नामी अस्पताल के डॉक्टर्स की शर्मनाक करतूत ने चिकित्सा की दुनिया को शर्मसार कर दिया। आखिर ऐसा क्या हुआ? जानिए तस्वीरों में।
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इस अस्पताल के डॉक्टर्स की करतूत पढ़ शर्मसार होंगे आप
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चंडीगढ़ में सेक्टर-44 स्थित चैतन्य अस्पताल के डॉक्टर्स ने परिजनों से पहले नवजान की मौत बात छुपाई, फिर इलाज के नाम पर तीन लाख रुपये वसूल लिए। मामले का खुलासा होने पर डॉक्टर्स ने परिजनों से मारपीट भी की। पुलिस में मामला दर्ज कराया गया। मौके पर पहुंच कर पुलिस ने स्थिति संभाली और डॉक्टर्स को पूछताछ के लिए ले गई।
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पंचकूला के सेक्टर-सात निवासी अमित गोयल ने बताया कि उनकी पत्नी दो जुलाई को सेक्टर-44 के चेतन्य अस्पताल में एडमिट हुई थी। इसी दिन उन्होंने प्रीमिच्योर बेबी को जन्म दिया। चार जुलाई यानी शनिवार को सुबह शिशु विशेषज्ञ डॉ. अनिल नारंग ने अमित और उनकी फैमिली की काउंसलिंग की। उन्होंने कहा कि नवजात की हालत गंभीर है। अभी उसे वेंटिलेटर पर रखना होगा। 10 से 15 दिन भी लग सकते हैं।
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परिजनों ने आपस में विचार-विमर्श किया और पीजीआई के डॉक्टरों से सलाह लेने के बारे में सोचा। पीजीआई में दिखाने के लिए नवजात की स्टेटस और उसकी अन्य रिपोर्ट की जरूरत थी। रिपोर्ट लेने के लिए जब वे काउंटर पर पहुंचे तो वहां बैठे एक स्टाफ कर्मी ने बताया कि बच्ची की तो शुक्रवार रात ही मौत हो गई थी। डेथ समरी रिपोर्ट भी बन गई है। इससे परिजन भड़क गए और डॉक्टर अनिल नारंग के पास पहुंचे।
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डॉ. अनिल नारंग ने परिजनों को जवाब दिया कि बच्ची की हार्ट बीट चल रही है। स्थिति गंभीर है। परिजन पूछ रहे थे कि बच्ची जिंदा है या मर गई है। लेकिन डॉक्टर ने सीधा जवाब न देकर बताया कि स्थिति गंभीर है। सुनवाई न होने पर परिजनों ने पुलिस को फोन किया। मौके पर पुलिस पहुंच गई और परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया।
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चैतन्य अस्पताल ने पीजीआई के पीडियाट्रिक मेडिसिन के डॉक्टर प्रवीण कुमार को बुलाया, ताकि बच्ची की स्थिति क्लीयर हो सके। करीब डेढ़ बजे डॉक्टर प्रवीण कुमार आए और उन्होंने बच्ची को देखने के बाद मृत घोषित कर दिया। इससे परिजन और भड़क गए। परिजनों और अस्पताल कर्मियों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को शांत कराने की कोशिश की।
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बच्ची के मौत मामले में पुलिस को अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कई अहम सुबूत हाथ लगे हैं। अस्पताल के कंप्यूटर से पेशेंट की हिस्ट्री के केस के सबंध मिले रिकार्ड में पीड़ितों का भी रिकार्ड मिला। रिकार्ड से पता चला कि अस्पताल प्रबंधन ने मृतक बच्चे की मां रजनी के रिकार्ड में डेथ समरी लिखा रखी थी। अस्पताल की ओर से तीन जुलाई को डेथ समरी बनाई गई। जिसे फिर से 4 जुलाई को अपडेट किया गया।
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पुलिस ऐसे में सवाल यह उठा रही है कि जब बच्ची चार जुलाई का मरी तो डाक्टरों ने तीन जुलाई को आखिर रजनी के रिकार्ड में डेथ समरी का जिक्र क्यों कर रखा है। दो जुलाई को अस्पताल में भर्ती हुई रजनी ने दो घंटे बाद ही बच्ची को जन्म दे दिया। इसके बाद भी डाक्टरों द्वारा उस दिन के बजाए दूसरे दिन तीन जुलाई को बच्ची से परिजनों को मिलवाया गया। जिस दौरान बच्चे का कोई मूवमेंट ही नहीं हो रहा था।
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मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि रजनी ने दो जुलाई को अस्पताल में एक प्रीमिच्योर बच्ची को जन्म दिया था। उसका वजन 1.5 किलोग्राम था। जन्म के समय बच्ची रोई नहीं। उसे तुरंत नीयोनेटल आईसीयू में शिफ्ट किया गया। अंदरूनी हिस्सों में ब्लीडिंग हो रही थी। इस बारे में परिजनों को बताया जा चुका था। शनिवार सुबह परिजनों को बताया कि बच्ची की स्थिति गंभीर होती जा रही है। सांस नहीं चल रही है। सिर्फ हार्ट बीट है। यह सब बताने के कुछ देर बाद परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया।
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दूसरी ओर, चैतन्य अस्पताल के प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग को लेकर लोगों ने सेक्टर-34 थाने का घेराव किया। बच्ची की मौत के बाद परिजनों और समार्थकों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन के कंप्यूटर से मिले डेथ समरी इस बात का सुबूत है कि डॉक्टर ने धोखाधड़ी की है।
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एसीपी साउथ डॉ. नवदीप सिंह बराड़ का कहना है कि बच्ची के मौत मामले में कंप्यूटर से कई सबूत मिले हैं। जिन्हें शिकायत के साथ अटैच कर दिया गया है। अस्पताल में लगे कंप्यूटर के डाटा के साथ कोई छेड़छाड़ न कर सके इसलिए सील कर दिया गया है। शनिवार को पीड़ित और अस्पताल दोनों पक्षों का बयान दर्ज कर लिया गया है। अभी तक किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद दोषी पर कार्रवाई की जाएगी।