया था
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सुबह 5.30 से 6.30 बजे तक रियाज करने के बाद कॉलेज में पढ़ने के लिए जाती हैं। इसके बाद शाम को भी कुछ देर के लिए रियाज करती है। उनके पिता राकेश माही ने कहा कि उनकी बेटी ने महज सात साल में ही गाना शुरू कर दिया था। उसका गाना अच्छा लगा तो म्यूजिक टीचर विजय डोगरा के पास सिखाने भेजा। करीब दो ढाई साल उनसे सिखने के बाद गिन्नी ने सबसे पहले गांव जंडियाला में हुए जठेरों के मेले के दौरान स्टेज प्रस्तुति दी थी। उस समय गिन्नी की उम्र महज नौ साल की थी। गिन्नी ने मैट्रिक में 70 फीसदी और बारहवीं में 76 फीसदी नंबर हासिल किए हैं। अब वह जालंधर के एचएमवी कॉलेज में बीए फर्स्ट ईयर में पढ़ रही है।
एयर टिकट कंपनी में जॉब करने वाले गिन्नी के पिता राकेश माही ने बेटी की खातिर अपनी नौकरी छोड़ दी। अब वह बेटी के साथ ही उसके सपने को साकार करने में लगे हुए हैं। राकेश माही का परिवार मिलकर गिन्नी म्यूजिकल ग्रुप चला रहा है। राकेश ने कहा कि उनके तीन बच्चे हैं, जिसमें गिन्नी सबसे बड़ी हैं। उन्होंने कहा कि वह आज भी आबादपुरा इलाके में संयुक्त परिवार में रह रहे हैं। वह चार भाई हैं, जिनमें राकेश सबसे बड़े हैं।