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महिला सशक्तिकरण
महिला सशक्तीकरण शहरी, कामकाजी महिलाओं तक ही सीमित नहीं है। अब सुदूर कस्बों और गांवों की महिलाएं भी अपने अरमानों को उड़ान दे रही हैं। खासकर जब उन्हें कोई गौरव लडवाल जैसा खेवनहार मिल जाए। उत्तराखंड के जिला चंपावत के गौरव लडवाल ने महिला सशक्तीकरण का बीड़ा उठाया और राज्य सरकार द्वारा चाय पत्ती के काम को एक साल पहले बंद करने से इसमें लगी महिलाओं को अपने साथ जोड़ा। अब 22 गांवों की ये 422 महिलाएं जंगल में जाकर नेचुरल तरीके से शहद बना रही हैं।
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Darjeeling tea industry
कमाई को कर रहे हैं री-इन्वेस्ट
कुमाऊं आर्गेनिक ग्रुप से जुड़ी ये महिलाएं अपनी आय का आधा हिस्सा कंपनी में इन्वेस्ट करती हैं। इस पैसे से उनके नाम से मशीनरी या जरूरत का सामान खरीदा जाता है। गौरव बताते है कि अभी तक कुमाऊं आर्गेनिक ग्रुप में सारा पैसा उन्होंने ही लगाया हुआ था। लेकिन अब यह महिलाएं भी उनकी पार्टनर है। उत्तराखंड सरकार आर्गेनिक खेती केलिए सब्सिडी देती है, लेकिन फिलहाल उन्हें कुछ नहीं मिला है। अपने ही सीमित संसाधनों से वे ग्रुप को प्रमोट कर रहे हैं।
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महिला सशक्तिकरण
समय-समय पर दिलवाते हैं ट्रेनिंग
गौरव लडवाल के ग्रुप में 422 महिलाएं हैं, जो जंगल में जाकर नेचुरल तरीके से शहद तैयार करती हैं। ज्यादातर महिलाएं शादीशुदा और अकुशल हैं, इसलिए गौरव समय-समय पर उनके लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम करवाते हैं। शहद के अलावा उन्हें चाय पत्तियों के बारे में भी ट्रेनिंग र्दी जाती है। इससे उन्हें पता चलता है कि किस पत्ती से व्हाइट टी बनेगी और किस पत्ती से ब्लैक टी। उनकी बनाई व्हाइट टी की जबरदस्त डिमांड है। जबकि ब्लैक टी के लिए वे देश में मार्केट तैयार कर रहे हैं।
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महिला सशक्तिकरण
विदेशों में जा रही है चाय पत्ती
कुमाऊं की चाय पत्ती कनाडा, जर्मनी, इंग्लैंड में भेजी जा रही है। अब साउथ कोरिया, अमेरिका और आस्ट्रेलिया में भी सेंपल भेजे हैं। आर्डर मिलने पर वहां भी इसे भेजा जाएगा। इसके अलावा वे देशभर में लगने वाले आर्गेनिक मेलों में अपनी ब्रांडिंग करते हैं। 12 से 14 जनवरी तक चंडीगढ़ सेक्टर 10 की लेजर वैली में लगे भारतीय महिला उत्सव में भी वे अपने उत्पाद लेकर आए थे। गौरव का दावा है कि कुमाऊं की चाय दार्जिलिंग की चाय से भी अच्छी क्वालिटी की है।
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महिला सशक्तिकरण
अंग्रेजों ने उगाए थे चाय के पौधे
150 वर्ष पहले अंग्रेज चीन से चाय के पौधे लेकर आए थे, जिन्हें उन्होंने पहले उत्तराखंड और फिर असम में लगाया। मार्केट होने के कारण असम काफी आगे निकल गया, जबकि उत्तराखंड इनके बारे में अब जान पाया है। हाल ही में गौरव ने अपने ग्रुप मैनेजर टी. सुखा को ट्रेनिंग के लिए असम भेजा था। वे वहां जो सीखकर आए, यहां आकर उन्होंने बाकी लोगों को जानकारी दी। इस तरह ग्रुप से जुड़ीं ये 422 महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अब हुनरमंद भी बन चुकी है।
व्हाइट टी शरीर के लिए फायदेमंद (फोटो)
‘व्हाइट टी शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद है। इसमें ग्रीन टी से 20 गुना ज्यादा एंटीऑक्सिडेंट पाए जाते हैं। यह हमारे शरीर को स्लिम करने में बहुत कारगर है। व्हाइट टी इसलिए भी शरीर के लिए फायदेमंद है, क्योंकि इसे सबसे कम प्रोसेस किया जाता है। यह एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होती है और कोलस्ट्रोल एवं ब्लड प्रेशर को कम करने में मददगार है। इसके अलावा इसमें कैफीन की मात्रा भी कम होती है। ऐसे में यह झुर्रियों को रोकने और मुंहासे ठीक करने में भी सहायक है।’
- डॉ. स्वप्ना मिश्रा, एडिशनल डायरेक्टर, फोर्टिस अस्पताल, मोहाली