राखी से पहले भाई देश पर कुर्बान हो गया। पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो भाई का चेहरा देखकर बहन ने ऐसी बात कह दी, सुनकर सभी भावुक हो गए।
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Martyr Jaspreet Singh
जम्मू-कश्मीर में एलओेसी के पास पाकिस्तानी गोलीबारी में शहीद जवान जसप्रीत सिंह का पार्थिव शरीर बुधवार शाम गांव तलवंडी मल्लियां पहुंचा। जैसे ही शव पहुंचा घर में कोहराम मच गया। मां और भाई बहनों का रो रोकर बुरा हाल था। वहीं शहीद जवान के अंतिम दर्शनों के लिए काफी भीड़ उमड़ी और लोगों ने भारत माता की जय के नारे लगाए।
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इस दौरान शहीद जवान भाई का चेहरा देखकर बहन परविंद्र कौर ने कहा कि जिस तरह पाकिस्तानियों ने गोलियां मार उसके भाई के सीने को छलनी किया है, केंद्र सरकार भी पाकिस्तान के कई जवानों को गोलियों से छलनी करके बदला लें, तभी उनके कलेजे में ठंडक पहुंचेगी। बहन ने कहा कि राखी से पहले भाई छीन लिया, ऐसे पाकिस्तान को तबाह कर देना चाहिए।
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शहीद जवान के शव को कुछ देर घर में रखने के बाद गांव के सरकारी सेकेंडरी स्कूल में रखा गया। यहां पूरे गांव के लोगों ने उनके अंतिम दर्शन किए। इसके बाद श्मशान घाट लाया गया। जहां 7वीं बटालियन राजपूताना राइफल फिरोजपुर ने सलामी दी। पिता स्वर्ण सिंह और भाई कुलदीप ने शहीद जवान को मुखग्नि दी। वहीं मौके पर काफी संख्या में प्रशासन के अधिकारी पहुंचे।
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मौके पर पहुंचे पंजाब कांग्रेस प्रधान सुनील कुमार जाखड़ ने शहीद जवान जसप्रीत सिंह के परिवार से दुख सांझा किया। उन्होंने शहीद को श्रद्धांजलि भेंट करते कहा कि सीमा पर बढ़ रहा तनाव चिंता का विषय है। इस मौके उन्होंने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से शहीद के परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को पंजाब पुलिस में नौकरी देने का एलान भी किया।
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गौरतलब है कि पंजाब के मोगा का रहने वाला जसप्रीत सिंह राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से हुई फायरिंग में घायल हो गया था। घायल जसप्रीत को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। लेकिन जान देने से पहले इस बहादुर बेटे ने 160 बच्चों की जान बचाई। रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने इसकी पुष्टि की और जानकारी जसप्रीत के परिजनों तक पहुंचाई।
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शहीद के पिता स्वर्ण सिंह ने बताया कि जसप्रीत में बचपन से ही देशसेवा करने का जज्बा था। वो कहता था, पिताजी मैं बड़ा होकर सैनिक बनूंगा तथा देश के लिए शहीद होकर गांव व आपका नाम रोशन करूंगा। आज उसने अपनी बात सच करके दिखा दी, लेकिन मुझे अब चिंता है कि मैं परिवार का कर्ज कैसे उतारुंगा। जसप्रीत परिवार का इकलौता सहारा था, वो भी छोड़कर चला गया।
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जसप्रीत सिंह की मां हरजिंद्र कौर का रो रो कर बुरा हाल है। उन्होंने रोते रोते बताया कि जसप्रीत 9 महीने पहले घर आया था और बहन परविंदर कौर की शादी की थी। इसके लिए उसने डेढ़ लाख का कर्ज लिया था। दो भाई कुलदीप सिंह और गोपी अभी पढ़ रहे हैं। छोटी बहन वीरपाल कौर भी पढ़ रही है, लेकिन अब सभी का क्या होगा। पढ़ाई कैसे पूरी होगी, कर्ज कैसे उतरेगा।
शहीद जसप्रीत के पिता स्वर्ण सिंह ने बताया कि जस्सी लगभग 4 वर्ष पहले भारतीय सेना की 8 सिख लाई यूनिट में भर्ती हुआ था। 12वीं तक की प्रारंभिक शिक्षा जस्सी ने गांव के ही स्कूल से प्राप्त की थी। कारीगरी में माहिर था, उसके बावजूद वह सेना में भर्ती हुआ। आजकल नौशेरा सेक्टर में तैनात था कि पाकिस्तान के सीजफायर ने उसकी जान ले ली।