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पल में उजड़ गया 6 महिलाओं का सुहाग, एक साथ जलीं चिताएं, मचा कोहराम

Fri, 03 Mar 2017 09:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल(हरियाणा)
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एक साथ जली छह लोगों की चिताएं
गांव में उस समय कोहराम मच गया। जब ‌एक ही घर की 6 महिलाओं के पतियों की चिताएं एक साथ जलीं। मंजर काफी खौफनाक था।
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एक साथ जली छह लोगों की चिताएं
शाम करीब छह बजे जब घर के बाहर एक कैंटर आया और उसमें से एक-एक करके छह लाशें उतारी गई तो परिवार के सदस्य ही नहीं पूरा गांव रो पड़ा। दो भाई और चार भतीजों के शव जैसे ही घर के आंगन रखे तो हर किसी की आंखें नम हो गई। महिलाओं की चीख ने हर किसी को रुला दिया। सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में सभी को बड़े ही गमगीन माहौल में संस्कार किया गया।

 
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एक साथ जली छह लोगों की चिताएं
करनाल जिले के गांव बरास से प्रीतम सिंह राणा का परिवार अंबाला के गांव मोली में भात भरने के लिए गया था। मंगलवार को परिवार के सदस्य बड़ी खुशी के साथ विवाह समारोह में शामिल होने गए थे। बुधवार को टवेरा गाड़ी में सवार होकर वे यूपी के गांव मैहटा में बारात में जा रहे थे। जैसे ही नारायणगढ़ साढौरा रोड पर चले तो कुछ ही दूरी पर एक ट्राले से गाड़ी की टक्कर हो गई।

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एक साथ जली छह लोगों की चिताएं
हादसे में बरास निवासी दो सगे भाइयों समेत चार भतीजों की मौत हो गई। इनके अलावा, मरने वालों में गाड़ी चालक व एक रिश्तेदार शामिल हैं। मृतकों में लीला राम (50) कामा (45), अंग्रेज राणा (32) वर्षीय, सोनू राणा (27) वर्षीय, हुकमा राणा (30), मन्नु राणा (55) शामिल हैं। बुधवार शाम को छहों के शव जैसे ही गांव में पहुंचे तो गांव में कोहराम मच गया।
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एक साथ जली छह लोगों की चिताएं
हादसे के कारण पूरा गांव व क्षेत्र स्तब्ध रहा। बुधवार को गांव में न तो कोई दुकान खुली न ही किसी के घर चूल्हा जला। हादसे की सूचना के बाद से ही हर कोई हादसे के बारे में जानकारी लेता रहा। दोपहर बाद जैसे ही ग्रामीणों को पता चला कि एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हो गई है वे सहम गए। शोक स्वरूप में गांव में कोई दुकान नहीं खुली और न ही शाम को घरों में चूल्हे जले।
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एक साथ जली छह लोगों की चिताएं
इस हादसे से न केवल गांव बरास व बल्कि पूरे जिले में मातम है। बच्चे अपने पिता के शव को देख कर बार-बार लिपटते रहे। सभी छह मृतकों के छोटे-छोटे बच्चे हैं और पढ़ रहे हैं। बच्चे बार बार-अपनी मां से पूछ रहे हैं कि क्या अब पापा कभी नहीं आएंगे। यह कहते बच्चे रो रो कर बेहोश हो रहे हैं। वहीं, मृतकों की पत्नी भी बेसुध हो रही हैं और उनकी आंखें रो रोकर पत्थर हो गई हैं।

 
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परिवार का मु‌खिया प्रीतम सिंह राणा हादसे के बाद से बदहवास हैं। बस एक ही बात कहते हैं कि उन्होंने किसी का क्या बिगाड़ा था, जो इतनी बड़ी सजा मिली। कितनी बड़ी विडंबना है कि ये सारे मैंने ही पाले थे, अपने हाथों से और आज भगवान ने ऐसा कर दिया कि मेरे ही हाथों वे शमशान घाट तक पहुंच गए। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे लोगों नम आंखों से मृतकों को विदाई दी।

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मृतक कामा के बेटे की शादी तो मार्च महीने में ही होने वाली थी। होकम सिंह की 2 लड़की ओर एक छोटा लड़का है जबकि अंग्रेज के दो छोटे-छोटे लड़के हैं। गांव के सोनू ने बताया कि शादी की रस्म के बाद वह तो मौली गांव से लौट आया था, लेकिन यह लोग बारात में जाने के लिए रुक गए थे। हादसे के चलते गांव में होने वाली शादी भी सादगी भरी रही।

 
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दरअसल, गांव बरास निवासी सुरेश प्रजापत की बेटी की शादी थी। पिलनी से संजू प्रजापत अपनी बारात लेकर गांव बरास में हंसी खुशी डीजे के साथ पहुंचा, लेकिन जैसे ही बारात को पता चला कि गांव में इतना बड़ा हादसा हो गया कि सभी ने शोक स्वरूप डीजे नहीं बजाया और सादगी के साथ रस्में पूरी की। दिनभर बाराती चौपाल में ही बैठे रहे और फेरों के बाद सादगी के साथ ही रवाना हो गए।
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